الماعون · जुज़ 30
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क़ुरआन का रुकू 549 पढ़ें

रुकू 549 सूरह Al-Maun (आयत 1 से 7) से है। इसमें 7 आयतें हैं और यह जुज़ 30 में है।

10 जुलाई 2026 को 03h52 बजे अपडेट किया गया

Ruku 549 dans le Coran

7
आयतें
1
सूरह
30
जुज़
v.1 – v.7
आयतें

Sourate dans le Ruku 549

पृष्ठ 602
रुकू 549
سورة قريش
जुज़ 30 93.1% (525/564)
हिज़्ब 60 86.5% (249/288)

أَرَءَيْتَ ٱلَّذِى يُكَذِّبُ بِٱلدِّينِ ﴿١﴾

क्या तुमने उस शख़्श को भी देखा है जो रोज़ जज़ा को झुठलाता है

فَذَٰلِكَ ٱلَّذِى يَدُعُّ ٱلْيَتِيمَ ﴿٢﴾

ये तो वही (कम्बख्त) है जो यतीम को धक्के देता है

وَلَا يَحُضُّ عَلَىٰ طَعَامِ ٱلْمِسْكِينِ ﴿٣﴾

और मोहताजों को खिलाने के लिए (लोगों को) आमादा नहीं करता

فَوَيْلٌۭ لِّلْمُصَلِّينَ ﴿٤﴾

तो उन नमाज़ियों की तबाही है

ٱلَّذِينَ هُمْ عَن صَلَاتِهِمْ سَاهُونَ ﴿٥﴾

जो अपनी नमाज़ से ग़ाफिल रहते हैं

ٱلَّذِينَ هُمْ يُرَآءُونَ ﴿٦﴾

जो दिखाने के वास्ते करते हैं

وَيَمْنَعُونَ ٱلْمَاعُونَ ﴿٧﴾

और रोज़मर्रा की मालूली चीज़ें भी आरियत नहीं देते

بسم الله الرحمن الرحيم शुक्र 24 मुहर्रम
الجمعة 24 محرّم
هلال متناقص घटता हुआ अर्धचंद्र दिन 25.2 / 29.5
रोशनी 19%
4 दिनों में अमावस्या
سبحان الله अल्लाह की पवित्रता है