ابراهيم · जुज़ 13
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क़ुरआन का रुकू 215 पढ़ें

रुकू 215 सूरह Ibrahim (आयत 28 से 34) से है। इसमें 7 आयतें हैं और यह जुज़ 13 में है।

10 जुलाई 2026 को 03h52 बजे अपडेट किया गया

Ruku 215 dans le Coran

7
आयतें
1
सूरह
13
जुज़
v.28 – v.34
आयतें

Sourate dans le Ruku 215

पृष्ठ 260
रुकू 215
سورة ابراهيم
जुज़ 13 87.7% (135/154)
हिज़्ब 26 75.3% (58/77)

وَءَاتَىٰكُم مِّن كُلِّ مَا سَأَلْتُمُوهُ ۚ وَإِن تَعُدُّوا۟ نِعْمَتَ ٱللَّهِ لَا تُحْصُوهَآ ۗ إِنَّ ٱلْإِنسَـٰنَ لَظَلُومٌۭ كَفَّارٌۭ ﴿٣٤﴾

(और अपनी ज़रुरत के मुवाफिक) जो कुछ तुमने उससे माँगा उसमें से (तुम्हारी ज़रूरत भर) तुम्हे दिया और तुम ख़ुदा की नेमतो गिनती करना चाहते हो तो गिन नहीं सकते हो तू बड़ा बे इन्साफ नाशुक्रा है

بسم الله الرحمن الرحيم शुक्र 24 मुहर्रम
الجمعة 24 محرّم
هلال متناقص घटता हुआ अर्धचंद्र दिन 25.2 / 29.5
रोशनी 19%
4 दिनों में अमावस्या
حسبنا الله ونعم الوكيل अल्लाह हमारे लिए काफी है, कितना अच्छा रक्षक है