يس · जुज़ 23
पर जाएँ
बुकमार्क
कारी / पाठक
चलाने की गति
आयत दोहराना
दोहराएँ
स्वतः स्क्रॉल
अनुवाद
अरबी फ़ॉन्ट
टेक्स्ट आकार
अरबी
अनुवाद
हिफ़्ज़ का क्षेत्र
दोहराव
प्रति आयत
पूर्ण लूप
मुख्य कारी
जारी है - A-B लूप /

क़ुरआन का पृष्ठ 444 पढ़ें

मुसहफ़ का पृष्ठ 444 16 आयतों को समाहित करता है। यह जुज़ 23, हिज़्ब 45 में है।

10 जुलाई 2026 को 03h52 बजे अपडेट किया गया

Page 444 dans le Coran

16
आयतें
23
जुज़
45
हिज़्ब
1
सूरह

Sourate dans la page 444

जुज़ 23
पृष्ठ 444
سورة يس
जुज़ 23 7.6% (27/357)
हिज़्ब 45 13.5% (27/200)

إِنَّ أَصْحَـٰبَ ٱلْجَنَّةِ ٱلْيَوْمَ فِى شُغُلٍۢ فَـٰكِهُونَ ﴿٥٥﴾

बेहश्त के रहने वाले आज (रोजे क़यामत) एक न एक मशग़ले में जी बहला रहे हैं

هُمْ وَأَزْوَٰجُهُمْ فِى ظِلَـٰلٍ عَلَى ٱلْأَرَآئِكِ مُتَّكِـُٔونَ ﴿٥٦﴾

वह अपनी बीवियों के साथ (ठन्डी) छाँव में तकिया लगाए तख्तों पर (चैन से) बैठे हुए हैं

لَهُمْ فِيهَا فَـٰكِهَةٌۭ وَلَهُم مَّا يَدَّعُونَ ﴿٥٧﴾

बेिहश्त में उनके लिए (ताज़ा) मेवे (तैयार) हैं और जो वह चाहें उनके लिए (हाज़िर) है

سَلَـٰمٌۭ قَوْلًۭا مِّن رَّبٍّۢ رَّحِيمٍۢ ﴿٥٨﴾

मेहरबान परवरदिगार की तरफ से सलाम का पैग़ाम आएगा

وَٱمْتَـٰزُوا۟ ٱلْيَوْمَ أَيُّهَا ٱلْمُجْرِمُونَ ﴿٥٩﴾

और (एक आवाज़ आएगी कि) ऐ गुनाहगारों तुम लोग (इनसे) अलग हो जाओ

۞ أَلَمْ أَعْهَدْ إِلَيْكُمْ يَـٰبَنِىٓ ءَادَمَ أَن لَّا تَعْبُدُوا۟ ٱلشَّيْطَـٰنَ ۖ إِنَّهُۥ لَكُمْ عَدُوٌّۭ مُّبِينٌۭ ﴿٦٠﴾

ऐ आदम की औलाद क्या मैंने तुम्हारे पास ये हुक्म नहीं भेजा था कि (ख़बरदार) शैतान की परसतिश न करना वह यक़ीनी तुम्हारा खुल्लम खुल्ला दुश्मन है

وَأَنِ ٱعْبُدُونِى ۚ هَـٰذَا صِرَٰطٌۭ مُّسْتَقِيمٌۭ ﴿٦١﴾

और ये कि (देखो) सिर्फ मेरी इबादत करना यही (नजात की) सीधी राह है

وَلَقَدْ أَضَلَّ مِنكُمْ جِبِلًّۭا كَثِيرًا ۖ أَفَلَمْ تَكُونُوا۟ تَعْقِلُونَ ﴿٦٢﴾

और (बावजूद इसके) उसने तुममें से बहुतेरों को गुमराह कर छोड़ा तो क्या तुम (इतना भी) नहीं समझते थे

هَـٰذِهِۦ جَهَنَّمُ ٱلَّتِى كُنتُمْ تُوعَدُونَ ﴿٦٣﴾

ये वही जहन्नुम है जिसका तुमसे वायदा किया गया था

ٱصْلَوْهَا ٱلْيَوْمَ بِمَا كُنتُمْ تَكْفُرُونَ ﴿٦٤﴾

तो अब चूँकि तुम कुफ्र करते थे इस वजह से आज इसमें (चुपके से) चले जाओ

ٱلْيَوْمَ نَخْتِمُ عَلَىٰٓ أَفْوَٰهِهِمْ وَتُكَلِّمُنَآ أَيْدِيهِمْ وَتَشْهَدُ أَرْجُلُهُم بِمَا كَانُوا۟ يَكْسِبُونَ ﴿٦٥﴾

आज हम उनके मुँह पर मुहर लगा देगें और (जो) कारसतानियाँ ये लोग दुनिया में कर रहे थे खुद उनके हाथ हमको बता देगें और उनके पाँव गवाही देगें

وَلَوْ نَشَآءُ لَطَمَسْنَا عَلَىٰٓ أَعْيُنِهِمْ فَٱسْتَبَقُوا۟ ٱلصِّرَٰطَ فَأَنَّىٰ يُبْصِرُونَ ﴿٦٦﴾

और अगर हम चाहें तो उनकी ऑंखों पर झाडू फेर दें तो ये लोग राह को पड़े चक्कर लगाते ढूँढते फिरें मगर कहाँ देख पाँएगे

وَلَوْ نَشَآءُ لَمَسَخْنَـٰهُمْ عَلَىٰ مَكَانَتِهِمْ فَمَا ٱسْتَطَـٰعُوا۟ مُضِيًّۭا وَلَا يَرْجِعُونَ ﴿٦٧﴾

और अगर हम चाहे तो जहाँ ये हैं (वहीं) उनकी सूरतें बदल (करके) (पत्थर मिट्टी बना) दें फिर न तो उनमें आगे जाने का क़ाबू रहे और न (घर) लौट सकें

وَمَن نُّعَمِّرْهُ نُنَكِّسْهُ فِى ٱلْخَلْقِ ۖ أَفَلَا يَعْقِلُونَ ﴿٦٨﴾

और हम जिस शख्स को (बहुत) ज्यादा उम्र देते हैं तो उसे ख़िलक़त में उलट (कर बच्चों की तरह मजबूर कर) देते हैं तो क्या वह लोग समझते नहीं

وَمَا عَلَّمْنَـٰهُ ٱلشِّعْرَ وَمَا يَنۢبَغِى لَهُۥٓ ۚ إِنْ هُوَ إِلَّا ذِكْرٌۭ وَقُرْءَانٌۭ مُّبِينٌۭ ﴿٦٩﴾

और हमने न उस (पैग़म्बर) को शेर की तालीम दी है और न शायरी उसकी शान के लायक़ है ये (किताब) तो बस (निरी) नसीहत और साफ-साफ कुरान है

لِّيُنذِرَ مَن كَانَ حَيًّۭا وَيَحِقَّ ٱلْقَوْلُ عَلَى ٱلْكَـٰفِرِينَ ﴿٧٠﴾

ताकि जो ज़िन्दा (दिल आक़िल) हों उसे (अज़ाब से) डराए और काफ़िरों पर (अज़ाब का) क़ौल साबित हो जाए (और हुज्जत बाक़ी न रहे)

بسم الله الرحمن الرحيم शुक्र 24 मुहर्रम
الجمعة 24 محرّم
هلال متناقص घटता हुआ अर्धचंद्र दिन 25.2 / 29.5
रोशनी 19%
4 दिनों में अमावस्या
سبحان الله अल्लाह की पवित्रता है