क़ुरआन का रुकू 413 पढ़ें

रुकू 413 सूरह Fussilat (आयत 1 से 8) से है। इसमें 8 आयतें हैं और यह जुज़ 24 में है।

05 अगस्त 2026 को 16h34 बजे अपडेट किया गया

क़ुरआन में रुकू 413

8
आयतें
1
सूरह
24
जुज़
v.1 – v.8
आयतें

रुकू 413 में सूरह

فصلت · जुज़ 24
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سورة فصلت
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हिज़्ब 48 49.5% (45/91)

حمٓ ﴿1﴾

हा मीम

تَنزِيلٌۭ مِّنَ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ ﴿2﴾

(ये किताब) रहमान व रहीम ख़ुदा की तरफ से नाज़िल हुई है ये (वह) किताब अरबी क़ुरान है

كِتَـٰبٌۭ فُصِّلَتْ ءَايَـٰتُهُۥ قُرْءَانًا عَرَبِيًّۭا لِّقَوْمٍۢ يَعْلَمُونَ ﴿3﴾

जिसकी आयतें समझदार लोगें के वास्ते तफ़सील से बयान कर दी गयीं हैं

بَشِيرًۭا وَنَذِيرًۭا فَأَعْرَضَ أَكْثَرُهُمْ فَهُمْ لَا يَسْمَعُونَ ﴿4﴾

ं(नेको कारों को) ख़़ुशख़बरी देने वाली और (बदकारों को) डराने वाली है इस पर भी उनमें से अक्सर ने मुँह फेर लिया और वह सुनते ही नहीं

وَقَالُوا۟ قُلُوبُنَا فِىٓ أَكِنَّةٍۢ مِّمَّا تَدْعُونَآ إِلَيْهِ وَفِىٓ ءَاذَانِنَا وَقْرٌۭ وَمِنۢ بَيْنِنَا وَبَيْنِكَ حِجَابٌۭ فَٱعْمَلْ إِنَّنَا عَـٰمِلُونَ ﴿5﴾

और कहने लगे जिस चीज़ की तरफ तुम हमें बुलाते हो उससे तो हमारे दिल पर्दों में हैं (कि दिल को नहीं लगती) और हमारे कानों में गिर्दानी (बहरापन है) कि कुछ सुनायी नहीं देता और हमारे तुम्हारे दरमियान एक पर्दा (हायल) है तो तुम (अपना) काम करो हम (अपना) काम करते हैं

قُلْ إِنَّمَآ أَنَا۠ بَشَرٌۭ مِّثْلُكُمْ يُوحَىٰٓ إِلَىَّ أَنَّمَآ إِلَـٰهُكُمْ إِلَـٰهٌۭ وَٰحِدٌۭ فَٱسْتَقِيمُوٓا۟ إِلَيْهِ وَٱسْتَغْفِرُوهُ ۗ وَوَيْلٌۭ لِّلْمُشْرِكِينَ ﴿6﴾

(ऐ रसूल) कह दो कि मैं भी बस तुम्हारा ही सा आदमी हूँ (मगर फ़र्क ये है कि) मुझ पर 'वही' आती है कि तुम्हारा माबूद बस (वही) यकता ख़ुदा है तो सीधे उसकी तरफ मुतावज्जे रहो और उसी से बख़शिश की दुआ माँगो, और मुशरेकों पर अफसोस है

ٱلَّذِينَ لَا يُؤْتُونَ ٱلزَّكَوٰةَ وَهُم بِٱلْـَٔاخِرَةِ هُمْ كَـٰفِرُونَ ﴿7﴾

जो ज़कात नहीं देते और आखेरत के भी क़ायल नहीं

إِنَّ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ لَهُمْ أَجْرٌ غَيْرُ مَمْنُونٍۢ ﴿8﴾

बेशक जो लोग ईमान लाए और अच्छे अच्छे काम करते रहे और उनके लिए वह सवाब है जो कभी ख़त्म होने वाला नहीं

بسم الله الرحمن الرحيم सोम 7 जुमादा अल-अव्वल
الاثنين 7 جمادى الأولى
التربيع الأول पहली तिमाही दिन 7.6 / 29.5
रोशनी 52%
7 दिनों में पूर्णिमा
حسبنا الله ونعم الوكيل अल्लाह हमारे लिए काफी है, कितना अच्छा रक्षक है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद