मुसहफ़ का पृष्ठ 313 25 आयतों को समाहित करता है। यह जुज़ 16, हिज़्ब 32 में है।
10 जुलाई 2026 को 03h52 बजे अपडेट किया गया
coran.read_full_page : क़ुरआन का पृष्ठ 313 पढ़ें →
وَأَنَا ٱخْتَرْتُكَ فَٱسْتَمِعْ لِمَا يُوحَىٰٓ ﴿١٣﴾
और मैंने तुमको पैग़म्बरी के वास्ते मुन्तख़िब किया (चुन लिया) है तो जो कुछ तुम्हारी तरफ़ वही की जाती है उसे कान लगा कर सुनो
إِنَّنِىٓ أَنَا ٱللَّهُ لَآ إِلَـٰهَ إِلَّآ أَنَا۠ فَٱعْبُدْنِى وَأَقِمِ ٱلصَّلَوٰةَ لِذِكْرِىٓ ﴿١٤﴾
इसमें शक नहीं कि मैं ही वह अल्लाह हूँ कि मेरे सिवा कोई माबूद नहीं तो मेरी ही इबादत करो और मेरी याद के लिए नमाज़ बराबर पढ़ा करो
إِنَّ ٱلسَّاعَةَ ءَاتِيَةٌ أَكَادُ أُخْفِيهَا لِتُجْزَىٰ كُلُّ نَفْسٍۭ بِمَا تَسْعَىٰ ﴿١٥﴾
(क्योंकि) क़यामत ज़रूर आने वाली है और मैं उसे लामहौला छिपाए रखूँगा ताकि हर शख्स (उसके ख़ौफ से नेकी करे) और वैसी कोशिश की है उसका उसे बदला दिया जाए
فَلَا يَصُدَّنَّكَ عَنْهَا مَن لَّا يُؤْمِنُ بِهَا وَٱتَّبَعَ هَوَىٰهُ فَتَرْدَىٰ ﴿١٦﴾
तो (कहीं) ऐसा न हो कि जो शख्स उसे दिल से नहीं मानता और अपनी नफ़सियानी ख्वाहिश के पीछे पड़ा वह तुम्हें इस (फिक्र) से रोक दे तो तुम तबाह हो जाओगे
وَمَا تِلْكَ بِيَمِينِكَ يَـٰمُوسَىٰ ﴿١٧﴾
और ऐ मूसा ये तुम्हारे दाहिने हाथ में क्या चीज़ है
قَالَ هِىَ عَصَاىَ أَتَوَكَّؤُا۟ عَلَيْهَا وَأَهُشُّ بِهَا عَلَىٰ غَنَمِى وَلِىَ فِيهَا مَـَٔارِبُ أُخْرَىٰ ﴿١٨﴾
अर्ज़ की ये तो मेरी लाठी है मैं उस पर सहारा करता हूँ और इससे अपनी बकरियों पर (और दरख्तों की) पत्तियाँ झाड़ता हूँ और उसमें मेरे और भी मतलब हैं
قَالَ أَلْقِهَا يَـٰمُوسَىٰ ﴿١٩﴾
फ़रमाया ऐ मूसा उसको ज़रा ज़मीन पर डाल तो दो मूसा ने उसे डाल दिया
فَأَلْقَىٰهَا فَإِذَا هِىَ حَيَّةٌۭ تَسْعَىٰ ﴿٢٠﴾
तो फ़ौरन वह साँप बनकर दौड़ने लगा (ये देखकर मूसा भागे)
قَالَ خُذْهَا وَلَا تَخَفْ ۖ سَنُعِيدُهَا سِيرَتَهَا ٱلْأُولَىٰ ﴿٢١﴾
तो फ़रमाया कि तुम इसको पकड़ लो और डरो नहीं मैं अभी इसकी पहली सी सूरत फिर किए देता हूँ
وَٱضْمُمْ يَدَكَ إِلَىٰ جَنَاحِكَ تَخْرُجْ بَيْضَآءَ مِنْ غَيْرِ سُوٓءٍ ءَايَةً أُخْرَىٰ ﴿٢٢﴾
और अपने हाथ को समेंट कर अपने बग़ल में तो कर लो (फिर देखो कि) वह बग़ैर किसी बीमारी के सफेद चमकता दमकता हुआ निकलेगा ये दूसरा मौजिज़ा है
لِنُرِيَكَ مِنْ ءَايَـٰتِنَا ٱلْكُبْرَى ﴿٢٣﴾
(ये) ताकि हम तुमको अपनी (कुदरत की) बड़ी-बड़ी निशानियाँ दिखाएँ
ٱذْهَبْ إِلَىٰ فِرْعَوْنَ إِنَّهُۥ طَغَىٰ ﴿٢٤﴾
अब तुम फिरऔन के पास जाओ उसने बहुत सर उठाया है
قَالَ رَبِّ ٱشْرَحْ لِى صَدْرِى ﴿٢٥﴾
मूसा ने अर्ज़ की परवरदिगार (मैं जाता तो हूँ)
وَيَسِّرْ لِىٓ أَمْرِى ﴿٢٦﴾
मगर तू मेरे लिए मेरे सीने को कुशादा फरमा
وَٱحْلُلْ عُقْدَةًۭ مِّن لِّسَانِى ﴿٢٧﴾
और दिलेर बना और मेरा काम मेरे लिए आसान कर दे और मेरी ज़बान से लुक़नत की गिरह खोल दे
يَفْقَهُوا۟ قَوْلِى ﴿٢٨﴾
ताकि लोग मेरी बात अच्छी तरह समझें और
وَٱجْعَل لِّى وَزِيرًۭا مِّنْ أَهْلِى ﴿٢٩﴾
मेरे कीनेवालों में से मेरे भाई हारून
هَـٰرُونَ أَخِى ﴿٣٠﴾
को मेरा वज़ीर बोझ बटाने वाला बना दे
ٱشْدُدْ بِهِۦٓ أَزْرِى ﴿٣١﴾
उसके ज़रिए से मेरी पुश्त मज़बूत कर दे
وَأَشْرِكْهُ فِىٓ أَمْرِى ﴿٣٢﴾
और मेरे काम में उसको मेरा शरीक बना
كَىْ نُسَبِّحَكَ كَثِيرًۭا ﴿٣٣﴾
ताकि हम दोनों (मिलकर) कसरत से तेरी तसबीह करें
وَنَذْكُرَكَ كَثِيرًا ﴿٣٤﴾
और कसरत से तेरी याद करें
إِنَّكَ كُنتَ بِنَا بَصِيرًۭا ﴿٣٥﴾
तू तो हमारी हालत देख ही रहा है
قَالَ قَدْ أُوتِيتَ سُؤْلَكَ يَـٰمُوسَىٰ ﴿٣٦﴾
फ़रमाया ऐ मूसा तुम्हारी सब दरख्वास्तें मंज़ूर की गई
وَلَقَدْ مَنَنَّا عَلَيْكَ مَرَّةً أُخْرَىٰٓ ﴿٣٧﴾
और हम तो तुम पर एक बार और एहसान कर चुके हैं