آل عمران · जुज़ 3
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क़ुरआन का रुकू 47 पढ़ें

रुकू 47 सूरह Al-Imran (आयत 55 से 63) से है। इसमें 9 आयतें हैं और यह जुज़ 3 में है।

10 जुलाई 2026 को 03h52 बजे अपडेट किया गया

Ruku 47 dans le Coran

9
आयतें
1
सूरह
3
जुज़
v.55 – v.63
आयतें

Sourate dans le Ruku 47

पृष्ठ 58
रुकू 47
سورة آل عمران
जुज़ 3 75.4% (95/126)
हिज़्ब 6 60.3% (47/78)

إِنَّ هَـٰذَا لَهُوَ ٱلْقَصَصُ ٱلْحَقُّ ۚ وَمَا مِنْ إِلَـٰهٍ إِلَّا ٱللَّهُ ۚ وَإِنَّ ٱللَّهَ لَهُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلْحَكِيمُ ﴿٦٢﴾

उसके बाद हम सब मिलकर (खुदा की बारगाह में) गिड़गिड़ाएं और झूठों पर ख़ुदा की लानत करें (ऐ रसूल) ये सब यक़ीनी सच्चे वाक़यात हैं और ख़ुदा के सिवा कोई माबूद (क़ाबिले परसतिश) नहीं है

فَإِن تَوَلَّوْا۟ فَإِنَّ ٱللَّهَ عَلِيمٌۢ بِٱلْمُفْسِدِينَ ﴿٦٣﴾

और बेशक ख़ुदा ही सब पर ग़ालिब और हिकमत वाला है

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