क़ुरआन का रुकू 295 पढ़ें

रुकू 295 सूरह Al-Muminun (आयत 1 से 22) से है। इसमें 22 आयतें हैं और यह जुज़ 18 में है।

05 अगस्त 2026 को 16h34 बजे अपडेट किया गया

क़ुरआन में रुकू 295

22
आयतें
1
सूरह
18
जुज़
v.1 – v.22
आयतें

रुकू 295 में सूरह

المؤمنون · जुज़ 18
पृष्ठ 342
रुकू 295
سورة المؤمنون
जुज़ 18 0.0% (0/202)
हिज़्ब 35 0.0% (0/138)

قَدْ أَفْلَحَ ٱلْمُؤْمِنُونَ ﴿١﴾

अलबत्ता वह ईमान लाने वाले रस्तगार हुए

ٱلَّذِينَ هُمْ فِى صَلَاتِهِمْ خَـٰشِعُونَ ﴿٢﴾

जो अपनी नमाज़ों में (खुदा के सामने) गिड़गिड़ाते हैं

وَٱلَّذِينَ هُمْ عَنِ ٱللَّغْوِ مُعْرِضُونَ ﴿٣﴾

और जो बेहूदा बातों से मुँह फेरे रहते हैं

وَٱلَّذِينَ هُمْ لِلزَّكَوٰةِ فَـٰعِلُونَ ﴿٤﴾

और जो ज़कात (अदा) किया करते हैं

وَٱلَّذِينَ هُمْ لِفُرُوجِهِمْ حَـٰفِظُونَ ﴿٥﴾

और जो (अपनी) शर्मगाहों को (हराम से) बचाते हैं

إِلَّا عَلَىٰٓ أَزْوَٰجِهِمْ أَوْ مَا مَلَكَتْ أَيْمَـٰنُهُمْ فَإِنَّهُمْ غَيْرُ مَلُومِينَ ﴿٦﴾

मगर अपनी बीबियों से या अपनी ज़र ख़रीद लौनडियों से कि उन पर हरगिज़ इल्ज़ाम नहीं हो सकता

فَمَنِ ٱبْتَغَىٰ وَرَآءَ ذَٰلِكَ فَأُو۟لَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلْعَادُونَ ﴿٧﴾

पस जो शख्स उसके सिवा किसी और तरीके से शहवत परस्ती की तमन्ना करे तो ऐसे ही लोग हद से बढ़ जाने वाले हैं

وَٱلَّذِينَ هُمْ لِأَمَـٰنَـٰتِهِمْ وَعَهْدِهِمْ رَٰعُونَ ﴿٨﴾

और जो अपनी अमानतों और अपने एहद का लिहाज़ रखते हैं

وَٱلَّذِينَ هُمْ عَلَىٰ صَلَوَٰتِهِمْ يُحَافِظُونَ ﴿٩﴾

और जो अपनी नमाज़ों की पाबन्दी करते हैं

أُو۟لَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلْوَٰرِثُونَ ﴿١٠﴾

(आदमी की औलाद में) यही लोग सच्चे वारिस है

ٱلَّذِينَ يَرِثُونَ ٱلْفِرْدَوْسَ هُمْ فِيهَا خَـٰلِدُونَ ﴿١١﴾

जो बेहश्त बरी का हिस्सा लेंगे (और) यही लोग इसमें हमेशा (जिन्दा) रहेंगे

وَلَقَدْ خَلَقْنَا ٱلْإِنسَـٰنَ مِن سُلَـٰلَةٍۢ مِّن طِينٍۢ ﴿١٢﴾

और हमने आदमी को गीली मिट्टी के जौहर से पैदा किया

ثُمَّ جَعَلْنَـٰهُ نُطْفَةًۭ فِى قَرَارٍۢ مَّكِينٍۢ ﴿١٣﴾

फिर हमने उसको एक महफूज़ जगह (औरत के रहम में) नुत्फ़ा बना कर रखा

ثُمَّ خَلَقْنَا ٱلنُّطْفَةَ عَلَقَةًۭ فَخَلَقْنَا ٱلْعَلَقَةَ مُضْغَةًۭ فَخَلَقْنَا ٱلْمُضْغَةَ عِظَـٰمًۭا فَكَسَوْنَا ٱلْعِظَـٰمَ لَحْمًۭا ثُمَّ أَنشَأْنَـٰهُ خَلْقًا ءَاخَرَ ۚ فَتَبَارَكَ ٱللَّهُ أَحْسَنُ ٱلْخَـٰلِقِينَ ﴿١٤﴾

फिर हम ही ने नुतफ़े को जमा हुआ ख़ून बनाया फिर हम ही ने मुनजमिद खून को गोश्त का लोथड़ा बनाया हम ही ने लोथडे क़ी हड्डियाँ बनायीं फिर हम ही ने हड्डियों पर गोश्त चढ़ाया फिर हम ही ने उसको (रुह डालकर) एक दूसरी सूरत में पैदा किया तो (सुबहान अल्लाह) ख़ुदा बा बरकत है जो सब बनाने वालो से बेहतर है

ثُمَّ إِنَّكُم بَعْدَ ذَٰلِكَ لَمَيِّتُونَ ﴿١٥﴾

फिर इसके बाद यक़ीनन तुम सब लोगों को (एक न एक दिन) मरना है

ثُمَّ إِنَّكُمْ يَوْمَ ٱلْقِيَـٰمَةِ تُبْعَثُونَ ﴿١٦﴾

इसके बाद कयामत के दिन तुम सब के सब कब्रों से उठाए जाओगे

وَلَقَدْ خَلَقْنَا فَوْقَكُمْ سَبْعَ طَرَآئِقَ وَمَا كُنَّا عَنِ ٱلْخَلْقِ غَـٰفِلِينَ ﴿١٧﴾

और हम ही ने तुम्हारे ऊपर तह ब तह आसमान बनाए और हम मख़लूक़ात से बेखबर नही है

وَأَنزَلْنَا مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءًۢ بِقَدَرٍۢ فَأَسْكَنَّـٰهُ فِى ٱلْأَرْضِ ۖ وَإِنَّا عَلَىٰ ذَهَابٍۭ بِهِۦ لَقَـٰدِرُونَ ﴿١٨﴾

और हमने आसमान से एक अन्दाजे क़े साथ पानी बरसाया फिर उसको ज़मीन में (हसब मसलेहत) ठहराए रखा और हम तो यक़ीनन उसके ग़ाएब कर देने पर भी क़ाबू रखते है

فَأَنشَأْنَا لَكُم بِهِۦ جَنَّـٰتٍۢ مِّن نَّخِيلٍۢ وَأَعْنَـٰبٍۢ لَّكُمْ فِيهَا فَوَٰكِهُ كَثِيرَةٌۭ وَمِنْهَا تَأْكُلُونَ ﴿١٩﴾

फिर हमने उस पानी से तुम्हारे वास्ते खजूरों और अंगूरों के बाग़ात बनाए कि उनमें तुम्हारे वास्ते (तरह तरह के) बहुतेरे मेवे (पैदा होते) हैं उनमें से बाज़ को तुम खाते हो

وَشَجَرَةًۭ تَخْرُجُ مِن طُورِ سَيْنَآءَ تَنۢبُتُ بِٱلدُّهْنِ وَصِبْغٍۢ لِّلْـَٔاكِلِينَ ﴿٢٠﴾

और (हम ही ने ज़ैतून का) दरख्त (पैदा किया) जो तूरे सैना (पहाड़) में (कसरत से) पैदा होता है जिससे तेल भी निकलता है और खाने वालों के लिए सालन भी है

وَإِنَّ لَكُمْ فِى ٱلْأَنْعَـٰمِ لَعِبْرَةًۭ ۖ نُّسْقِيكُم مِّمَّا فِى بُطُونِهَا وَلَكُمْ فِيهَا مَنَـٰفِعُ كَثِيرَةٌۭ وَمِنْهَا تَأْكُلُونَ ﴿٢١﴾

और उसमें भी शक नहीं कि तुम्हारे वास्ते चौपायों में भी इबरत की जगह है और (ख़ाक बला) जो कुछ उनके पेट में है उससे हम तुमको दूध पिलाते हैं और जानवरों में तो तुम्हारे और भी बहुत से फायदे हैं और उन्हीं में से बाज़ तुम खाते हो

وَعَلَيْهَا وَعَلَى ٱلْفُلْكِ تُحْمَلُونَ ﴿٢٢﴾

और उन्हें जानवरों और कश्तियों पर चढे चढ़े फिरते भी हो

بسم الله الرحمن الرحيم मंगल 18 रबी अल-अव्वल
الثلاثاء 18 ربيع الأول
أحدب متناقص घटता हुआ कूबड़ दिन 19.5 / 29.5
रोशनी 77%
10 दिनों में अमावस्या
لا إله إلا الله अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं