रुकू 537 सूरह At-Tin (आयत 1 से 8) से है। इसमें 8 आयतें हैं और यह जुज़ 30 में है।
10 जुलाई 2026 को 03h52 बजे अपडेट किया गया
coran.read_full_page : क़ुरआन का रुकू 537 पढ़ें →
وَٱلتِّينِ وَٱلزَّيْتُونِ ﴿١﴾
इन्जीर और ज़ैतून की क़सम
وَطُورِ سِينِينَ ﴿٢﴾
और तूर सीनीन की
وَهَـٰذَا ٱلْبَلَدِ ٱلْأَمِينِ ﴿٣﴾
और उस अमन वाले शहर (मक्का) की
لَقَدْ خَلَقْنَا ٱلْإِنسَـٰنَ فِىٓ أَحْسَنِ تَقْوِيمٍۢ ﴿٤﴾
कि हमने इन्सान बहुत अच्छे कैड़े का पैदा किया
ثُمَّ رَدَدْنَـٰهُ أَسْفَلَ سَـٰفِلِينَ ﴿٥﴾
फिर हमने उसे (बूढ़ा करके रफ्ता रफ्ता) पस्त से पस्त हालत की तरफ फेर दिया
إِلَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ فَلَهُمْ أَجْرٌ غَيْرُ مَمْنُونٍۢ ﴿٦﴾
मगर जो लोग ईमान लाए और अच्छे (अच्छे) काम करते रहे उनके लिए तो बे इन्तेहा अज्र व सवाब है
فَمَا يُكَذِّبُكَ بَعْدُ بِٱلدِّينِ ﴿٧﴾
तो (ऐ रसूल) इन दलीलों के बाद तुमको (रोज़े) जज़ा के बारे में कौन झुठला सकता है
أَلَيْسَ ٱللَّهُ بِأَحْكَمِ ٱلْحَـٰكِمِينَ ﴿٨﴾
क्या ख़ुदा सबसे बड़ा हाकिम नहीं है (हाँ ज़रूर है)