قريش · जुज़ 30
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क़ुरआन का रुकू 548 पढ़ें

रुकू 548 सूरह Quraysh (आयत 1 से 4) से है। इसमें 4 आयतें हैं और यह जुज़ 30 में है।

10 जुलाई 2026 को 03h52 बजे अपडेट किया गया

Ruku 548 dans le Coran

4
आयतें
1
सूरह
30
जुज़
v.1 – v.4
आयतें

Sourate dans le Ruku 548

पृष्ठ 602
रुकू 548
سورة قريش
जुज़ 30 92.4% (521/564)
हिज़्ब 60 85.1% (245/288)

لِإِيلَـٰفِ قُرَيْشٍ ﴿١﴾

चूँकि क़ुरैश को जाड़े और गर्मी के सफ़र से मानूस कर दिया है

إِۦلَـٰفِهِمْ رِحْلَةَ ٱلشِّتَآءِ وَٱلصَّيْفِ ﴿٢﴾

तो उनको मानूस कर देने की वजह से

فَلْيَعْبُدُوا۟ رَبَّ هَـٰذَا ٱلْبَيْتِ ﴿٣﴾

इस घर (काबा) के मालिक की इबादत करनी चाहिए

ٱلَّذِىٓ أَطْعَمَهُم مِّن جُوعٍۢ وَءَامَنَهُم مِّنْ خَوْفٍۭ ﴿٤﴾

जिसने उनको भूख में खाना दिया और उनको खौफ़ से अमन अता किया

بسم الله الرحمن الرحيم शुक्र 24 मुहर्रम
الجمعة 24 محرّم
هلال متناقص घटता हुआ अर्धचंद्र दिन 25.2 / 29.5
रोशनी 19%
4 दिनों में अमावस्या
اللهم صل على محمد ऐ अल्लाह, मुहम्मद पर दरूद भेज