البقرة · जुज़ 1
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क़ुरआन का पृष्ठ 2 पढ़ें

मुसहफ़ का पृष्ठ 2 5 आयतों को समाहित करता है। यह जुज़ 1, हिज़्ब 1 में है।

10 जुलाई 2026 को 03h52 बजे अपडेट किया गया

Page 2 dans le Coran

5
आयतें
1
जुज़
1
हिज़्ब
1
सूरह

Sourate dans la page 2

जुज़ 1
पृष्ठ 2
سورة البقرة
जुज़ 1 4.7% (7/148)
हिज़्ब 1 8.6% (7/81)

الٓمٓ ﴿١﴾

अलीफ़ लाम मीम

ذَٰلِكَ ٱلْكِتَـٰبُ لَا رَيْبَ ۛ فِيهِ ۛ هُدًۭى لِّلْمُتَّقِينَ ﴿٢﴾

(ये) वह किताब है। जिस (के किताबे खुदा होने) में कुछ भी शक नहीं (ये) परहेज़गारों की रहनुमा है

ٱلَّذِينَ يُؤْمِنُونَ بِٱلْغَيْبِ وَيُقِيمُونَ ٱلصَّلَوٰةَ وَمِمَّا رَزَقْنَـٰهُمْ يُنفِقُونَ ﴿٣﴾

जो ग़ैब पर ईमान लाते हैं और (पाबन्दी से) नमाज़ अदा करते हैं और जो कुछ हमने उनको दिया है उसमें से (राहे खुदा में) ख़र्च करते हैं

وَٱلَّذِينَ يُؤْمِنُونَ بِمَآ أُنزِلَ إِلَيْكَ وَمَآ أُنزِلَ مِن قَبْلِكَ وَبِٱلْـَٔاخِرَةِ هُمْ يُوقِنُونَ ﴿٤﴾

और जो कुछ तुम पर (ऐ रसूल) और तुम से पहले नाज़िल किया गया है उस पर ईमान लाते हैं और वही आख़िरत का यक़ीन भी रखते हैं

أُو۟لَـٰٓئِكَ عَلَىٰ هُدًۭى مِّن رَّبِّهِمْ ۖ وَأُو۟لَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلْمُفْلِحُونَ ﴿٥﴾

यही लोग अपने परवरदिगार की हिदायत पर (आमिल) हैं और यही लोग अपनी दिली मुरादें पाएँगे

بسم الله الرحمن الرحيم गुरु 30 मुहर्रम
الخميس 30 محرّم
هلال متزايد बढ़ता हुआ अर्धचंद्र दिन 2.1 / 29.5
रोशनी 5%
13 दिनों में पूर्णिमा
الله أكبر अल्लाह सबसे महान है