النور · जुज़ 18
पर जाएँ
बुकमार्क
कारी / पाठक
चलाने की गति
आयत दोहराना
दोहराएँ
स्वतः स्क्रॉल
अनुवाद
अरबी फ़ॉन्ट
टेक्स्ट आकार
अरबी
अनुवाद
हिफ़्ज़ का क्षेत्र
दोहराव
प्रति आयत
पूर्ण लूप
मुख्य कारी
जारी है - A-B लूप /

क़ुरआन का रुकू 308 पढ़ें

रुकू 308 सूरह An-Nur (आयत 58 से 61) से है। इसमें 4 आयतें हैं और यह जुज़ 18 में है।

10 जुलाई 2026 को 03h52 बजे अपडेट किया गया

Ruku 308 dans le Coran

4
आयतें
1
सूरह
18
जुज़
v.58 – v.61
आयतें

Sourate dans le Ruku 308

पृष्ठ 358
रुकू 308
سورة النور
जुज़ 18 87.1% (176/202)
हिज़्ब 36 59.4% (38/64)

وَإِذَا بَلَغَ ٱلْأَطْفَـٰلُ مِنكُمُ ٱلْحُلُمَ فَلْيَسْتَـْٔذِنُوا۟ كَمَا ٱسْتَـْٔذَنَ ٱلَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ ۚ كَذَٰلِكَ يُبَيِّنُ ٱللَّهُ لَكُمْ ءَايَـٰتِهِۦ ۗ وَٱللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٌۭ ﴿٥٩﴾

और (ऐ ईमानदारों) जब तुम्हारे लड़के हदे बुलूग को पहुँचें तो जिस तरह उन के कब्ल (बड़ी उम्र) वाले (घर में आने की) इजाज़त ले लिया करते थे उसी तरह ये लोग भी इजाज़त ले लिया करें-यूँ ख़ुदा अपने एहकाम साफ साफ बयान करता है और ख़ुदा तो बड़ा वाकिफकार हकीम है

وَٱلْقَوَٰعِدُ مِنَ ٱلنِّسَآءِ ٱلَّـٰتِى لَا يَرْجُونَ نِكَاحًۭا فَلَيْسَ عَلَيْهِنَّ جُنَاحٌ أَن يَضَعْنَ ثِيَابَهُنَّ غَيْرَ مُتَبَرِّجَـٰتٍۭ بِزِينَةٍۢ ۖ وَأَن يَسْتَعْفِفْنَ خَيْرٌۭ لَّهُنَّ ۗ وَٱللَّهُ سَمِيعٌ عَلِيمٌۭ ﴿٦٠﴾

और बूढ़ी बूढ़ी औरतें जो (बुढ़ापे की वजह से) निकाह की ख्वाहिश नही रखती वह अगर अपने कपड़े (दुपट्टे वगैराह) उतारकर (सर नंगा) कर डालें तो उसमें उन पर कुछ गुनाह नही है- बशर्ते कि उनको अपना बनाव सिंगार दिखाना मंज़ूर न हो और (इस से भी) बचें तो उनके लिए और बेहतर है और ख़ुदा तो (सबकी सब कुछ) सुनता और जानता है

لَّيْسَ عَلَى ٱلْأَعْمَىٰ حَرَجٌۭ وَلَا عَلَى ٱلْأَعْرَجِ حَرَجٌۭ وَلَا عَلَى ٱلْمَرِيضِ حَرَجٌۭ وَلَا عَلَىٰٓ أَنفُسِكُمْ أَن تَأْكُلُوا۟ مِنۢ بُيُوتِكُمْ أَوْ بُيُوتِ ءَابَآئِكُمْ أَوْ بُيُوتِ أُمَّهَـٰتِكُمْ أَوْ بُيُوتِ إِخْوَٰنِكُمْ أَوْ بُيُوتِ أَخَوَٰتِكُمْ أَوْ بُيُوتِ أَعْمَـٰمِكُمْ أَوْ بُيُوتِ عَمَّـٰتِكُمْ أَوْ بُيُوتِ أَخْوَٰلِكُمْ أَوْ بُيُوتِ خَـٰلَـٰتِكُمْ أَوْ مَا مَلَكْتُم مَّفَاتِحَهُۥٓ أَوْ صَدِيقِكُمْ ۚ لَيْسَ عَلَيْكُمْ جُنَاحٌ أَن تَأْكُلُوا۟ جَمِيعًا أَوْ أَشْتَاتًۭا ۚ فَإِذَا دَخَلْتُم بُيُوتًۭا فَسَلِّمُوا۟ عَلَىٰٓ أَنفُسِكُمْ تَحِيَّةًۭ مِّنْ عِندِ ٱللَّهِ مُبَـٰرَكَةًۭ طَيِّبَةًۭ ۚ كَذَٰلِكَ يُبَيِّنُ ٱللَّهُ لَكُمُ ٱلْـَٔايَـٰتِ لَعَلَّكُمْ تَعْقِلُونَ ﴿٦١﴾

इस बात में न तो अंधे आदमी के लिए मज़ाएक़ा है और न लँगड़ें आदमी पर कुछ इल्ज़ाम है- और न बीमार पर कोई गुनाह है और न ख़ुद तुम लोगो पर कि अपने घरों से खाना खाओ या अपने बाप दादा नाना बग़ैरह के घरों से या अपनी माँ दादी नानी वगैरह के घरों से या अपने भाइयों के घरों से या अपनी बहनों के घरों से या अपने चचाओं के घरों से या अपनी फूफ़ियों के घरों से या अपने मामूओं के घरों से या अपनी खालाओं के घरों से या उस घर से जिसकी कुन्जियाँ तुम्हारे हाथ में है या अपने दोस्तों (के घरों) से इस में भी तुम पर कोई इल्ज़ाम नहीं कि सब के सब मिलकर खाओ या अलग अलग फिर जब तुम घर वालों में जाने लगो (और वहाँ किसी का न पाओ) तो ख़ुद अपने ही ऊपर सलाम कर लिया करो जो ख़ुदा की तरफ से एक मुबारक पाक व पाकीज़ा तोहफा है- ख़ुदा यूँ (अपने) एहकाम तुमसे साफ साफ बयान करता है ताकि तुम समझो

بسم الله الرحمن الرحيم शुक्र 1 सफर
الجمعة 1 صفر
هلال متزايد बढ़ता हुआ अर्धचंद्र दिन 2.3 / 29.5
रोशनी 6%
12 दिनों में पूर्णिमा
سبحان الله وبحمده अल्लाह की महिमा और स्तुति है