क़ुरआन का रुकू 480 पढ़ें

रुकू 480 सूरह Al-Hashr (आयत 11 से 17) से है। इसमें 7 आयतें हैं और यह जुज़ 28 में है।

28 अक्टूबर 2026 को 00h24 बजे अपडेट किया गया

क़ुरआन में रुकू 480

7
आयतें
1
सूरह
28
जुज़
v.11 – v.17
आयतें

रुकू 480 में सूरह

الحشر · जुज़ 28
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سورة الحشر
जुज़ 28 23.4% (32/137)
हिज़्ब 55 43.8% (32/73)

۞ أَلَمْ تَرَ إِلَى ٱلَّذِينَ نَافَقُوا۟ يَقُولُونَ لِإِخْوَٰنِهِمُ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ مِنْ أَهْلِ ٱلْكِتَـٰبِ لَئِنْ أُخْرِجْتُمْ لَنَخْرُجَنَّ مَعَكُمْ وَلَا نُطِيعُ فِيكُمْ أَحَدًا أَبَدًۭا وَإِن قُوتِلْتُمْ لَنَنصُرَنَّكُمْ وَٱللَّهُ يَشْهَدُ إِنَّهُمْ لَكَـٰذِبُونَ ﴿11﴾

क्या तुमने उन मुनाफ़िकों की हालत पर नज़र नहीं की जो अपने काफ़िर भाइयों अहले किताब से कहा करते हैं कि अगर कहीं तुम (घरों से) निकाले गए तो यक़ीन जानों कि हम भी तुम्हारे साथ (ज़रूर) निकल खड़े होंगे और तुम्हारे बारे में कभी किसी की इताअत न करेंगे और अगर तुमसे लड़ाई होगी तो ज़रूर तुम्हारी मदद करेंगे, मगर ख़ुदा बयान किए देता है कि ये लोग यक़ीनन झूठे हैं

لَئِنْ أُخْرِجُوا۟ لَا يَخْرُجُونَ مَعَهُمْ وَلَئِن قُوتِلُوا۟ لَا يَنصُرُونَهُمْ وَلَئِن نَّصَرُوهُمْ لَيُوَلُّنَّ ٱلْأَدْبَـٰرَ ثُمَّ لَا يُنصَرُونَ ﴿12﴾

अगर कुफ्फ़ार निकाले भी जाएँ तो ये मुनाफेक़ीन उनके साथ न निकलेंगे और अगर उनसे लड़ाई हुई तो उनकी मदद भी न करेंगे और यक़ीनन करेंगे भी तो पीठ फेर कर भाग जाएँगे

لَأَنتُمْ أَشَدُّ رَهْبَةًۭ فِى صُدُورِهِم مِّنَ ٱللَّهِ ۚ ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ قَوْمٌۭ لَّا يَفْقَهُونَ ﴿13﴾

फिर उनको कहीं से कुमक भी न मिलेगी (मोमिनों) तुम्हारी हैबत उनके दिलों में ख़ुदा से भी बढ़कर है, ये इस वजह से कि ये लोग समझ नहीं रखते

لَا يُقَـٰتِلُونَكُمْ جَمِيعًا إِلَّا فِى قُرًۭى مُّحَصَّنَةٍ أَوْ مِن وَرَآءِ جُدُرٍۭ ۚ بَأْسُهُم بَيْنَهُمْ شَدِيدٌۭ ۚ تَحْسَبُهُمْ جَمِيعًۭا وَقُلُوبُهُمْ شَتَّىٰ ۚ ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ قَوْمٌۭ لَّا يَعْقِلُونَ ﴿14﴾

ये सब के सब मिलकर भी तुमसे नहीं लड़ सकते, मगर हर तरफ से महफूज़ बस्तियों में या (शहर पनाह की) दीवारों की आड़ में इनकी आपस में तो बड़ी धाक है कि तुम ख्याल करोगे कि सब के सब (एक जान) हैं मगर उनके दिल एक दूसरे से फटे हुए हैं ये इस वजह से कि ये लोग बेअक्ल हैं

كَمَثَلِ ٱلَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ قَرِيبًۭا ۖ ذَاقُوا۟ وَبَالَ أَمْرِهِمْ وَلَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌۭ ﴿15﴾

उनका हाल उन लोगों का सा है जो उनसे कुछ ही पेशतर अपने कामों की सज़ा का मज़ा चख चुके हैं और उनके लिए दर्दनाक अज़ाब है

كَمَثَلِ ٱلشَّيْطَـٰنِ إِذْ قَالَ لِلْإِنسَـٰنِ ٱكْفُرْ فَلَمَّا كَفَرَ قَالَ إِنِّى بَرِىٓءٌۭ مِّنكَ إِنِّىٓ أَخَافُ ٱللَّهَ رَبَّ ٱلْعَـٰلَمِينَ ﴿16﴾

(मुनाफ़िकों) की मिसाल शैतान की सी है कि इन्सान से कहता रहा कि काफ़िर हो जाओ, फिर जब वह काफ़िर हो गया तो कहने लगा मैं तुमसे बेज़ार हूँ मैं सारे जहाँ के परवरदिगार से डरता हूँ

فَكَانَ عَـٰقِبَتَهُمَآ أَنَّهُمَا فِى ٱلنَّارِ خَـٰلِدَيْنِ فِيهَا ۚ وَذَٰلِكَ جَزَٰٓؤُا۟ ٱلظَّـٰلِمِينَ ﴿17﴾

तो दोनों का नतीजा ये हुआ कि दोनों दोज़ख़ में (डाले) जाएँगे और उसमें हमेशा रहेंगे और यही तमाम ज़ालिमों की सज़ा है

بسم الله الرحمن الرحيم शुक्र 18 जुमादा अल-अव्वल
الجمعة 18 جمادى الأولى
أحدب متناقص घटता हुआ कूबड़ दिन 19.4 / 29.5
रोशनी 77%
10 दिनों में अमावस्या
الحمد لله अल्लाह की सारी प्रशंसा है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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