इद्दत पर हदीसें

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«इद्दत» पर 14 समझाई गई नबवी हदीसें: अरबी पाठ, अनुवाद, व्याख्या और सीख, प्रामाणिकता की डिग्री और स्रोतों के साथ।

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

इद्दत पर हदीसों की सूची

सह़ीह़ नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के युग में साबित बिन क़ैस (रज़ियल्लाहु अंहु) की पत्नी ने उनसे ख़ुला ले लिया, तो आपने ने उन्हें एक माहवारी तक इद्दत में सह़ीह़ बरीरा (रज़ियल्लाहु अंहा) को आदेश दिया गया था कि तीन माहवारी तक इद्दत गुज़ारें। सह़ीह़ तुम अपने बाग के खजूर अवश्य तोड़ो। हो सकता है कि तुम सदक़ा करो या कोई और भलाई का कार्य करो। सह़ीह़ "तुम इद्दत पूरी होने तक अपने उसी घर में रहो।" उनका कहना है कि फिर मैंने वहीं इद्दत के चार महीने दस दिन गुज़ारे। सह़ीह़ फ़ातिमा बिंत क़ैस (रज़ियल्लाहु अंहा) का यह कहना कि ऐ अल्लाह के रसूल, मेरे पति ने मुझे तीन तलाक़ दे दिए हैं और मुझे भय है कि कोई मेरे यहाँ ज़बरदस्ती घु सह़ीह़ तुम लोग हमें अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की सुन्नत के बारे में संदेह में न डालो। उम्मे वलद (वह दासी जो अपने मालिक की संतान की माँ बन जाए सह़ीह़ नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की पत्नी आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) ने हफ़सा बिंत अब्दुर्रहमान बिन अबू बक्र सिद्दीक़ (रज़ियल्लाहु अंहा) को, जब उनकी तीसरी सह़ीह़ दास आज़ाद स्त्री को दो तलाक़ देगा और वह तीन माहवारी इद्दत गु़ज़ारेगी, जबकि आज़ाद व्यक्ति दासी को दो तलाक़ देगा और वह आम दासियों की तरह दो माहवारी इद्द मुझे अल्लामा अलबानी का कोई हुक्म नहीं मिला। जिस स्त्री का पति गुम हो जाए और पता न चल सके कि वह कहाँ है? वह चार साल प्रतीक्षा करे और फिर चार महीना दस दिन इद्दत गुज़ारे। अब उसके लिए कहीं और निकाह सह़ीह़ किसी गर्भवती से संभोग न किया जाए जब तक प्रसव न हो जाए और न किसी बिना गर्भ वाली से संभोग किया जाए जब तक उसे एक माहवारी न आ जाए। सह़ीह़ जब किसी महिला का पति मृत्यु को प्राप्त हो जाता तो महिला छोटे से घर में बहुत ही खराब वस्त्र पहन कर रहती, न खुश्बू लगाती न कुछ और, यहाँ तक कि एक साल बीत सह़ीह़ इद्दत के बारे में सुबैआ असलमी की हदीस। सह़ीह़ कोई स्त्री मृतक पर तीन दिनों से अधिक सोग नहीं मनाएगी। हाँ, अपने पति पर चार महीने दस दिन सोग मनाएगी। वह असब नामी यमनी वस्त्र छोड़कर कोई रंगा हुआ कपड़ा सह़ीह़ जो स्त्री अल्लाह और आख़िरत के दिन पर ईमान रखती है, उसके लिए उचित नहीं है कि किसी मृत व्यक्ति पर तीन दिन से अधिक सोग मनाए, सिवाए पति के; उसपर चार माह द
بسم الله الرحمن الرحيم मंगल 15 जुमादा अल-अव्वल
الثلاثاء 15 جمادى الأولى
بدر पूर्णिमा दिन 16.5 / 29.5
रोशनी 96%
13 दिनों में अमावस्या
حسبنا الله ونعم الوكيل अल्लाह हमारे लिए काफी है, कितना अच्छा रक्षक है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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