इस्लाम > Hi > हदीस > अकद > तुम्हारी आग जहन्नम की आग के सत्तर भागों में से एक भाग है
स़ह़ीह़27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
📖 1 मिनट पढ़ने का समयعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ: «نَارُكُمْ جُزْءٌ مِنْ سَبْعِينَ جُزْءًا مِنْ نَارِ جَهَنَّمَ»، قِيلَ: يَا رَسُولَ اللَّهِ، إِنْ كَانَتْ لَكَافِيَةً. قَالَ: «فُضِّلَتْ عَلَيْهِنَّ بِتِسْعَةٍ وَسِتِّينَ جُزْءًا كُلُّهُنَّ مِثْلُ حَرِّهَا».
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि दुनिया की आग जहन्नम की आग के सत्तर भाग में से एक भाग है। चुनांचे आख़िरत की आग की गर्नी दुनिया की आग की गर्मी से उनहत्तर भाग अधिक होगी। उसके हर भाग की गर्मी दुनिया की आग के बराबर होगी। किसी ने कहा कि ऐ अल्लाह के रसूल! दुनिया की आग ही तो जहन्नम जाने वालों को यातना देने के लिए पर्याप्त थी। तो आपने कहा : जहन्नम की आग को दुनिया की आग से उनहत्तर गुना अधिक गर्म बनाया है।
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