सुन्नत से संबंधित साधारण विषय पर हदीसें

इस्लाम > Hi > हदीस > सुन्नत से संबंधित साधारण विषय

«सुन्नत से संबंधित साधारण विषय» पर 10 समझाई गई नबवी हदीसें: अरबी पाठ, अनुवाद, व्याख्या और सीख, प्रामाणिकता की डिग्री और स्रोतों के साथ।

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

सुन्नत से संबंधित साधारण विषय पर हदीसों की सूची

सह़ीह़ मेरी बातों को न लिखो और जिसने मुझसे क़ुरआन के सिवा कुछ लिखा है, वह उसे मिटा दे और मेरी ओर से बयान करो तथा इसमें कोई हर्ज नहीं है। और जिसने मुझपर जान-ब सह़ीह़ सबसे बड़ी झूठी बातों में से यह है कि आदमी अपने पिता के अलावा किसी और से संबंध जोड़े या अपनी आँख को वह दिखाए जो उसने देखा न हो या अल्लाह के रसूल- सल्लल स़ह़ीह़ मेरी ओर से मिली वाणी दूसरों तक पहुँचा दो, चाहे एक आयत ही हो, तथा इसराईली वंश के लोगों की घटनाओं का वर्णन करो, इसमें कोई हर्ज नहीं है, तथा जिसने मुझपर स़ह़ीह़ सुन लो, वह समय आने ही वाला है कि एक व्यक्ति के पास मेरी हदीस पहुँचेगी और वह अपने बिस्तर पर टेक लगाकर बैठा होगा। हदीस सुनने के बाद वह कहेगा : हमारे और स़ह़ीह़ जिसने जान-बूझकर मुझपर झूठ बोला, वह अपना ठिकाना जहन्नम बना ले। स़ह़ीह़ तुम अल्लाह से डरते रहना और अपने शासकों के आदेश सुनना तथा मानना। चाहे शासक एक हबशी ग़ुलाम ही क्यों न हो। तुम मेरे बाद बहुत ज़्यादा मतभेद देखोगे। अतः तु स़ह़ीह़ मेरी उम्मत के आख़िर में ऐसे लोग पैदा हो जाएँगे, जो ऐसी बातें बताएँगे, जो न तुमने सुनी होगी और न तुम्हारे बाप-दादाओं ने सुनी होगी। अतः तुम उनसे बचकर एव स़ह़ीह़ तुम लिखा करो। उस हस्ती की क़सम, जिसके हाथ में मेरी जान है, इस (मुंह) से केवल सत्य ही निकलता है। स़ह़ीह़ मैं तुम्हें अल्लाह से डरने तथा (अपने शासनकर्ता की) बात सुनने और मानने की वसीयत करता हूँ, चाहे तुम्हारा शासक एक दास ही क्यों न हो। क्योंकि तुममें से जो स़ह़ीह़ जो व्यक्ति मेरे हवाले से कोई बात बताए और उसे लगता हो कि वह झूठ है, तो वह झूठों में से एक है।
بسم الله الرحمن الرحيم मंगल 15 जुमादा अल-अव्वल
الثلاثاء 15 جمادى الأولى
بدر पूर्णिमा दिन 16.5 / 29.5
रोशनी 97%
13 दिनों में अमावस्या
أستغفر الله मैं अल्लाह से माफी माँगता हूँ

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद