मुसहफ़ का पृष्ठ 523 23 आयतों को समाहित करता है। यह जुज़ 27, हिज़्ब 53 में है।
05 अगस्त 2026 को 16h34 बजे अपडेट किया गया
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كَذَٰلِكَ مَآ أَتَى ٱلَّذِينَ مِن قَبْلِهِم مِّن رَّسُولٍ إِلَّا قَالُوا۟ سَاحِرٌ أَوْ مَجْنُونٌ ﴿52﴾
इसी तरह उनसे पहले लोगों के पास जो पैग़म्बर आता तो वह उसको जादूगर कहते या सिड़ी दीवाना (बताते)
أَتَوَاصَوْا۟ بِهِۦ ۚ بَلْ هُمْ قَوْمٌۭ طَاغُونَ ﴿53﴾
ये लोग एक दूसरे को ऐसी बात की वसीयत करते आते हैं (नहीं) बल्कि ये लोग हैं ही सरकश
فَتَوَلَّ عَنْهُمْ فَمَآ أَنتَ بِمَلُومٍۢ ﴿54﴾
तो (ऐ रसूल) तुम इनसे मुँह फेर लो तुम पर तो कुछ इल्ज़ाम नहीं है
وَذَكِّرْ فَإِنَّ ٱلذِّكْرَىٰ تَنفَعُ ٱلْمُؤْمِنِينَ ﴿55﴾
और नसीहत किए जाओ क्योंकि नसीहत मोमिनीन को फायदा देती है
وَمَا خَلَقْتُ ٱلْجِنَّ وَٱلْإِنسَ إِلَّا لِيَعْبُدُونِ ﴿56﴾
और मैने जिनों और आदमियों को इसी ग़रज़ से पैदा किया कि वह मेरी इबादत करें
مَآ أُرِيدُ مِنْهُم مِّن رِّزْقٍۢ وَمَآ أُرِيدُ أَن يُطْعِمُونِ ﴿57﴾
न तो मैं उनसे रोज़ी का तालिब हूँ और न ये चाहता हूँ कि मुझे खाना खिलाएँ
إِنَّ ٱللَّهَ هُوَ ٱلرَّزَّاقُ ذُو ٱلْقُوَّةِ ٱلْمَتِينُ ﴿58﴾
ख़ुदा ख़ुद बड़ा रोज़ी देने वाला ज़ोरावर (और) ज़बरदस्त है
فَإِنَّ لِلَّذِينَ ظَلَمُوا۟ ذَنُوبًۭا مِّثْلَ ذَنُوبِ أَصْحَـٰبِهِمْ فَلَا يَسْتَعْجِلُونِ ﴿59﴾
तो (इन) ज़ालिमों के वास्ते भी अज़ाब का कुछ हिस्सा है जिस तरह उनके साथियों के लिए हिस्सा था तो इनको हम से जल्दी न करनी चाहिए
فَوَيْلٌۭ لِّلَّذِينَ كَفَرُوا۟ مِن يَوْمِهِمُ ٱلَّذِى يُوعَدُونَ ﴿60﴾
तो जिस दिन का इन काफ़िरों से वायदा किया जाता है इससे इनके लिए ख़राबी है
وَٱلطُّورِ ﴿1﴾
(कोहे) तूर की क़सम
وَكِتَـٰبٍۢ مَّسْطُورٍۢ ﴿2﴾
और उसकी किताब (लौहे महफूज़) की
فِى رَقٍّۢ مَّنشُورٍۢ ﴿3﴾
जो क़ुशादा औराक़ में लिखी हुई है
وَٱلْبَيْتِ ٱلْمَعْمُورِ ﴿4﴾
और बैतुल मामूर की (जो काबा के सामने फरिश्तों का क़िब्ला है)
وَٱلسَّقْفِ ٱلْمَرْفُوعِ ﴿5﴾
और ऊँची छत (आसमान) की
وَٱلْبَحْرِ ٱلْمَسْجُورِ ﴿6﴾
और जोश व ख़रोश वाले समन्दर की
إِنَّ عَذَابَ رَبِّكَ لَوَٰقِعٌۭ ﴿7﴾
कि तुम्हारे परवरदिगार का अज़ाब बेशक वाकेए होकर रहेगा
مَّا لَهُۥ مِن دَافِعٍۢ ﴿8﴾
(और) इसका कोई रोकने वाला नहीं
يَوْمَ تَمُورُ ٱلسَّمَآءُ مَوْرًۭا ﴿9﴾
जिस दिन आसमान चक्कर खाने लगेगा
وَتَسِيرُ ٱلْجِبَالُ سَيْرًۭا ﴿10﴾
और पहाड़ उड़ने लगेंगे
فَوَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ ﴿11﴾
तो उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है
ٱلَّذِينَ هُمْ فِى خَوْضٍۢ يَلْعَبُونَ ﴿12﴾
जो लोग बातिल में पड़े खेल रहे हैं
يَوْمَ يُدَعُّونَ إِلَىٰ نَارِ جَهَنَّمَ دَعًّا ﴿13﴾
जिस दिन जहन्नुम की आग की तरफ उनको ढकेल ढकेल ले जाएँगे
هَـٰذِهِ ٱلنَّارُ ٱلَّتِى كُنتُم بِهَا تُكَذِّبُونَ ﴿14﴾
(और उनसे कहा जाएगा) यही वह जहन्नुम है जिसे तुम झुठलाया करते थे