मुसहफ़ का पृष्ठ 571 18 आयतों को समाहित करता है। यह जुज़ 29, हिज़्ब 57 में है।
10 जुलाई 2026 को 03h52 बजे अपडेट किया गया
coran.read_full_page : क़ुरआन का पृष्ठ 571 पढ़ें →
يُرْسِلِ ٱلسَّمَآءَ عَلَيْكُم مِّدْرَارًۭا ﴿١١﴾
(और) तुम पर आसमान से मूसलाधार पानी बरसाएगा
وَيُمْدِدْكُم بِأَمْوَٰلٍۢ وَبَنِينَ وَيَجْعَل لَّكُمْ جَنَّـٰتٍۢ وَيَجْعَل لَّكُمْ أَنْهَـٰرًۭا ﴿١٢﴾
और माल और औलाद में तरक्क़ी देगा, और तुम्हारे लिए बाग़ बनाएगा, और तुम्हारे लिए नहरें जारी करेगा
مَّا لَكُمْ لَا تَرْجُونَ لِلَّهِ وَقَارًۭا ﴿١٣﴾
तुम्हें क्या हो गया है कि तुम ख़ुदा की अज़मत का ज़रा भी ख्याल नहीं करते
وَقَدْ خَلَقَكُمْ أَطْوَارًا ﴿١٤﴾
हालॉकि उसी ने तुमको तरह तरह का पैदा किया
أَلَمْ تَرَوْا۟ كَيْفَ خَلَقَ ٱللَّهُ سَبْعَ سَمَـٰوَٰتٍۢ طِبَاقًۭا ﴿١٥﴾
क्या तुमने ग़ौर नहीं किया कि ख़ुदा ने सात आसमान ऊपर तलें क्यों कर बनाए
وَجَعَلَ ٱلْقَمَرَ فِيهِنَّ نُورًۭا وَجَعَلَ ٱلشَّمْسَ سِرَاجًۭا ﴿١٦﴾
और उसी ने उसमें चाँद को नूर बनाया और सूरज को रौशन चिराग़ बना दिया
وَٱللَّهُ أَنۢبَتَكُم مِّنَ ٱلْأَرْضِ نَبَاتًۭا ﴿١٧﴾
और ख़ुदा ही तुमको ज़मीन से पैदा किया
ثُمَّ يُعِيدُكُمْ فِيهَا وَيُخْرِجُكُمْ إِخْرَاجًۭا ﴿١٨﴾
फिर तुमको उसी में दोबारा ले जाएगा और (क़यामत में उसी से) निकाल कर खड़ा करेगा
وَٱللَّهُ جَعَلَ لَكُمُ ٱلْأَرْضَ بِسَاطًۭا ﴿١٩﴾
और ख़ुदा ही ने ज़मीन को तुम्हारे लिए फ़र्श बनाया
لِّتَسْلُكُوا۟ مِنْهَا سُبُلًۭا فِجَاجًۭا ﴿٢٠﴾
ताकि तुम उसके बड़े बड़े कुशादा रास्तों में चलो फिरो
قَالَ نُوحٌۭ رَّبِّ إِنَّهُمْ عَصَوْنِى وَٱتَّبَعُوا۟ مَن لَّمْ يَزِدْهُ مَالُهُۥ وَوَلَدُهُۥٓ إِلَّا خَسَارًۭا ﴿٢١﴾
(फिर) नूह ने अर्ज़ की परवरदिगार इन लोगों ने मेरी नाफ़रमानी की उस शख़्श के ताबेदार बन के जिसने उनके माल और औलाद में नुक़सान के सिवा फ़ायदा न पहुँचाया
وَمَكَرُوا۟ مَكْرًۭا كُبَّارًۭا ﴿٢٢﴾
और उन्होंने (मेरे साथ) बड़ी मक्कारियाँ की
وَقَالُوا۟ لَا تَذَرُنَّ ءَالِهَتَكُمْ وَلَا تَذَرُنَّ وَدًّۭا وَلَا سُوَاعًۭا وَلَا يَغُوثَ وَيَعُوقَ وَنَسْرًۭا ﴿٢٣﴾
और (उलटे) कहने लगे कि आपने माबूदों को हरगिज़ न छोड़ना और न वद को और सुआ को और न यगूस और यऊक़ व नस्र को छोड़ना
وَقَدْ أَضَلُّوا۟ كَثِيرًۭا ۖ وَلَا تَزِدِ ٱلظَّـٰلِمِينَ إِلَّا ضَلَـٰلًۭا ﴿٢٤﴾
और उन्होंने बहुतेरों को गुमराह कर छोड़ा और तू (उन) ज़ालिमों की गुमराही को और बढ़ा दे
مِّمَّا خَطِيٓـَٔـٰتِهِمْ أُغْرِقُوا۟ فَأُدْخِلُوا۟ نَارًۭا فَلَمْ يَجِدُوا۟ لَهُم مِّن دُونِ ٱللَّهِ أَنصَارًۭا ﴿٢٥﴾
(आख़िर) वह अपने गुनाहों की बदौलत (पहले तो) डुबाए गए फिर जहन्नुम में झोंके गए तो उन लोगों ने ख़ुदा के सिवा किसी को अपना मददगार न पाया
وَقَالَ نُوحٌۭ رَّبِّ لَا تَذَرْ عَلَى ٱلْأَرْضِ مِنَ ٱلْكَـٰفِرِينَ دَيَّارًا ﴿٢٦﴾
और नूह ने अर्ज़ की परवरदिगार (इन) काफ़िरों में रूए ज़मीन पर किसी को बसा हुआ न रहने दे
إِنَّكَ إِن تَذَرْهُمْ يُضِلُّوا۟ عِبَادَكَ وَلَا يَلِدُوٓا۟ إِلَّا فَاجِرًۭا كَفَّارًۭا ﴿٢٧﴾
क्योंकि अगर तू उनको छोड़ देगा तो ये (फिर) तेरे बन्दों को गुमराह करेंगे और उनकी औलाद भी गुनाहगार और कट्टी काफिर ही होगी
رَّبِّ ٱغْفِرْ لِى وَلِوَٰلِدَىَّ وَلِمَن دَخَلَ بَيْتِىَ مُؤْمِنًۭا وَلِلْمُؤْمِنِينَ وَٱلْمُؤْمِنَـٰتِ وَلَا تَزِدِ ٱلظَّـٰلِمِينَ إِلَّا تَبَارًۢا ﴿٢٨﴾
परवरदिगार मुझको और मेरे माँ बाप को और जो मोमिन मेरे घर में आए उनको और तमाम ईमानदार मर्दों और मोमिन औरतों को बख्श दे और (इन) ज़ालिमों की बस तबाही को और ज्यादा कर