सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह ने मक्का से हाथी वालों को रोक दिया था और उसने अपने रसूल तथा म…

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।

सह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह ने मक्का से हाथी वालों को…

عن أبي هُريرة رضي الله عنه قال: «لَمَّا فَتَحَ الله -تَعَالَى- عَلَى رَسُولِهِ مَكَّةَ قَتَلَتْ خزاعةُ رَجُلاً مِنْ بَنِي لَيْثٍ بِقَتِيلٍ كَانَ لَهُمْ فِي الْجَاهِلِيَّةِ، فَقَامَ النبي صلى الله عليه وسلم فَقَالَ: إنَّ الله عَزَّ وَجَلَّ قَدْ حَبَسَ عَنْ مَكَّةَ الْفِيلَ، وَسَلَّطَ عَلَيْهَا رَسُولَهُ وَالْمُؤْمِنِينَ، وَإِنَّهَا لَمْ تَحِلَّ لأَحَدٍ كَانَ قَبْلِي، وَلا تَحِلُّ لأَحَدٍ بَعْدِي، وَإِنَّمَا أُحِلَّتْ لِي سَاعَةً مِنْ نَهَارٍ، وَإِنَّهَا سَاعَتِي هَذِهِ: حَرَامٌ، لا يُعْضَدُ شَجَرُهَا، وَلا يُخْتَلَى خَلاهَا، وَلا يُعْضَدُ شَوْكُهَا، وَلا تُلْتَقَطُ سَاقِطَتُهَا إلاَّ لِمُنْشِدٍ، وَمَنْ قُتِلَ لَهُ قَتِيلٌ: فَهُوَ بِخَيْرِ النَّظَرَيْنِ: إمَّا أَنْ يَقْتُلَ، وَإِمَّا أَنْ يُودِيَ، فَقَامَ رَجُلٌ مِنْ أَهْلِ الْيَمَنِ- يُقَالُ لَهُ: أَبُو شَاهٍ فَقَالَ: يَا رَسُولَ الله، اُكْتُبُوا لِي فَقَالَ رَسُولُ الله: اُكْتُبُوا لأَبِي شَاهٍ، ثُمَّ قَامَ الْعَبَّاسُ فَقَالَ: يَا رَسُولَ الله، إلاَّ الإذْخِرَ، فَإِنَّا نَجْعَلُهُ فِي بُيُوتِنَا وَقُبُورِنَا، فَقَالَ رَسُولُ الله: إلاَّ الإِذْخِرَ».

हदीस की व्याख्या: सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह ने मक्का से हाथी वालों को…

अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अंहु) बता रहे हैं कि जब मक्का पर विजय प्राप्त हुई, तो ख़ुज़ाआ क़बीले के एक व्यक्ति ने हुज़ैल क़बीले के एक व्यक्ति का, अपने एक व्यक्ति के बदले में, जो जाहिलियत काल में मारा गया था, वध कर दिया। यह देख नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) खड़े हुए और ख़ुतबे में वह सारी बातें कहीं, जिनका ज़िक्र हदीस में है। चुनांचे मक्का की हुरमत बयान की और यह बताया कि अल्लाह ने उससे हाथी वालों को रोक दिया था और अपने नबी के लिए दिन के कुछ समय के लिए हलाल किया था। विदित हो कि इस हदीस में उल्लिखित शब्द '‎الساعة' से आशय उसका आम अर्थ यानी एक घंटा नहीं, बल्कि उससे आशय विजय दिवस का कुछ भाग है। क्योंकि उस दिन सुबह से अस्र तक आपके लिए युद्ध करना हलाल किया गया था। आपने यह भी बताया कि उसके बाद फिर उसकी हुरमत लौट आई। साथ ही यह भी बताया कि उसके काँटे को काटा नहीं जा सकता, उसके पेड़ को नहीं काटा जा सकता और इज़खिर के सिवा हरम की सीमाओं के अंदर उगने वाली किसी घास को काटा नहीं जा सकता और वहाँ पड़े हुए किसी सामान को उठाया नहीं जा सकता। यह और बात है कि कोई एलान करने के लिए उठाए।

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निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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