क़ुरआन का पृष्ठ 24 पढ़ें

मुसहफ़ का पृष्ठ 24 10 आयतों को समाहित करता है। यह जुज़ 2, हिज़्ब 3 में है।

05 अगस्त 2026 को 16h34 बजे अपडेट किया गया

क़ुरआन में पृष्ठ 24

10
आयतें
2
जुज़
3
हिज़्ब
1
सूरह

पृष्ठ 24 में सूरह

البقرة · जुज़ 2
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जुज़ 2
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سورة البقرة
जुज़ 2 10.8% (12/111)
हिज़्ब 3 19.7% (12/61)

وَلَا تَقُولُوا۟ لِمَن يُقْتَلُ فِى سَبِيلِ ٱللَّهِ أَمْوَٰتٌۢ ۚ بَلْ أَحْيَآءٌۭ وَلَـٰكِن لَّا تَشْعُرُونَ ﴿154﴾

और जो लोग ख़ुदा की राह में मारे गए उन्हें कभी मुर्दा न कहना बल्कि वह लोग ज़िन्दा हैं मगर तुम उनकी ज़िन्दगी की हक़ीकत का कुछ भी शऊर नहीं रखते

وَلَنَبْلُوَنَّكُم بِشَىْءٍۢ مِّنَ ٱلْخَوْفِ وَٱلْجُوعِ وَنَقْصٍۢ مِّنَ ٱلْأَمْوَٰلِ وَٱلْأَنفُسِ وَٱلثَّمَرَٰتِ ۗ وَبَشِّرِ ٱلصَّـٰبِرِينَ ﴿155﴾

और हम तुम्हें कुछ खौफ़ और भूख से और मालों और जानों और फलों की कमी से ज़रुर आज़माएगें और (ऐ रसूल) ऐसे सब्र करने वालों को ख़ुशख़बरी दे दो

ٱلَّذِينَ إِذَآ أَصَـٰبَتْهُم مُّصِيبَةٌۭ قَالُوٓا۟ إِنَّا لِلَّهِ وَإِنَّآ إِلَيْهِ رَٰجِعُونَ ﴿156﴾

कि जब उन पर कोई मुसीबत आ पड़ी तो वह (बेसाख्ता) बोल उठे हम तो ख़ुदा ही के हैं और हम उसी की तरफ लौट कर जाने वाले हैं

أُو۟لَـٰٓئِكَ عَلَيْهِمْ صَلَوَٰتٌۭ مِّن رَّبِّهِمْ وَرَحْمَةٌۭ ۖ وَأُو۟لَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلْمُهْتَدُونَ ﴿157﴾

उन्हीं लोगों पर उनके परवरदिगार की तरफ से इनायतें हैं और रहमत और यही लोग हिदायत याफ्ता है

۞ إِنَّ ٱلصَّفَا وَٱلْمَرْوَةَ مِن شَعَآئِرِ ٱللَّهِ ۖ فَمَنْ حَجَّ ٱلْبَيْتَ أَوِ ٱعْتَمَرَ فَلَا جُنَاحَ عَلَيْهِ أَن يَطَّوَّفَ بِهِمَا ۚ وَمَن تَطَوَّعَ خَيْرًۭا فَإِنَّ ٱللَّهَ شَاكِرٌ عَلِيمٌ ﴿158﴾

बेशक (कोहे) सफ़ा और (कोह) मरवा ख़ुदा की निशानियों में से हैं पस जो शख्स ख़ानए काबा का हज या उमरा करे उस पर उन दोनो के (दरमियान) तवाफ़ (आमद ओ रफ्त) करने में कुछ गुनाह नहीं (बल्कि सवाब है) और जो शख्स खुश खुश नेक काम करे तो फिर ख़ुदा भी क़दरदाँ (और) वाक़िफ़कार है

إِنَّ ٱلَّذِينَ يَكْتُمُونَ مَآ أَنزَلْنَا مِنَ ٱلْبَيِّنَـٰتِ وَٱلْهُدَىٰ مِنۢ بَعْدِ مَا بَيَّنَّـٰهُ لِلنَّاسِ فِى ٱلْكِتَـٰبِ ۙ أُو۟لَـٰٓئِكَ يَلْعَنُهُمُ ٱللَّهُ وَيَلْعَنُهُمُ ٱللَّـٰعِنُونَ ﴿159﴾

बेशक जो लोग हमारी इन रौशन दलीलों और हिदायतों को जिन्हें हमने नाज़िल किया उसके बाद छिपाते हैं जबकि हम किताब तौरैत में लोगों के सामने साफ़ साफ़ बयान कर चुके हैं तो यही लोग हैं जिन पर ख़ुदा भी लानत करता है और लानत करने वाले भी लानत करते हैं

إِلَّا ٱلَّذِينَ تَابُوا۟ وَأَصْلَحُوا۟ وَبَيَّنُوا۟ فَأُو۟لَـٰٓئِكَ أَتُوبُ عَلَيْهِمْ ۚ وَأَنَا ٱلتَّوَّابُ ٱلرَّحِيمُ ﴿160﴾

मगर जिन लोगों ने (हक़ छिपाने से) तौबा की और अपनी ख़राबी की इसलाह कर ली और जो किताबे ख़ुदा में है साफ़ साफ़ बयान कर दिया पस उन की तौबा मै क़ुबूल करता हूँ और मै तो बड़ा तौबा क़ुबूल करने वाला मेहरबान हूँ

إِنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ وَمَاتُوا۟ وَهُمْ كُفَّارٌ أُو۟لَـٰٓئِكَ عَلَيْهِمْ لَعْنَةُ ٱللَّهِ وَٱلْمَلَـٰٓئِكَةِ وَٱلنَّاسِ أَجْمَعِينَ ﴿161﴾

बेशक जिन लोगों नें कुफ्र एख्तेयार किया और कुफ़्र ही की हालत में मर गए उन्ही पर ख़ुदा की और फरिश्तों की और तमाम लोगों की लानत है हमेशा उसी फटकार में रहेंगे

خَـٰلِدِينَ فِيهَا ۖ لَا يُخَفَّفُ عَنْهُمُ ٱلْعَذَابُ وَلَا هُمْ يُنظَرُونَ ﴿162﴾

न तो उनके अज़ाब ही में तख्फ़ीफ़ (कमी) की जाएगी

وَإِلَـٰهُكُمْ إِلَـٰهٌۭ وَٰحِدٌۭ ۖ لَّآ إِلَـٰهَ إِلَّا هُوَ ٱلرَّحْمَـٰنُ ٱلرَّحِيمُ ﴿163﴾

और न उनको अज़ाब से मोहलत दी जाएगी और तुम्हारा माबूद तो वही यकता ख़ुदा है उस के सिवा कोई माबूद नहीं जो बड़ा मेहरबान रहम वाला है

بسم الله الرحمن الرحيم रवि 6 जुमादा अल-अव्वल
الأحد 6 جمادى الأولى
التربيع الأول पहली तिमाही दिन 7.4 / 29.5
रोशनी 50%
7 दिनों में पूर्णिमा
أستغفر الله मैं अल्लाह से माफी माँगता हूँ

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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