क़ुरआन का रुकू 85 पढ़ें

रुकू 85 सूरह An-Nisa (आयत 172 से 176) से है। इसमें 5 आयतें हैं और यह जुज़ 6 में है।

05 अगस्त 2026 को 16h34 बजे अपडेट किया गया

क़ुरआन में रुकू 85

5
आयतें
1
सूरह
6
जुज़
v.172 – v.176
आयतें

रुकू 85 में सूरह

النساء · जुज़ 6
पृष्ठ 105
रुकू 85
سورة النساء
जुज़ 6 21.8% (24/110)
हिज़्ब 11 43.6% (24/55)

لَّن يَسْتَنكِفَ ٱلْمَسِيحُ أَن يَكُونَ عَبْدًۭا لِّلَّهِ وَلَا ٱلْمَلَـٰٓئِكَةُ ٱلْمُقَرَّبُونَ ۚ وَمَن يَسْتَنكِفْ عَنْ عِبَادَتِهِۦ وَيَسْتَكْبِرْ فَسَيَحْشُرُهُمْ إِلَيْهِ جَمِيعًۭا ﴿١٧٢﴾

न तो मसीह ही ख़ुदा का बन्दा होने से हरगिज़ इन्कार कर सकते हैं और न (ख़ुदा के) मुक़र्रर फ़रिश्ते और (याद रहे) जो शख्स उसके बन्दा होने से इन्कार करेगा और शेख़ी करेगा तो अनक़रीब ही ख़ुदा उन सबको अपनी तरफ़ उठा लेगा (और हर एक को उसके काम की सज़ा देगा)

فَأَمَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ فَيُوَفِّيهِمْ أُجُورَهُمْ وَيَزِيدُهُم مِّن فَضْلِهِۦ ۖ وَأَمَّا ٱلَّذِينَ ٱسْتَنكَفُوا۟ وَٱسْتَكْبَرُوا۟ فَيُعَذِّبُهُمْ عَذَابًا أَلِيمًۭا وَلَا يَجِدُونَ لَهُم مِّن دُونِ ٱللَّهِ وَلِيًّۭا وَلَا نَصِيرًۭا ﴿١٧٣﴾

पस जिन लोगों ने ईमान कुबूल किया है और अच्छे (अच्छे) काम किए हैं उनका उन्हें सवाब पूरा पूरा भर देगा बल्कि अपने फ़ज़ल (व करम) से कुछ और ज्यादा ही देगा और लोग उसका बन्दा होने से इन्कार करते थे और शेख़ी करते थे उन्हें तो दर्दनाक अज़ाब में मुब्तिला करेगा और लुत्फ़ ये है कि वह लोग ख़ुदा के सिवा न अपना सरपरस्त ही पाएंगे और न मददगार

يَـٰٓأَيُّهَا ٱلنَّاسُ قَدْ جَآءَكُم بُرْهَـٰنٌۭ مِّن رَّبِّكُمْ وَأَنزَلْنَآ إِلَيْكُمْ نُورًۭا مُّبِينًۭا ﴿١٧٤﴾

ऐ लोगों इसमें तो शक ही नहीं कि तुम्हारे परवरदिगार की तरफ़ से (दीने हक़ की) दलील आ चुकी और हम तुम्हारे पास एक चमकता हुआ नूर नाज़िल कर चुके हैं

فَأَمَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ بِٱللَّهِ وَٱعْتَصَمُوا۟ بِهِۦ فَسَيُدْخِلُهُمْ فِى رَحْمَةٍۢ مِّنْهُ وَفَضْلٍۢ وَيَهْدِيهِمْ إِلَيْهِ صِرَٰطًۭا مُّسْتَقِيمًۭا ﴿١٧٥﴾

पस जो लोग ख़ुदा पर ईमान लाए और उसी से लगे लिपटे रहे तो ख़ुदा भी उन्हें अनक़रीब ही अपनी रहमत व फ़ज़ल के सादाब बाग़ो में पहुंचा देगा और उन्हे अपने हुज़ूरी का सीधा रास्ता दिखा देगा 175

يَسْتَفْتُونَكَ قُلِ ٱللَّهُ يُفْتِيكُمْ فِى ٱلْكَلَـٰلَةِ ۚ إِنِ ٱمْرُؤٌا۟ هَلَكَ لَيْسَ لَهُۥ وَلَدٌۭ وَلَهُۥٓ أُخْتٌۭ فَلَهَا نِصْفُ مَا تَرَكَ ۚ وَهُوَ يَرِثُهَآ إِن لَّمْ يَكُن لَّهَا وَلَدٌۭ ۚ فَإِن كَانَتَا ٱثْنَتَيْنِ فَلَهُمَا ٱلثُّلُثَانِ مِمَّا تَرَكَ ۚ وَإِن كَانُوٓا۟ إِخْوَةًۭ رِّجَالًۭا وَنِسَآءًۭ فَلِلذَّكَرِ مِثْلُ حَظِّ ٱلْأُنثَيَيْنِ ۗ يُبَيِّنُ ٱللَّهُ لَكُمْ أَن تَضِلُّوا۟ ۗ وَٱللَّهُ بِكُلِّ شَىْءٍ عَلِيمٌۢ ﴿١٧٦﴾

(ऐ रसूल) तुमसे लोग फ़तवा तलब करते हैं तुम कह दो कि कलाला (भाई बहन) के बारे में ख़ुदा तो ख़ुद तुम्हे फ़तवा देता है कि अगर कोई ऐसा शख्स मर जाए कि उसके न कोई लड़का बाला हो (न मॉ बाप) और उसके (सिर्फ) एक बहन हो तो उसका तर्के से आधा होगा (और अगर ये बहन मर जाए) और उसके कोई औलाद न हो (न मॉ बाप) तो उसका वारिस बस यही भाई होगा और अगर दो बहनें (ज्यादा) हों तो उनको (भाई के) तर्के से दो तिहाई मिलेगा और अगर किसी के वारिस भाई बहन दोनों (मिले जुले) हों तो मर्द को औरत के हिस्से का दुगना मिलेगा तुम लोगों के भटकने के ख्याल से ख़ुदा अपने एहकाम वाजेए करके बयान फ़रमाता है और ख़ुदा तो हर चीज़ से वाक़िफ़ है

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