पैग़ंबर पर दुरूद

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पैग़ंबर पर दुरूद पढ़ना (अस-सलातु अलन-नबी), यानी अल्लाह से दुआ करना कि वह पैग़ंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर दुरूद पढ़े और उन्हें सलाम भेजे, जैसा क़ुरआन का हुक़्म है : “बेशक अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर दुरूद पढ़ते हैं। ऐ ईमान वालो! तुम भी उन पर दुरूद पढ़ो और ख़ूब सलाम भेजो।” (सूरह अल-अहज़ाब, 56)। यह मुस्लिम की ज़िंदगी की सबसे बार-बार दोहराई जाने वाली इबादतों में से है : नमाज़ में, अज़ान के बाद, जुमे के दिन, दुआ में और हर बार जब पैग़ंबर का नाम लिया जाए।

सहीह किताबों ने इस इबादत के लिए पूरे बाब रखे हैं : मुस्लिम ने अपनी सहीह में, अत-तिर्मिज़ी ने फ़ज़ाइल के बाब में, अल-बैहक़ी ने अस-सुनन अल-कुबरा में और अन-नववी ने रियादुस सालिहीन में। यह पेज ज़रूरी बातें एक जगह इकट्ठा करता है ; हर नुक़्ता नीचे इस सिलसिले के पेजों में नुसूस और उनके सहीह होने के दर्जे के साथ विस्तार से बयान किया गया है।

05 अक्टूबर 2026 को 13h13 बजे अपडेट किया गया

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पैग़ंबर पर दुरूद पढ़ने का मतलब क्या है?

“किसी पर दुरूद पढ़ना” हर करने वाले के लिए एक ही मतलब नहीं रखता। अल्लाह की तरफ़ से दुरूद का मतलब रहमत और प्रशंसा है : अल्लाह अपने फ़रिश्तों के सामने अपने नबी की प्रशंसा करता है और उसे अपनी नेअमत से ढक देता है। फ़रिश्तों की तरफ़ से यह उनके हक़ में मग़फ़िरत की दुआ है। ईमान वालों की तरफ़ से यह लफ़्ज़ों में बँधी दुआ है : “ऐ अल्लाह! मुहम्मद पर दुरूद पढ़।” अत-तिर्मिज़ी ने इल्म वालों की यही तशरीह नक़ल की है : “रब की सलात रहमत है, और फ़रिश्तों की सलात मग़फ़िरत है” (485)।

बेशक अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर दुरूद पढ़ते हैं। ऐ ईमान वालो! तुम भी उन पर दुरूद पढ़ो और ख़ूब सलाम भेजो।

सूरह अल-अहज़ाब, 56

आयत-दर-आयत और लफ़्ज़-दर-लफ़्ज़ पूरा मतलब पेज पैग़ंबर पर दुरूद का मतलब में विस्तार से बयान किया गया है।

पैग़ंबर द्वारा सिखाई गई दुरूद की दुआ

सहाबा सलाम भेजना जानते थे, लेकिन उन्होंने सवाल पूछा : “हमें आपको सलाम भेजने का तरीक़ा मालूम है ; आप पर दुरूद कैसे पढ़ें?” पैग़ंबर ने उन्हें पूरी दुआ बताई, जो तब से दुरूद-ए-इब्राहीमी (सलातुल इब्राहीमी) के नाम से मशहूर है :

कहो : “ऐ अल्लाह! मुहम्मद पर और मुहम्मद की औलाद पर दुरूद पढ़, जैसा तूने इब्राहीम की औलाद पर दुरूद पढ़ी ; और मुहम्मद पर और मुहम्मद की औलाद पर बरक़तें नाज़िल फ़रमा, जैसा तूने इब्राहीम की औलाद पर बरक़तें नाज़िल कीं। बेशक तू हमीद (तारीफ़ के लायक़) और मजीद (बड़ी शान वाला) है।”

मुस्लिम की सहीह में (406) ; वही मतलब अल-बुख़ारी और मुस्लिम में

اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَى مُحَمَّدٍ وَعَلَى آلِ مُحَمَّدٍ، كَمَا صَلَّيْتَ عَلَى آلِ إِبْرَاهِيمَ إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ. اللَّهُمَّ بَارِكْ عَلَى مُحَمَّدٍ وَعَلَى آلِ مُحَمَّدٍ، كَمَا بَارَكْتَ عَلَى آلِ إِبْرَاهِيمَ إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ

छोटा रूप “सल्लल्लाहुम्म सल्लि अला मुहम्मद” (ऐ अल्लाह! मुहम्मद पर दुरूद पढ़) आम हुक़्म की अदाएगी के लिए काफ़ी है। सहाबा की दूसरी रवायतें, विस्तार से उच्चारण और तशह्हुद में इसकी जगह पेज पैग़ंबर पर दुरूद कैसे पढ़ें में है।

हदीसों में बताए गए फ़ज़ाइल

सबसे मशहूर सवाब दस गुना है :

“जो शख़्स मेरे लिए एक बार दुरूद पढ़े, अल्लाह उस पर दस बार दुरूद पढ़ता है।”

मुस्लिम (408) ; अत-तिर्मिज़ी (485) : “हदीस हसन सहीह”

इसके साथ क़यामत के दिन क़रीबी का फ़ज़ (“मेरी क़रीबी के सबसे ज़्यादा हक़दार लोग वे होंगे जिन्होंने मुझ पर सबसे ज़्यादा दुरूद पढ़ी होगी”, अत-तिर्मिज़ी 484, “हसन गरीब”) और हर जुमे उम्मत की दुरूद का पैग़ंबर के सामने पेश होना (अबू दाऊद 1047, इस्नाद को अन-नववी ने सहीह क़रार दिया) भी शामिल है। इसके उलट, बहुत मशहूर हदीस “जो मुझ पर दुरूद पढ़ना भूल जाए, वह जन्नत की राह भटक गया” को अहले इल्म ने ज़ईफ़ (कमज़ोर) क़रार दिया है : हमने उसे पेज पैग़ंबर पर दुरूद के फ़ज़ाइल में इसी तरह नक़ल किया है।

दुरूद पढ़ने के समय

बुनियादी क़ायदा : हर बार जब उनका नाम लिया जाए। जिन समयों की साफ़ नुसूसी बुनियाद है :

पूरे दलील पेज पैग़ंबर पर दुरूद कब पढ़ें में हैं।

संक्षिप्त लिखावट : उलमा क्या फ़रमाते हैं

पूरी दुआ की जगह “SAW”, “sws” या सिर्फ़ अक्षर “ص” लिखना अहले हदीस के उलमा के नज़दीक़ मक़रूह तरीक़ा है : इब्ने सलाह ने अपनी मुक़द्दमा में, अन-नववी ने अत-तिब्यान में और फिर अस-सख़ावी ने अल-क़ौल अल-बदीअ (इसी मौजूआ पर लिखी पूरी किताब) में सिखाया कि दुआ पूरी लिखो, क्योंकि संक्षिप्त रूप क़ुरआन और सुन्नत के हुक़्म को पूरा नहीं करता। ﷺ की निशानी भी उसी राय में है।

जो लिखा जा सकता है : पूरी दुआ अरबी में (صلى الله عليه وسلم), देवनागरी में उसका लिखा हुआ रूप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम), या उसका अनुवाद (“उन पर सलामती और बरक़तें हों”)। पूरी तफ़सील और सभी लिखावटें पेज सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम में हैं।

एक क्लिक में दुरूद की दुआएँ

कार्ड या बटन पर क्लिक करें : हर क्लिक पर अगली दुआ आएगी, उसके अरबी टेक्स्ट, उच्चारण और अनुवाद के साथ।

इस सिलसिले के पेज

  1. सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम
  2. पैग़ंबर पर दुरूद कैसे पढ़ें
  3. पैग़ंबर पर दुरूद के फ़ज़ाइल
  4. पैग़ंबर पर दुरूद कब पढ़ें
  5. पैग़ंबर पर दुरूद का मतलब

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

“सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम” का मतलब क्या है?

“अल्लाह उन पर दुरूद पढ़े और उन्हें सलाम भेजे” : अल्लाह की तरफ़ से दुरूद का मतलब रहमत और प्रशंसा है ; मोमिन अल्लाह से दुआ करता है कि वह अपने नबी को इज़्ज़त दे। यह दुआ अरबी में صلى الله عليه وسلم लिखी जाती है।

पैग़ंबर पर दुरूद के लिए कौन-सी दुआ पढ़ें?

पैग़ंबर द्वारा सिखाई गई पूरी दुआ : “सल्लल्लाहुम्म सल्लि अला मुहम्मदिन व अला आले मुहम्मद, कमा सल्लैत अला आले इब्राहीम, इन्नक हमीदुम मजीद ; सल्लल्लाहुम्म बारिक अला मुहम्मदिन व अला आले मुहम्मद, कमा बारिक्त अला आले इब्राहीम, इन्नक हमीदुम मजीद” (मुस्लिम, 406)। छोटा रूप “सल्लल्लाहुम्म सल्लि अला मुहम्मद” भी काफ़ी है।

पैग़ंबर पर दुरूद पढ़ने का सवाब क्या है?

एक दुरूद पर अल्लाह की दस दुरूद (मुस्लिम, 408), अल-हाकिम की रवायत के मुताबिक़ गुनाहों का मिटना और नेकियों का दर्ज होना (अल-मुस्तदरक, 2018), और क़यामत के दिन पैग़ंबर से सबसे बड़ी क़रीबी (अत-तिर्मिज़ी, 484)।

यह दुआ कब कहनी चाहिए?

हर बार उनका नाम लिया जाए, अज़ान के बाद, नमाज़ के तशह्हुद में, जुमे के दिन-रात, और हर दुआ की शुरुआत और आख़िर में।

क्या “SAW” या “ﷺ” लिख सकते हैं?

अहले हदीस के उलमा (इब्ने सलाह, अन-नववी, अस-सख़ावी) ने संक्षिप्त रूप को मक़रूह कहा : दुआ पूरी लिखो, अरबी में, देवनागरी में या अनुवाद में (“उन पर सलामती और बरक़तें हों”)।

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سبحان الله अल्लाह की पवित्रता है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद