क़यामत के दिन मौत को एक चितकबरे मेंढे

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है

स़ह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: क़यामत के दिन मौत को एक चितकबरे मेंढे

عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الخُدْرِيِّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «يُؤْتَى بِالْمَوْتِ كَهَيْئَةِ كَبْشٍ أَمْلَحَ، فَيُنَادِي مُنَادٍ: يَا أَهْلَ الجَنَّةِ، فَيَشْرَئِبُّونَ وَيَنْظُرُونَ، فَيَقُولُ: هَلْ تَعْرِفُونَ هَذَا؟ فَيَقُولُونَ: نَعَمْ، هَذَا المَوْتُ، وَكُلُّهُمْ قَدْ رَآهُ، ثُمَّ يُنَادِي: يَا أَهْلَ النَّارِ، فَيَشْرَئِبُّونَ وَيَنْظُرُونَ، فَيَقُولُ: وهَلْ تَعْرِفُونَ هَذَا؟ فَيَقُولُونَ: نَعَمْ، هَذَا المَوْتُ، وَكُلُّهُمْ قَدْ رَآهُ، فَيُذْبَحُ ثُمَّ يَقُولُ: يَا أَهْلَ الجَنَّةِ خُلُودٌ فَلاَ مَوْتَ، وَيَا أَهْلَ النَّارِ خُلُودٌ فَلاَ مَوْتَ، ثُمَّ قَرَأَ: {وَأَنْذِرْهُمْ يَوْمَ الحَسْرَةِ إِذْ قُضِيَ الأَمْرُ وَهُمْ فِي غَفْلَةٍ} [مريم: 39]، وَهَؤُلاَءِ فِي غَفْلَةٍ أَهْلُ الدُّنْيَا {وَهُمْ لاَ يُؤْمِنُونَ} [مريم: 39]».

हदीस की व्याख्या: क़यामत के दिन मौत को एक चितकबरे मेंढे

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम इस हदीस में बयान कर रहे हैं कि क़यामत के दिन मौत को चितकबरे रंग के मेंढे के रूप में लाया जाएगा। फिर एक आवाज़ लगाने वाला आवाज़ लगाएगा कि ऐ जन्नत में रहने वालो! चुनांचे वे अपनी गर्दनों को लंबा करके और अपने सरों को उठाकर देखेंगे। इसके बाद आवाज़ लगाने वाला उनसे कहेगा कि क्या तुम इसे पहचान रहे हो? लोग उत्तर देंगे कि हाँ हम इसे पहचान रहे हैं। यह मौत है। सब ने उसे देख रखा था। इसलिए पहचान लेंगे। फिर आवाज़ देने वाला आवाज़ देगा कि ऐ जहन्नम में रहने वालो! चुनांचे वे अपनी गर्दनों को लंबा और अपने सरों को उठाकर देखेंगे। पुकारने वाला कहेगा कि क्या तुम इसे पहचान रहे हो? वे उत्तर देंगे कि हाँ, हम इसे पहचान रहे हैं। यह मौत है। दरअसल सबने पहले उसे देख रखा होगा। इसके बाद मौत को ज़बह कर दिया जाएगा। फिर आवाज़ देने वाला आवाज़ देगा : ऐ जन्नत वासियो! अब तुम हमेशा ज़िंदा रहोगे। तुमको मौत नहीं आएगी। ऐ जहन्नम वासियो! अब तुम हमेशा ज़िंदा रहोगे। तुमको मौत नहीं आएगी। यह ऐलान इसलिए किया जाएगा, ताकि ईमान वाले अधिक आनंद ले सकें और ईमान न रखने वालों को कष्ट का अधिक एहसास हो। फिर अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने यह आयत पढ़ी : "और (ऐ नबी!) आप उन्हें पछतावे के दिन से डराएँ, जब हर काम का फैसला कर दिया जाएगा, और वे पूरी तरह से ग़फ़लत में हैं और वे ईमान नहीं लाते।" क़यामत के दिन जन्नतियों एवं जहन्नमियों के बीच निर्णय कर दिया जाएगा और हर एक अपने ठिकाने में चला जाएगा, जहाँ उसे हमेशा रहना है। उस दिन गुनहगार इस बात पर अफ़सोस करेगा कि वह दुनिया से नेकी के काम करके नहीं आया है। इसी तरह कोताही करने वाले को भी अफ़सोस होगा कि अधिक नेकी करके क्यों नहीं आए।

सीख: क़यामत के दिन मौत को एक चितकबरे मेंढे

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اللهم صل على محمد ऐ अल्लाह, मुहम्मद पर दरूद भेज

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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