हमारे और अह्ले किताब के रोज़ों में अंतर, सहरी खाना है।

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।

सह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: हमारे और अह्ले किताब के रोज़ों में अंतर, सहरी खाना है।

عن عمرو بن العاص رضي الله عنه أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال: «فَصْلُ مَا بَيْنَ صِيَامِنَا وصِيَامِ أهْلِ الكِتَابِ، أكْلَةُ السَّحَرِ».

हदीस की व्याख्या: हमारे और अह्ले किताब के रोज़ों में अंतर, सहरी खाना है।

इस हदीस में अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने हमारे और यहूदियों एवं ईसाइयों के रोज़ों का एक स्पष्ट अंतर बताया है। यह अंतर है वह खाना, जो मुसलमान सहरी के समय खाते हैं। क्योंकि अह्ल-ए-किताब सहरी नहीं करते और मुसलमानों के लिए अह्ल-ए-किताब की मुख़ालफ़त और सुन्नत के अनुपालन में सहरी करना मुसतहब है। इसमें बरकत एवं भलाई भी है, जैसा कि सुन्नत से साबित है। अह्ल-ए-किताब रोज़े का आरंभ आधी रात से करते हैं। वे आधी रात से पहले खा लेते हैं और सहरी के समय कुछ नहीं खाते। ज्ञात हो कि मुसलमानों एवं काफ़िरों के बीच अंतर शरीयत में एक वांछित वस्तु है।

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لا حول ولا قوة إلا بالله अल्लाह के बिना कोई शक्ति और सामर्थ्य नहीं

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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