यदि मेरी उम्मत पर कठिन न होता, तो मैं उन्हें आदेश देता कि प्रत्येक वज़ू के समय मिसवाक कर ल…

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे नसाई ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है। - इसे मालिक ने रिवायत किया है।

सह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: यदि मेरी उम्मत पर कठिन न होता, तो मैं उन्हें आदेश देता…

عن أبي هريرة رضي الله عنه أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال: «لَوْلا أنْ أَشُقِّ على أُمَّتِي لَأَمَرْتُهم بالسِّواكِ مع كلِّ وُضُوء».

हदीस की व्याख्या: यदि मेरी उम्मत पर कठिन न होता, तो मैं उन्हें आदेश देता…

इस हदीस में अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने बताया है कि यदि आपको इस बात का भय न होता कि आपकी उम्मत एवं अनुसरणकार्यों को कष्ट एवं परेशानी का सामना पड़ेगा, तो उन्हें हर वज़ू के समय आवश्यक रूप से मिस्वाक करने का आदेश देते। आपने अपनी उम्मत पर दया करते हुए उनपर इसे फ़र्ज़ क़रार नहीं दिया, बल्कि सुन्नत रखा, जिसका पालन करने वाले को पुण्य मिलता है और छोड़ने वाले को दंड नहीं दी जाती है।

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أستغفر الله मैं अल्लाह से माफी माँगता हूँ

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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