जब तुममें से कोई वज़ू करे और उसके बाद मोज़े पहने, तो उनको पहनकर नमाज़ पढ़े और उनपर मसह करे…
इस्लाम > Hi > हदीस > इबदत पर आधरत फकह > जब तुममें से कोई वज़ू करे और उसके बाद मोज़े पहने, तो उनको पहनकर नमाज़ पढ़े और उनपर मसह करे…
हदीस वर्णनकर्ता: इसे दाराक़ुतनी ने रिवायत किया है
स़ह़ीह़
27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
📖 1 मिनट पढ़ने का समय
हदीस का पाठ: जब तुममें से कोई वज़ू करे और उसके बाद मोज़े पहने, तो उन…
हदीस की व्याख्या: जब तुममें से कोई वज़ू करे और उसके बाद मोज़े पहने, तो उन…
अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- बता रहे हैं कि जब कोई मुसलमान वज़ू करने के बाद मोज़े पहने और उसके बाद वज़ू टूट जाने के कारण दोबारा वज़ू करना चाहे, तो इस बात की अनुमति है कि अगर चाहे तो एक निर्धारित अवधि तक मोज़ों को उतारने के बजाय उनपर मसह कर लिया करे। परन्तु, जुनबी हो जाने की अवस्था में मोज़े उतारकर पैरों को धोना पड़ेगा।
सीख: जब तुममें से कोई वज़ू करे और उसके बाद मोज़े पहने, तो उन…
- मोज़ों पर मसह उसी अवसथा में जायज़ है, जब उनको पूरे तौर पर तहारत प्राप्त करने के बाद पहना जाए।
- मसह की अवधि : ठहरे हुए व्यक्ति के लिए एक दिन एक रात है और यात्री के लिए तीन दिन तीन रात।
- मोज़ों पर मसह केवल छोटी नापाकी को दूर करते समय किया जा सकता है, बड़ी नापाकी को दूर करते समय नहीं। बड़ी नापाकी को दूर करते समय मोज़ों पर मसह करना जायज़ नहीं है। इस अवस्था में मोज़ों को उतारकर क़दमों को धोना पड़ेगा।
- यहूदियों की मुख़ालफ़त के तौर पर जूता और मोज़ा पहनकर नमाज़ पढ़ना मुसतहब है। लेकिन यह उसी अवस्था में है, जब दोनों पाक हों और उनसे नमाज़ियों को कष्ट न होता हो या मस्जिद में गंदगी न फ़ैलती हो। मसलन फ़र्श वाली मस्जिदों में जूता पहनकर नमाज़ नहीं पढ़ी जाएगी।
- मोज़ों पर मसह की अनुमति दरअसल इस उम्मत के लिए आसानी पैदा करने और उसका बोझ हल्का करने का एक रूप है।
श्रेणियाँ :
इबादतों पर आधारित फ़िक़्ह
· तहारत (पवित्रता प्राप्त करना)
· फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह
· मोज़ों आदि पर मसह
بسم الله الرحمن الرحيم
बुध 16 जुमादा अल-अव्वल
الأربعاء 16 جمادى الأولى
أستغفر الله
मैं अल्लाह से माफी माँगता हूँ