क़ुरआन का पृष्ठ 312 पढ़ें

मुसहफ़ का पृष्ठ 312 15 आयतों को समाहित करता है। यह जुज़ 16, हिज़्ब 31 में है।

05 अगस्त 2026 को 16h34 बजे अपडेट किया गया

क़ुरआन में पृष्ठ 312

15
आयतें
16
जुज़
31
हिज़्ब
2
सूरह

पृष्ठ 312 में सूरह

مريم · जुज़ 16
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जुज़ 16
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سورة مريم
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إِنَّ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ سَيَجْعَلُ لَهُمُ ٱلرَّحْمَـٰنُ وُدًّۭا ﴿96﴾

बेशक जिन लोगों ने ईमान कुबूल किया और अच्छे-अच्छे काम किए अनक़रीब ही खुदा उन की मोहब्बत (लोगों के दिलों में) पैदा कर देगा

فَإِنَّمَا يَسَّرْنَـٰهُ بِلِسَانِكَ لِتُبَشِّرَ بِهِ ٱلْمُتَّقِينَ وَتُنذِرَ بِهِۦ قَوْمًۭا لُّدًّۭا ﴿97﴾

(ऐ रसूल) हमने उस कुरान को तुम्हारी (अरबी) जुबान में सिर्फ इसलिए आसान कर दिया है कि तुम उसके ज़रिए से परहेज़गारों को (जन्नत की) खुशख़बरी दो और (अरब की) झगड़ालू क़ौम को (अज़ाबे खुदा से) डराओ

وَكَمْ أَهْلَكْنَا قَبْلَهُم مِّن قَرْنٍ هَلْ تُحِسُّ مِنْهُم مِّنْ أَحَدٍ أَوْ تَسْمَعُ لَهُمْ رِكْزًۢا ﴿98﴾

और हमने उनसे पहले कितनी जमाअतों को हलाक कर डाला भला तुम उनमें से किसी को (कहीं देखते हो) उसकी कुछ भनक भी सुनते हो

طه ﴿1﴾

ऐ ता हा (रसूलअल्लाह)

مَآ أَنزَلْنَا عَلَيْكَ ٱلْقُرْءَانَ لِتَشْقَىٰٓ ﴿2﴾

हमने तुम पर कुरान इसलिए नाज़िल नहीं किया कि तुम (इस क़दर) मशक्क़त उठाओ

إِلَّا تَذْكِرَةًۭ لِّمَن يَخْشَىٰ ﴿3﴾

मगर जो शख्स खुदा से डरता है उसके लिए नसीहत (क़रार दिया है)

تَنزِيلًۭا مِّمَّنْ خَلَقَ ٱلْأَرْضَ وَٱلسَّمَـٰوَٰتِ ٱلْعُلَى ﴿4﴾

(ये) उस शख्स की तरफ़ से नाज़िल हुआ है जिसने ज़मीन और ऊँचे-ऊँचे आसमानों को पैदा किया

ٱلرَّحْمَـٰنُ عَلَى ٱلْعَرْشِ ٱسْتَوَىٰ ﴿5﴾

वही रहमान है जो अर्श पर (हुक्मरानी के लिए) आमादा व मुस्तईद है

لَهُۥ مَا فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَمَا فِى ٱلْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا وَمَا تَحْتَ ٱلثَّرَىٰ ﴿6﴾

जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है और जो कुछ दोनों के बीच में है और जो कुछ ज़मीन के नीचे है (ग़रज़ सब कुछ) उसी का है

وَإِن تَجْهَرْ بِٱلْقَوْلِ فَإِنَّهُۥ يَعْلَمُ ٱلسِّرَّ وَأَخْفَى ﴿7﴾

और अगर तू पुकार कर बात करे (तो भी आहिस्ता करे तो भी) वह यक़ीनन भेद और उससे ज्यादा पोशीदा चीज़ को जानता है

ٱللَّهُ لَآ إِلَـٰهَ إِلَّا هُوَ ۖ لَهُ ٱلْأَسْمَآءُ ٱلْحُسْنَىٰ ﴿8﴾

अल्लाह (वह माबूद है कि) उसके सिवा कोइ माबूद नहीं है (अच्छे-अच्छे) उसी के नाम हैं

وَهَلْ أَتَىٰكَ حَدِيثُ مُوسَىٰٓ ﴿9﴾

और (ऐ रसूल) क्या तुम तक मूसा की ख़बर पहुँची है कि जब उन्होंने दूर से आग देखी

إِذْ رَءَا نَارًۭا فَقَالَ لِأَهْلِهِ ٱمْكُثُوٓا۟ إِنِّىٓ ءَانَسْتُ نَارًۭا لَّعَلِّىٓ ءَاتِيكُم مِّنْهَا بِقَبَسٍ أَوْ أَجِدُ عَلَى ٱلنَّارِ هُدًۭى ﴿10﴾

तो अपने घर के लोगों से कहने लगे कि तुम लोग (ज़रा यहीं) ठहरो मैंने आग देखी है क्या अजब है कि मैं वहाँ (जाकर) उसमें से एक अंगारा तुम्हारे पास ले आऊँ या आग के पास किसी राह का पता पा जाऊँ

فَلَمَّآ أَتَىٰهَا نُودِىَ يَـٰمُوسَىٰٓ ﴿11﴾

फिर जब मूसा आग के पास आए तो उन्हें आवाज आई

إِنِّىٓ أَنَا۠ رَبُّكَ فَٱخْلَعْ نَعْلَيْكَ ۖ إِنَّكَ بِٱلْوَادِ ٱلْمُقَدَّسِ طُوًۭى ﴿12﴾

कि ऐ मूसा बेशक मैं ही तुम्हारा परवरदिगार हूँ तो तुम अपनी जूतियाँ उतार डालो क्योंकि तुम (इस वक्त) तुआ (नामी) पाक़ीज़ा चटियल मैदान में हो

بسم الله الرحمن الرحيم शनि 12 जुमादा अल-अव्वल
السبت 12 جمادى الأولى
أحدب متزايد बढ़ता हुआ कूबड़ दिन 12.6 / 29.5
रोशनी 95%
2 दिनों में पूर्णिमा
لا إله إلا الله अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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