क़ुरआन का पृष्ठ 322 पढ़ें

मुसहफ़ का पृष्ठ 322 10 आयतों को समाहित करता है। यह जुज़ 17, हिज़्ब 33 में है।

05 अगस्त 2026 को 16h34 बजे अपडेट किया गया

क़ुरआन में पृष्ठ 322

10
आयतें
17
जुज़
33
हिज़्ब
1
सूरह

पृष्ठ 322 में सूरह

الأنبياء · जुज़ 17
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जुज़ 17
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سورة الأنبياء
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ٱقْتَرَبَ لِلنَّاسِ حِسَابُهُمْ وَهُمْ فِى غَفْلَةٍۢ مُّعْرِضُونَ ﴿1﴾

लोगों के पास उनका हिसाब (उसका वक्त) अा पहुँचा और वह है कि गफ़लत में पड़े मुँह मोड़े ही जाते हैं

مَا يَأْتِيهِم مِّن ذِكْرٍۢ مِّن رَّبِّهِم مُّحْدَثٍ إِلَّا ٱسْتَمَعُوهُ وَهُمْ يَلْعَبُونَ ﴿2﴾

जब उनके परवरदिगार की तरफ से उनके पास कोई नया हुक्म आता है तो उसे सिर्फ कान लगाकर सुन लेते हैं और (फिर उसका) हँसी खेल उड़ाते हैं

لَاهِيَةًۭ قُلُوبُهُمْ ۗ وَأَسَرُّوا۟ ٱلنَّجْوَى ٱلَّذِينَ ظَلَمُوا۟ هَلْ هَـٰذَآ إِلَّا بَشَرٌۭ مِّثْلُكُمْ ۖ أَفَتَأْتُونَ ٱلسِّحْرَ وَأَنتُمْ تُبْصِرُونَ ﴿3﴾

उनके दिल (आख़िरत के ख्याल से) बिल्कुल बेख़बर हैं और ये ज़ालिम चुपके-चुपके कानाफूसी किया करते हैं कि ये शख्स (मोहम्मद कुछ भी नहीं) बस तुम्हारे ही सा आदमी है तो क्या तुम दीन व दानिस्ता जादू में फँसते हो

قَالَ رَبِّى يَعْلَمُ ٱلْقَوْلَ فِى ٱلسَّمَآءِ وَٱلْأَرْضِ ۖ وَهُوَ ٱلسَّمِيعُ ٱلْعَلِيمُ ﴿4﴾

(तो उस पर) रसूल ने कहा कि मेरा परवरदिगार जितनी बातें आसमान और ज़मीन में होती हैं खूब जानता है (फिर क्यों कानाफूसी करते हो) और वह तो बड़ा सुनने वाला वाक़िफ़कार है

بَلْ قَالُوٓا۟ أَضْغَـٰثُ أَحْلَـٰمٍۭ بَلِ ٱفْتَرَىٰهُ بَلْ هُوَ شَاعِرٌۭ فَلْيَأْتِنَا بِـَٔايَةٍۢ كَمَآ أُرْسِلَ ٱلْأَوَّلُونَ ﴿5﴾

(उस पर भी उन लोगों ने इक्तिफ़ा न की) बल्कि कहने लगे (ये कुरान तो) ख़ाबहाय परीशाँ का मजमूआ है बल्कि उसने खुद अपने जी से झूट-मूट गढ़ लिया है बल्कि ये शख्स शायर है और अगर हक़ीकतन रसूल है) तो जिस तरह अगले पैग़म्बर मौजिज़ों के साथ भेजे गए थे

مَآ ءَامَنَتْ قَبْلَهُم مِّن قَرْيَةٍ أَهْلَكْنَـٰهَآ ۖ أَفَهُمْ يُؤْمِنُونَ ﴿6﴾

उसी तरह ये भी कोई मौजिज़ा (जैसा हम कहें) हमारे पास भला लाए तो सही इनसे पहले जिन बस्तियों को तबाह कर डाला (मौजिज़े भी देखकर तो) ईमान न लाए

وَمَآ أَرْسَلْنَا قَبْلَكَ إِلَّا رِجَالًۭا نُّوحِىٓ إِلَيْهِمْ ۖ فَسْـَٔلُوٓا۟ أَهْلَ ٱلذِّكْرِ إِن كُنتُمْ لَا تَعْلَمُونَ ﴿7﴾

तो क्या ये लोग ईमान लाएँगे और ऐ रसूल हमने तुमसे पहले भी आदमियों ही को (रसूल बनाकर) भेजा था कि उनके पास ''वही'' भेजा करते थे तो अगर तुम लोग खुद नहीं जानते हो तो आलिमों से पूँछकर देखो

وَمَا جَعَلْنَـٰهُمْ جَسَدًۭا لَّا يَأْكُلُونَ ٱلطَّعَامَ وَمَا كَانُوا۟ خَـٰلِدِينَ ﴿8﴾

और हमने उन (पैग़म्बरों) के बदन ऐसे नहीं बनाए थे कि वह खाना न खाएँ और न वह (दुनिया में) हमेशा रहने सहने वाले थे

ثُمَّ صَدَقْنَـٰهُمُ ٱلْوَعْدَ فَأَنجَيْنَـٰهُمْ وَمَن نَّشَآءُ وَأَهْلَكْنَا ٱلْمُسْرِفِينَ ﴿9﴾

फिर हमने उन्हें (अपना अज़ाब का) वायदा सच्चा कर दिखाया (और जब अज़ाब आ पहुँचा) तो हमने उन पैग़म्बरों को और जिस जिसको चाहा छुटकारा दिया और हद से बढ़ जाने वालों को हलाक कर डाला

لَقَدْ أَنزَلْنَآ إِلَيْكُمْ كِتَـٰبًۭا فِيهِ ذِكْرُكُمْ ۖ أَفَلَا تَعْقِلُونَ ﴿10﴾

हमने तो तुम लोगों के पास वह किताब (कुरान) नाज़िल की है जिसमें तुम्हारा (भी) ज़िक्रे (ख़ैर) है तो क्या तुम लोग (इतना भी) समझते

بسم الله الرحمن الرحيم शनि 12 जुमादा अल-अव्वल
السبت 12 جمادى الأولى
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2 दिनों में पूर्णिमा
لا إله إلا الله अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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