सूरह Nuh पढ़ें

सूरह Nuh (نوح) क़ुरआन की एक मक्की सूरह है जिसमें 28 आयतें हैं। हमारे इंटरैक्टिव उपकरणों से इस सूरह को पढ़ें, सुनें और हिफ़्ज़ करें।

05 अगस्त 2026 को 16h34 बजे अपडेट किया गया

📖 2 मिनट पढ़ने का समय

सूरह Nuh अंकों में

कालानुक्रमिक अवतरण क्रम
अवतरण क्रमांक 71 / 114
(मक्की)
229
शब्द
-68.2% औसत से
1,029
अक्षर
-66.5% औसत से
2
पढ़ने का मिनट
28
आयतें
-48.8% औसत से

मुख्य शब्दों की आवृत्ति

الله 7
رب 5

सबसे अधिक आवृत्त अक्षर

ا
115
#1
ل
106
#2
و
83
#3
م
77
#4
ن
60
#5
نوح · जुज़ 29
सूरह Nuh पढ़ें
سورة المعارج
जुज़ 29 41.3% (178/431)
हिज़्ब 57 86.4% (178/206)

إِنَّآ أَرْسَلْنَا نُوحًا إِلَىٰ قَوْمِهِۦٓ أَنْ أَنذِرْ قَوْمَكَ مِن قَبْلِ أَن يَأْتِيَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌۭ ﴿١﴾

हमने नूह को उसकी क़ौम के पास (पैग़म्बर बनाकर) भेजा कि क़ब्ल उसके कि उनकी क़ौम पर दर्दनाक अज़ाब आए उनको उससे डराओ

قَالَ يَـٰقَوْمِ إِنِّى لَكُمْ نَذِيرٌۭ مُّبِينٌ ﴿٢﴾

तो नूह (अपनी क़ौम से) कहने लगे ऐ मेरी क़ौम मैं तो तुम्हें साफ़ साफ़ डराता (और समझाता) हूँ

أَنِ ٱعْبُدُوا۟ ٱللَّهَ وَٱتَّقُوهُ وَأَطِيعُونِ ﴿٣﴾

कि तुम लोग ख़ुदा की इबादत करो और उसी से डरो और मेरी इताअत करो

يَغْفِرْ لَكُم مِّن ذُنُوبِكُمْ وَيُؤَخِّرْكُمْ إِلَىٰٓ أَجَلٍۢ مُّسَمًّى ۚ إِنَّ أَجَلَ ٱللَّهِ إِذَا جَآءَ لَا يُؤَخَّرُ ۖ لَوْ كُنتُمْ تَعْلَمُونَ ﴿٤﴾

ख़ुदा तुम्हारे गुनाह बख्श देगा और तुम्हें (मौत के) मुक़र्रर वक्त तक बाक़ी रखेगा, बेशक जब ख़ुदा का मुक़र्रर किया हुआ वक्त अा जाता है तो पीछे हटाया नहीं जा सकता अगर तुम समझते होते

قَالَ رَبِّ إِنِّى دَعَوْتُ قَوْمِى لَيْلًۭا وَنَهَارًۭا ﴿٥﴾

(जब लोगों ने न माना तो) अर्ज़ की परवरदिगार मैं अपनी क़ौम को (ईमान की तरफ) बुलाता रहा

فَلَمْ يَزِدْهُمْ دُعَآءِىٓ إِلَّا فِرَارًۭا ﴿٦﴾

लेकिन वह मेरे बुलाने से और ज्यादा गुरेज़ ही करते रहे

وَإِنِّى كُلَّمَا دَعَوْتُهُمْ لِتَغْفِرَ لَهُمْ جَعَلُوٓا۟ أَصَـٰبِعَهُمْ فِىٓ ءَاذَانِهِمْ وَٱسْتَغْشَوْا۟ ثِيَابَهُمْ وَأَصَرُّوا۟ وَٱسْتَكْبَرُوا۟ ٱسْتِكْبَارًۭا ﴿٧﴾

और मैने जब उनको बुलाया कि (ये तौबा करें और) तू उन्हें माफ कर दे तो उन्होने अपने कानों में उंगलियां दे लीं और मुझसे छिपने को कपड़े ओढ़ लिए और अड़ गए और बहुत शिद्दत से अकड़ बैठे

ثُمَّ إِنِّى دَعَوْتُهُمْ جِهَارًۭا ﴿٨﴾

फिर मैंने उनको बिल एलान बुलाया फिर उनको ज़ाहिर ब ज़ाहिर समझाया

ثُمَّ إِنِّىٓ أَعْلَنتُ لَهُمْ وَأَسْرَرْتُ لَهُمْ إِسْرَارًۭا ﴿٩﴾

और उनकी पोशीदा भी फ़हमाईश की कि मैंने उनसे कहा

فَقُلْتُ ٱسْتَغْفِرُوا۟ رَبَّكُمْ إِنَّهُۥ كَانَ غَفَّارًۭا ﴿١٠﴾

अपने परवरदिगार से मग़फेरत की दुआ माँगो बेशक वह बड़ा बख्शने वाला है

يُرْسِلِ ٱلسَّمَآءَ عَلَيْكُم مِّدْرَارًۭا ﴿١١﴾

(और) तुम पर आसमान से मूसलाधार पानी बरसाएगा

وَيُمْدِدْكُم بِأَمْوَٰلٍۢ وَبَنِينَ وَيَجْعَل لَّكُمْ جَنَّـٰتٍۢ وَيَجْعَل لَّكُمْ أَنْهَـٰرًۭا ﴿١٢﴾

और माल और औलाद में तरक्क़ी देगा, और तुम्हारे लिए बाग़ बनाएगा, और तुम्हारे लिए नहरें जारी करेगा

مَّا لَكُمْ لَا تَرْجُونَ لِلَّهِ وَقَارًۭا ﴿١٣﴾

तुम्हें क्या हो गया है कि तुम ख़ुदा की अज़मत का ज़रा भी ख्याल नहीं करते

وَقَدْ خَلَقَكُمْ أَطْوَارًا ﴿١٤﴾

हालॉकि उसी ने तुमको तरह तरह का पैदा किया

أَلَمْ تَرَوْا۟ كَيْفَ خَلَقَ ٱللَّهُ سَبْعَ سَمَـٰوَٰتٍۢ طِبَاقًۭا ﴿١٥﴾

क्या तुमने ग़ौर नहीं किया कि ख़ुदा ने सात आसमान ऊपर तलें क्यों कर बनाए

وَجَعَلَ ٱلْقَمَرَ فِيهِنَّ نُورًۭا وَجَعَلَ ٱلشَّمْسَ سِرَاجًۭا ﴿١٦﴾

और उसी ने उसमें चाँद को नूर बनाया और सूरज को रौशन चिराग़ बना दिया

وَٱللَّهُ أَنۢبَتَكُم مِّنَ ٱلْأَرْضِ نَبَاتًۭا ﴿١٧﴾

और ख़ुदा ही तुमको ज़मीन से पैदा किया

ثُمَّ يُعِيدُكُمْ فِيهَا وَيُخْرِجُكُمْ إِخْرَاجًۭا ﴿١٨﴾

फिर तुमको उसी में दोबारा ले जाएगा और (क़यामत में उसी से) निकाल कर खड़ा करेगा

وَٱللَّهُ جَعَلَ لَكُمُ ٱلْأَرْضَ بِسَاطًۭا ﴿١٩﴾

और ख़ुदा ही ने ज़मीन को तुम्हारे लिए फ़र्श बनाया

لِّتَسْلُكُوا۟ مِنْهَا سُبُلًۭا فِجَاجًۭا ﴿٢٠﴾

ताकि तुम उसके बड़े बड़े कुशादा रास्तों में चलो फिरो

قَالَ نُوحٌۭ رَّبِّ إِنَّهُمْ عَصَوْنِى وَٱتَّبَعُوا۟ مَن لَّمْ يَزِدْهُ مَالُهُۥ وَوَلَدُهُۥٓ إِلَّا خَسَارًۭا ﴿٢١﴾

(फिर) नूह ने अर्ज़ की परवरदिगार इन लोगों ने मेरी नाफ़रमानी की उस शख़्श के ताबेदार बन के जिसने उनके माल और औलाद में नुक़सान के सिवा फ़ायदा न पहुँचाया

وَمَكَرُوا۟ مَكْرًۭا كُبَّارًۭا ﴿٢٢﴾

और उन्होंने (मेरे साथ) बड़ी मक्कारियाँ की

وَقَالُوا۟ لَا تَذَرُنَّ ءَالِهَتَكُمْ وَلَا تَذَرُنَّ وَدًّۭا وَلَا سُوَاعًۭا وَلَا يَغُوثَ وَيَعُوقَ وَنَسْرًۭا ﴿٢٣﴾

और (उलटे) कहने लगे कि आपने माबूदों को हरगिज़ न छोड़ना और न वद को और सुआ को और न यगूस और यऊक़ व नस्र को छोड़ना

وَقَدْ أَضَلُّوا۟ كَثِيرًۭا ۖ وَلَا تَزِدِ ٱلظَّـٰلِمِينَ إِلَّا ضَلَـٰلًۭا ﴿٢٤﴾

और उन्होंने बहुतेरों को गुमराह कर छोड़ा और तू (उन) ज़ालिमों की गुमराही को और बढ़ा दे

مِّمَّا خَطِيٓـَٔـٰتِهِمْ أُغْرِقُوا۟ فَأُدْخِلُوا۟ نَارًۭا فَلَمْ يَجِدُوا۟ لَهُم مِّن دُونِ ٱللَّهِ أَنصَارًۭا ﴿٢٥﴾

(आख़िर) वह अपने गुनाहों की बदौलत (पहले तो) डुबाए गए फिर जहन्नुम में झोंके गए तो उन लोगों ने ख़ुदा के सिवा किसी को अपना मददगार न पाया

وَقَالَ نُوحٌۭ رَّبِّ لَا تَذَرْ عَلَى ٱلْأَرْضِ مِنَ ٱلْكَـٰفِرِينَ دَيَّارًا ﴿٢٦﴾

और नूह ने अर्ज़ की परवरदिगार (इन) काफ़िरों में रूए ज़मीन पर किसी को बसा हुआ न रहने दे

إِنَّكَ إِن تَذَرْهُمْ يُضِلُّوا۟ عِبَادَكَ وَلَا يَلِدُوٓا۟ إِلَّا فَاجِرًۭا كَفَّارًۭا ﴿٢٧﴾

क्योंकि अगर तू उनको छोड़ देगा तो ये (फिर) तेरे बन्दों को गुमराह करेंगे और उनकी औलाद भी गुनाहगार और कट्टी काफिर ही होगी

رَّبِّ ٱغْفِرْ لِى وَلِوَٰلِدَىَّ وَلِمَن دَخَلَ بَيْتِىَ مُؤْمِنًۭا وَلِلْمُؤْمِنِينَ وَٱلْمُؤْمِنَـٰتِ وَلَا تَزِدِ ٱلظَّـٰلِمِينَ إِلَّا تَبَارًۢا ﴿٢٨﴾

परवरदिगार मुझको और मेरे माँ बाप को और जो मोमिन मेरे घर में आए उनको और तमाम ईमानदार मर्दों और मोमिन औरतों को बख्श दे और (इन) ज़ालिमों की बस तबाही को और ज्यादा कर

بسم الله الرحمن الرحيم मंगल 18 रबी अल-अव्वल
الثلاثاء 18 ربيع الأول
أحدب متناقص घटता हुआ कूबड़ दिन 19 / 29.5
रोशनी 81%
10 दिनों में अमावस्या
أستغفر الله मैं अल्लाह से माफी माँगता हूँ