الفيل · जुज़ 30
पर जाएँ
बुकमार्क
कारी / पाठक
चलाने की गति
आयत दोहराना
दोहराएँ
स्वतः स्क्रॉल
अनुवाद
अरबी फ़ॉन्ट
टेक्स्ट आकार
अरबी
अनुवाद
हिफ़्ज़ का क्षेत्र
दोहराव
प्रति आयत
पूर्ण लूप
मुख्य कारी
जारी है - A-B लूप /

क़ुरआन का रुकू 547 पढ़ें

रुकू 547 सूरह Al-Fil (आयत 1 से 5) से है। इसमें 5 आयतें हैं और यह जुज़ 30 में है।

10 जुलाई 2026 को 03h52 बजे अपडेट किया गया

Ruku 547 dans le Coran

5
आयतें
1
सूरह
30
जुज़
v.1 – v.5
आयतें

Sourate dans le Ruku 547

पृष्ठ 601
रुकू 547
سورة العصر
जुज़ 30 91.5% (516/564)
हिज़्ब 60 83.3% (240/288)

أَلَمْ تَرَ كَيْفَ فَعَلَ رَبُّكَ بِأَصْحَـٰبِ ٱلْفِيلِ ﴿١﴾

ऐ रसूल क्या तुमने नहीं देखा कि तुम्हारे परवरदिगार ने हाथी वालों के साथ क्या किया

أَلَمْ يَجْعَلْ كَيْدَهُمْ فِى تَضْلِيلٍۢ ﴿٢﴾

क्या उसने उनकी तमाम तद्बीरें ग़लत नहीं कर दीं (ज़रूर)

وَأَرْسَلَ عَلَيْهِمْ طَيْرًا أَبَابِيلَ ﴿٣﴾

और उन पर झुन्ड की झुन्ड चिड़ियाँ भेज दीं

تَرْمِيهِم بِحِجَارَةٍۢ مِّن سِجِّيلٍۢ ﴿٤﴾

जो उन पर खरन्जों की कंकरियाँ फेकती थीं

فَجَعَلَهُمْ كَعَصْفٍۢ مَّأْكُولٍۭ ﴿٥﴾

तो उन्हें चबाए हुए भूस की (तबाह) कर दिया

بسم الله الرحمن الرحيم शुक्र 24 मुहर्रम
الجمعة 24 محرّم
هلال متناقص घटता हुआ अर्धचंद्र दिन 25.2 / 29.5
रोशनी 19%
4 दिनों में अमावस्या
لا حول ولا قوة إلا بالله अल्लाह के बिना कोई शक्ति और सामर्थ्य नहीं