जो स्त्री अल्लाह और आख़िरत के दिन पर ईमान रखती है, उसके लिए उचित नहीं है कि किसी मृत व्यक्…

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।

सह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: जो स्त्री अल्लाह और आख़िरत के दिन पर ईमान रखती है, उसके…

عن زينب بنت أبي سلمة قالت: تُوُفِّيَ حَمِيْمٌ لأم حبيبة، فدعت بصُفْرَةٍ، فَمَسحَتْ بذراعيها، فقالت: إنما أصنع هذا؛ لأني سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول: «لا يحل لامرأة تؤمن بالله واليوم الآخر أن تُحِدَّ على ميت فوق ثلاث، إلا على زوج: أربعة أشهر وعشرًا».

हदीस की व्याख्या: जो स्त्री अल्लाह और आख़िरत के दिन पर ईमान रखती है, उसके…

उम्मे हबीबा (रज़ियल्लाहु अंहा) के पिता की मृत्यु हुई और उन्होंने सुन रखा था कि पति के सिवा किसी की मौत पर तीन दिन से अधिक सोग मनाना जायज़ नहीं है, इसलिए उन्होंने इसका पालन करके दिखाने का इरादा किया। चुनांचे ज़रदी मिली हुइ खुशबू मँगवाकर हाथों से मल लिया और इसका कारण यह बताया कि उऩ्होंने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को फ़रमाते हुए सुना हैः जो स्त्री अल्लाह और क़यामत के दिन पर ईमान रखती हो, उसके लिए हलाल नहीं है कि किसी मृत पर तीन दिन से अधिक सोग मनाए, सिवाय पति के कि उसपर चार माह दस दिन सोग मनाएगी।

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بسم الله الرحمن الرحيم बुध 16 जुमादा अल-अव्वल
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لا إله إلا الله अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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