मुसहफ़ का पृष्ठ 602 14 आयतों को समाहित करता है। यह जुज़ 30, हिज़्ब 60 में है।
10 जुलाई 2026 को 03h52 बजे अपडेट किया गया
coran.read_full_page : क़ुरआन का पृष्ठ 602 पढ़ें →
لِإِيلَـٰفِ قُرَيْشٍ ﴿١﴾
चूँकि क़ुरैश को जाड़े और गर्मी के सफ़र से मानूस कर दिया है
إِۦلَـٰفِهِمْ رِحْلَةَ ٱلشِّتَآءِ وَٱلصَّيْفِ ﴿٢﴾
तो उनको मानूस कर देने की वजह से
فَلْيَعْبُدُوا۟ رَبَّ هَـٰذَا ٱلْبَيْتِ ﴿٣﴾
इस घर (काबा) के मालिक की इबादत करनी चाहिए
ٱلَّذِىٓ أَطْعَمَهُم مِّن جُوعٍۢ وَءَامَنَهُم مِّنْ خَوْفٍۭ ﴿٤﴾
जिसने उनको भूख में खाना दिया और उनको खौफ़ से अमन अता किया
أَرَءَيْتَ ٱلَّذِى يُكَذِّبُ بِٱلدِّينِ ﴿١﴾
क्या तुमने उस शख़्श को भी देखा है जो रोज़ जज़ा को झुठलाता है
فَذَٰلِكَ ٱلَّذِى يَدُعُّ ٱلْيَتِيمَ ﴿٢﴾
ये तो वही (कम्बख्त) है जो यतीम को धक्के देता है
وَلَا يَحُضُّ عَلَىٰ طَعَامِ ٱلْمِسْكِينِ ﴿٣﴾
और मोहताजों को खिलाने के लिए (लोगों को) आमादा नहीं करता
فَوَيْلٌۭ لِّلْمُصَلِّينَ ﴿٤﴾
तो उन नमाज़ियों की तबाही है
ٱلَّذِينَ هُمْ عَن صَلَاتِهِمْ سَاهُونَ ﴿٥﴾
जो अपनी नमाज़ से ग़ाफिल रहते हैं
ٱلَّذِينَ هُمْ يُرَآءُونَ ﴿٦﴾
जो दिखाने के वास्ते करते हैं
وَيَمْنَعُونَ ٱلْمَاعُونَ ﴿٧﴾
और रोज़मर्रा की मालूली चीज़ें भी आरियत नहीं देते
إِنَّآ أَعْطَيْنَـٰكَ ٱلْكَوْثَرَ ﴿١﴾
(ऐ रसूल) हमनें तुमको को कौसर अता किया,
فَصَلِّ لِرَبِّكَ وَٱنْحَرْ ﴿٢﴾
तो तुम अपने परवरदिगार की नमाज़ पढ़ा करो
إِنَّ شَانِئَكَ هُوَ ٱلْأَبْتَرُ ﴿٣﴾
और क़ुर्बानी दिया करो बेशक तुम्हारा दुश्मन बे औलाद रहेगा