जो अज़ान सुने लेकिन नमाज़ पढ़ने के लिए (मस्जिद) न आए, उसकी नमाज़ नहीं, सिवाय तब जब कि उसके…

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है ।

सह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: जो अज़ान सुने लेकिन नमाज़ पढ़ने के लिए (मस्जिद) न आए, उ…

عن ابن عباس رضي الله عنهما عن النبي صلى الله عليه وسلم قال: «من سمِع النِّدَاء فلم يَأتِه؛ فلا صلاة له إلا من عُذْر».

हदीस की व्याख्या: जो अज़ान सुने लेकिन नमाज़ पढ़ने के लिए (मस्जिद) न आए, उ…

यह हदीस जमात के साथ नमाज़ पढ़ने पर तवज्जो देने और उसका अत्यधिक ख़याल रखने का आह्वान करती है। इसमें अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने बताया है कि जो व्यक्ति ऐसी जगह पर हो, जहाँ उसे जमात के साथ नमाज़ की अज़ान सुनाई देती हो, तो उसपर जमात में शरीक होना ज़रूरी है। अगर वह जमात में शरीक नहीं होता, तो उसकी नमाज़ अधूरी है और उसका सवाब घट जाएगा। उसे नमाज़ पढ़ने वाला तो माना जाएगा, लेकिन बिना किसी उचित कारण के जमात में सम्मिलित न होने का गुनाह भी होगा। अल्बत्ता यदि कोई उचित कारण, जैसे बीमारी, वर्षा अथवा जान, माल या संतान आदि के भय की वजह से जमात में शरीक न हो, तो उसे कोई गुनाह नहीं होगा।

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حسبنا الله ونعم الوكيل अल्लाह हमारे लिए काफी है, कितना अच्छा रक्षक है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद