मैं अपने पिता के साथ अबू बरज़ा असलमी के पास गया। मेरे पिता ने उनसे पूछा कि नबी -सल्लल्लाहु…

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।

सह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: मैं अपने पिता के साथ अबू बरज़ा असलमी के पास गया। मेरे प…

عن أبي المنهال سيار بن سلامة قال: (دَخَلتُ أنا وأبي علَى أبي بَرزَة الأسلمي، فقال له أبي: كيف كان النبي صلى الله عليه وسلم يصلي المَكْتُوبَة؟ فقال: كان يُصَلِّي الهَجِير -التي تدعونها الأولى- حِينَ تَدحَضُ الشَّمسُ. ويُصَلِّي العَصرَ ثم يَرجِعُ أَحَدُنَا إلى رَحلِه في أَقصَى المدينة والشَّمسُ حَيَّة، ونَسِيتُ ما قال في المَغرب. وكان يَسْتَحِبُّ أن يُؤَخِّر من العِشَاء التي تَدعُونَها العَتَمَة، وكان يَكرَه النَّوم قَبلَهَا، والحديث بَعدَها. وكان يَنْفَتِلُ من صَلَاة الغَدَاة حِين يَعرِفُ الرَّجُل جَلِيسَه، وكان يَقرَأ بِالسِتِّين إلى المائة).

हदीस की व्याख्या: मैं अपने पिता के साथ अबू बरज़ा असलमी के पास गया। मेरे प…

अबू बरज़ा (रज़ियल्लाहु अंहु) फ़र्ज़ नमाज़ों के समय का विवरण प्रस्तुत करते हुए कहते हैं कि आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ज़ोहर की नमाज़ सूर्य के बीच आकाश से ढलने के पश्चात पढ़ते थे और यही उसका पहला वक़्त है।

अस्र की नमाज़ ऐसे समय पढ़ते कि एक नमाज़ी नमाज़ पढ़कर मदीने के अंतिम छोर पर स्थित अपना घर वापस चला जाता और सूरज चमकदार ही रहता। यह भी इस नमाज़ का प्रथस समय है।

रही बात मग़रिब की, तो इसके बारे में उन्होंने क्या कुछ कहा था, वर्णनकर्ता को याद नहीं रहा। परन्तु अन्य हदीसों और उलेमा के इजमा से यह प्रमाणित है कि इसका समय सूर्यास्त से शुरू होता है।

आप इशा की नमाज़ देर से पढ़ना उत्तम जानते थे। क्योंकि उसका सबसे अच्छा समय यह है कि उसे उसके उपयुक्त समय के अंत में पढ़ा जाए। आप इशा से पहले सोना पसंद नहीं करते थे, ताकि वह उपयुक्त समय से दर न हो जाए या उसकी जमात छूट न जाए या फिर इतनी गहरी नींद न आ जाए कि रात की नमाज़ छूट जाए। इसी तरह आप इशा की नमाज़ के बाद बात करना बुरा जानते थे कि कहीं ऐसा न हो कि ससमय फ़ज्र की नमाज़ न पढ़ सकें या जमात छूट जाए तथा फ़ज्र की नमाज़ पढ़कर उस समय निकलते, जब आदमी अपने पास बैठे हुए व्यक्ति को पहचान लेता, जबकि आप उसमें साठ से सौ आयतें पढ़ते थे, जो इस बात का प्रमाण है कि आप फ़ज्र की नमाज़ अंधेरे में पढ़ते थे।

श्रेणियाँ : इबादतों पर आधारित फ़िक़्ह · नमाज़ · फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह · नमाज़ की शर्तें

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الثلاثاء 15 جمادى الأولى
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13 दिनों में अमावस्या
سبحان الله وبحمده अल्लाह की महिमा और स्तुति है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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