क़ुरआन का पृष्ठ 574 पढ़ें

मुसहफ़ का पृष्ठ 574 19 आयतों को समाहित करता है। यह जुज़ 29, हिज़्ब 58 में है।

28 अक्टूबर 2026 को 00h24 बजे अपडेट किया गया

क़ुरआन में पृष्ठ 574

19
आयतें
29
जुज़
58
हिज़्ब
1
सूरह

पृष्ठ 574 में सूरह

المزمل · जुज़ 29
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जुज़ 29
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سورة المزمل
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हिज़्ब 58 12.4% (28/225)

يَـٰٓأَيُّهَا ٱلْمُزَّمِّلُ ﴿1﴾

ऐ (मेरे) चादर लपेटे रसूल

قُمِ ٱلَّيْلَ إِلَّا قَلِيلًۭا ﴿2﴾

रात को (नमाज़ के वास्ते) खड़े रहो मगर (पूरी रात नहीं)

نِّصْفَهُۥٓ أَوِ ٱنقُصْ مِنْهُ قَلِيلًا ﴿3﴾

थोड़ी रात या आधी रात या इससे भी कुछ कम कर दो या उससे कुछ बढ़ा दो

أَوْ زِدْ عَلَيْهِ وَرَتِّلِ ٱلْقُرْءَانَ تَرْتِيلًا ﴿4﴾

और क़ुरान को बाक़ायदा ठहर ठहर कर पढ़ा करो

إِنَّا سَنُلْقِى عَلَيْكَ قَوْلًۭا ثَقِيلًا ﴿5﴾

हम अनक़रीब तुम पर एक भारी हुक्म नाज़िल करेंगे इसमें शक़ नहीं कि रात को उठना

إِنَّ نَاشِئَةَ ٱلَّيْلِ هِىَ أَشَدُّ وَطْـًۭٔا وَأَقْوَمُ قِيلًا ﴿6﴾

ख़ूब (नफ्स का) पामाल करना और बहुत ठिकाने से ज़िक्र का वक्त है

إِنَّ لَكَ فِى ٱلنَّهَارِ سَبْحًۭا طَوِيلًۭا ﴿7﴾

दिन को तो तुम्हारे बहुत बड़े बड़े अशग़ाल हैं

وَٱذْكُرِ ٱسْمَ رَبِّكَ وَتَبَتَّلْ إِلَيْهِ تَبْتِيلًۭا ﴿8﴾

तो तुम अपने परवरदिगार के नाम का ज़िक्र करो और सबसे टूट कर उसी के हो रहो

رَّبُّ ٱلْمَشْرِقِ وَٱلْمَغْرِبِ لَآ إِلَـٰهَ إِلَّا هُوَ فَٱتَّخِذْهُ وَكِيلًۭا ﴿9﴾

(वही) मशरिक और मग़रिब का मालिक है उसके सिवा कोई माबूद नहीं तो तुम उसी को कारसाज़ बनाओ

وَٱصْبِرْ عَلَىٰ مَا يَقُولُونَ وَٱهْجُرْهُمْ هَجْرًۭا جَمِيلًۭا ﴿10﴾

और जो कुछ लोग बका करते हैं उस पर सब्र करो और उनसे बा उनवाने शाएस्ता अलग थलग रहो

وَذَرْنِى وَٱلْمُكَذِّبِينَ أُو۟لِى ٱلنَّعْمَةِ وَمَهِّلْهُمْ قَلِيلًا ﴿11﴾

और मुझे उन झुठलाने वालों से जो दौलतमन्द हैं समझ लेने दो और उनको थोड़ी सी मोहलत दे दो

إِنَّ لَدَيْنَآ أَنكَالًۭا وَجَحِيمًۭا ﴿12﴾

बेशक हमारे पास बेड़ियाँ (भी) हैं और जलाने वाली आग (भी)

وَطَعَامًۭا ذَا غُصَّةٍۢ وَعَذَابًا أَلِيمًۭا ﴿13﴾

और गले में फँसने वाला खाना (भी) और दुख देने वाला अज़ाब (भी)

يَوْمَ تَرْجُفُ ٱلْأَرْضُ وَٱلْجِبَالُ وَكَانَتِ ٱلْجِبَالُ كَثِيبًۭا مَّهِيلًا ﴿14﴾

जिस दिन ज़मीन और पहाड़ लरज़ने लगेंगे और पहाड़ रेत के टीले से भुर भुरे हो जाएँगे

إِنَّآ أَرْسَلْنَآ إِلَيْكُمْ رَسُولًۭا شَـٰهِدًا عَلَيْكُمْ كَمَآ أَرْسَلْنَآ إِلَىٰ فِرْعَوْنَ رَسُولًۭا ﴿15﴾

(ऐ मक्का वालों) हमने तुम्हारे पास (उसी तरह) एक रसूल (मोहम्मद) को भेजा जो तुम्हारे मामले में गवाही दे जिस तरह फिरऔन के पास एक रसूल (मूसा) को भेजा था

فَعَصَىٰ فِرْعَوْنُ ٱلرَّسُولَ فَأَخَذْنَـٰهُ أَخْذًۭا وَبِيلًۭا ﴿16﴾

तो फिरऔन ने उस रसूल की नाफ़रमानी की तो हमने भी (उसकी सज़ा में) उसको बहुत सख्त पकड़ा

فَكَيْفَ تَتَّقُونَ إِن كَفَرْتُمْ يَوْمًۭا يَجْعَلُ ٱلْوِلْدَٰنَ شِيبًا ﴿17﴾

तो अगर तुम भी न मानोगे तो उस दिन (के अज़ाब) से क्यों कर बचोगे जो बच्चों को बूढ़ा बना देगा

ٱلسَّمَآءُ مُنفَطِرٌۢ بِهِۦ ۚ كَانَ وَعْدُهُۥ مَفْعُولًا ﴿18﴾

जिस दिन आसमान फट पड़ेगा (ये) उसका वायदा पूरा होकर रहेगा

إِنَّ هَـٰذِهِۦ تَذْكِرَةٌۭ ۖ فَمَن شَآءَ ٱتَّخَذَ إِلَىٰ رَبِّهِۦ سَبِيلًا ﴿19﴾

बेशक ये नसीहत है तो जो शख़्श चाहे अपने परवरदिगार की राह एख्तेयार करे

بسم الله الرحمن الرحيم गुरु 17 जुमादा अल-अव्वल
الخميس 17 جمادى الأولى
أحدب متناقص घटता हुआ कूबड़ दिन 18.4 / 29.5
रोशनी 86%
11 दिनों में अमावस्या
لا إله إلا الله अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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