किसी भी नेकी के काम को कदापि कमतर न जानो, चाहे इतना ही क्यों न हो कि तुम अपने भाई से मुस्क…
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हदीस वर्णनकर्ता: इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
स़ह़ीह़
27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
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हदीस का पाठ: किसी भी नेकी के काम को कदापि कमतर न जानो, चाहे इतना ही…
عن أبي ذر رضي الله عنه قال: قال لي النبي صلى الله عليه وسلم: «لَا تَحْقِرَنَّ مِنَ الْمَعْرُوفِ شَيْئًا، وَلَوْ أَنْ تَلْقَى أَخَاكَ بِوَجْهٍ طَلْقٍ».
हदीस की व्याख्या: किसी भी नेकी के काम को कदापि कमतर न जानो, चाहे इतना ही…
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने नेकी के काम के प्रति उत्साह जगाने के साथ-साथ इस बात की प्रेरणा दी है कि नेकी के किसी छोट-से छोटे काम को भी हेय दृष्टि से न देखा जाए। इसका एक उदाहरण यह है कि मिलते समय मुस्कुरा कर मिला जाए। अतः हर मुसलमान को इसपर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि इससे प्रेम-भाव पैदा होता है।
सीख: किसी भी नेकी के काम को कदापि कमतर न जानो, चाहे इतना ही…
- मुसलमानों के बीच परस्पर प्रेम और मिलते समय मुस्कुरा कर मिलने की फ़ज़ीलत।
- इस्लामी शरीयत एक संपूर्ण तथा व्यापक शरीयत है। इसके अंदर हर वह बात मौजूद है, जो मुसलमानों और उनकी एकजुटता के लिए उत्तम है।
- नेकी का काम करने की प्रेरणा, चाहे काम छोटा ही क्यों न हो।
- मुसलमानों के दिल में खुशी डालना मुसतहब (वांछित) है। क्योंकि इससे आपसी प्रेम का माहौल बनता है।
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मंगल 15 जुमादा अल-अव्वल
الثلاثاء 15 جمادى الأولى
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अल्लाह हमारे लिए काफी है, कितना अच्छा रक्षक है