इस्लाम > Hi > हदीस > परवर स सबधत फकह > मैं औरतों से मुसाफ़हा नहीं करता। मेरा एक औरत से बात करना एक सौ औरतों से बात करने की तरह है…
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27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
📖 1 मिनट पढ़ने का समयउमैमा बिन्त रुक़ैक़ा बयान करती हैं कि वह कुछ अंसारी औरतों के साथ अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आपसे इस बात पर बैअत करने के लिए पहुँची कि वह किसी को अल्लाह का साझी नहीं बनाएँगी, चोरी नहीं करेंगी, व्यभिचार नहीं करेंगी, कोई ऐसा आरोप नहीं लाएँगी जिसे उन्होंने अपने हाथों एवं पैरों के आगे गढ़ लिया हो और आप की किसी भले काम में अवज्ञा नहीं करेंगी। अतः अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : तुम अपनी शक्ति एवं सामर्थ्य के अनुसार ये कार्य करना। हमने कहा : अल्लाह और उसका रसूल हमपर कहीं अधिक दया करने वाला है। ऐ अल्लाह के रसूल! आइए हम आपसे उसी तरह हाथ मिलाकर बैअत करते हैं, जिस तरह पुरुष किया करते हैं। तो अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : मैं औरतों से मुसाफ़हा नहीं करता। मेरा सौ औरतों से बात करना और बैअत करना एक औरत से बात करने की तरह ही है।
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