मुसहफ़ का पृष्ठ 591 32 आयतों को समाहित करता है। यह जुज़ 30, हिज़्ब 59 में है।
10 जुलाई 2026 को 03h52 बजे अपडेट किया गया
coran.read_full_page : क़ुरआन का पृष्ठ 591 पढ़ें →
وَٱلسَّمَآءِ وَٱلطَّارِقِ ﴿١﴾
आसमान और रात को आने वाले की क़सम
وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا ٱلطَّارِقُ ﴿٢﴾
और तुमको क्या मालूम रात को आने वाला क्या है
ٱلنَّجْمُ ٱلثَّاقِبُ ﴿٣﴾
(वह) चमकता हुआ तारा है
إِن كُلُّ نَفْسٍۢ لَّمَّا عَلَيْهَا حَافِظٌۭ ﴿٤﴾
(इस बात की क़सम) कि कोई शख़्श ऐसा नहीं जिस पर निगेहबान मुक़र्रर नहीं
فَلْيَنظُرِ ٱلْإِنسَـٰنُ مِمَّ خُلِقَ ﴿٥﴾
तो इन्सान को देखना चाहिए कि वह किस चीज़ से पैदा हुआ हैं
خُلِقَ مِن مَّآءٍۢ دَافِقٍۢ ﴿٦﴾
वह उछलते हुए पानी (मनी) से पैदा हुआ है
يَخْرُجُ مِنۢ بَيْنِ ٱلصُّلْبِ وَٱلتَّرَآئِبِ ﴿٧﴾
जो पीठ और सीने की हड्डियों के बीच में से निकलता है
إِنَّهُۥ عَلَىٰ رَجْعِهِۦ لَقَادِرٌۭ ﴿٨﴾
बेशक ख़ुदा उसके दोबारा (पैदा) करने पर ज़रूर कुदरत रखता है
يَوْمَ تُبْلَى ٱلسَّرَآئِرُ ﴿٩﴾
जिस दिन दिलों के भेद जाँचे जाएँगे
فَمَا لَهُۥ مِن قُوَّةٍۢ وَلَا نَاصِرٍۢ ﴿١٠﴾
तो (उस दिन) उसका न कुछ ज़ोर चलेगा और न कोई मददगार होगा
وَٱلسَّمَآءِ ذَاتِ ٱلرَّجْعِ ﴿١١﴾
चक्कर (खाने) वाले आसमान की क़सम
وَٱلْأَرْضِ ذَاتِ ٱلصَّدْعِ ﴿١٢﴾
और फटने वाली (ज़मीन की क़सम)
إِنَّهُۥ لَقَوْلٌۭ فَصْلٌۭ ﴿١٣﴾
बेशक ये क़ुरान क़ौले फ़ैसल है
وَمَا هُوَ بِٱلْهَزْلِ ﴿١٤﴾
और लग़ो नहीं है
إِنَّهُمْ يَكِيدُونَ كَيْدًۭا ﴿١٥﴾
बेशक ये कुफ्फ़ार अपनी तदबीर कर रहे हैं
وَأَكِيدُ كَيْدًۭا ﴿١٦﴾
और मैं अपनी तद्बीर कर रहा हूँ
فَمَهِّلِ ٱلْكَـٰفِرِينَ أَمْهِلْهُمْ رُوَيْدًۢا ﴿١٧﴾
तो काफ़िरों को मोहलत दो बस उनको थोड़ी सी मोहलत दो
سَبِّحِ ٱسْمَ رَبِّكَ ٱلْأَعْلَى ﴿١﴾
ऐ रसूल अपने आलीशान परवरदिगार के नाम की तस्बीह करो
ٱلَّذِى خَلَقَ فَسَوَّىٰ ﴿٢﴾
जिसने (हर चीज़ को) पैदा किया
وَٱلَّذِى قَدَّرَ فَهَدَىٰ ﴿٣﴾
और दुरूस्त किया और जिसने (उसका) अन्दाज़ा मुक़र्रर किया फिर राह बतायी
وَٱلَّذِىٓ أَخْرَجَ ٱلْمَرْعَىٰ ﴿٤﴾
और जिसने (हैवानात के लिए) चारा उगाया
فَجَعَلَهُۥ غُثَآءً أَحْوَىٰ ﴿٥﴾
फिर ख़ुश्क उसे सियाह रंग का कूड़ा कर दिया
سَنُقْرِئُكَ فَلَا تَنسَىٰٓ ﴿٦﴾
हम तुम्हें (ऐसा) पढ़ा देंगे कि कभी भूलो ही नहीं
إِلَّا مَا شَآءَ ٱللَّهُ ۚ إِنَّهُۥ يَعْلَمُ ٱلْجَهْرَ وَمَا يَخْفَىٰ ﴿٧﴾
मगर जो ख़ुदा चाहे (मन्सूख़ कर दे) बेशक वह खुली बात को भी जानता है और छुपे हुए को भी
وَنُيَسِّرُكَ لِلْيُسْرَىٰ ﴿٨﴾
और हम तुमको आसान तरीके की तौफ़ीक़ देंगे
فَذَكِّرْ إِن نَّفَعَتِ ٱلذِّكْرَىٰ ﴿٩﴾
तो जहाँ तक समझाना मुफ़ीद हो समझते रहो
سَيَذَّكَّرُ مَن يَخْشَىٰ ﴿١٠﴾
जो खौफ रखता हो वह तो फौरी समझ जाएगा
وَيَتَجَنَّبُهَا ٱلْأَشْقَى ﴿١١﴾
और बदबख्त उससे पहलू तही करेगा
ٱلَّذِى يَصْلَى ٱلنَّارَ ٱلْكُبْرَىٰ ﴿١٢﴾
जो (क़यामत में) बड़ी (तेज़) आग में दाख़िल होगा
ثُمَّ لَا يَمُوتُ فِيهَا وَلَا يَحْيَىٰ ﴿١٣﴾
फिर न वहाँ मरेगा ही न जीयेगा
قَدْ أَفْلَحَ مَن تَزَكَّىٰ ﴿١٤﴾
वह यक़ीनन मुराद दिली को पहुँचा जो (शिर्क से) पाक हो
وَذَكَرَ ٱسْمَ رَبِّهِۦ فَصَلَّىٰ ﴿١٥﴾
और अपने परवरदिगार का ज़िक्र करता और नमाज़ पढ़ता रहा