उसकी क़सम जिसके हाथ में मेरी जान है, यह सूरा एक तिहाई क़ुरान के समान है।
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हदीस वर्णनकर्ता: इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है
स़ह़ीह़
27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
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हदीस का पाठ: उसकी क़सम जिसके हाथ में मेरी जान है, यह सूरा एक तिहाई क…
हदीस की व्याख्या: उसकी क़सम जिसके हाथ में मेरी जान है, यह सूरा एक तिहाई क…
अबू सई ख़ुदरी -रज़ियल्लाहु अनहु- बता रहे हैं कि एक व्यक्ति ने एक अन्य व्यक्ति को देखा कि वह पूरी रात सूरा "क़ुल हुवल्लाहु अहद" पढ़े जा रहा है। इससे आगे कुछ नहीं पढ़ता। सुबह हुई, तो वह अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास पहुँचा और इसके बारे में बताया। गोया सवाल करने वाला इसे थोड़ा समझ रहा था। अतः अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने अपनी बात पर ज़ोर देने के लिए क़सम खाते हुए फ़रमाया : उसकी क़सम जिसके हाथ में मेरी जान है, यह सूरा एक तिहाई क़ुरान के बराबर है।
सीख: उसकी क़सम जिसके हाथ में मेरी जान है, यह सूरा एक तिहाई क…
- सूरा इख़लास की यह फ़ज़ीलत कि यह सूरा एक तिहाई क़ुरान के बराबर है।
- तहज्जुद की नमाज़ में चंद आयतों को बार-बार पढ़ना जायज़ है। इसे कम नहीं समझना चाहिए।
- माज़िरी कहते हैं : किसी ने कहा है : इस हदीस का अर्थ यह है कि क़ुरआन के अंदर तीन प्रकार के विषय-वस्तु बयान हुए हैं। क़िस्से, आदेश-निर्देश तथा उच्च एवं महान अल्लाह के गुण। चूँकि सूरा इख़लास में अल्लाह के गुण बयान हुए हैं, इसलिए यह एक तिहाई क़ुरआन है। जबकि किसी ने कहा है : इसका अर्थ है : इसे पढ़ने का सवाब बढ़ाकर एक तिहाई क़ुरआन पढ़ने के सवाब के बराबर कर दिया जाएगा।
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मंगल 15 जुमादा अल-अव्वल
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