नफ़ल नमाज़ पर हदीसें

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«नफ़ल नमाज़» पर 60 समझाई गई नबवी हदीसें: अरबी पाठ, अनुवाद, व्याख्या और सीख, प्रामाणिकता की डिग्री और स्रोतों के साथ।

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

नफ़ल नमाज़ पर हदीसों की सूची

सह़ीह़ मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को नमाज़ पढ़ते समय देखा कि आपके सीने से रोने के कारण चक्की के चलने की तरह आवाज़ निकल रही है। आपपर अल्ल सह़ीह़ एक रात नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने सारी रात एक आयत को ही निरंतर पढ़ते हुए क़्याम किया। सह़ीह़ नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- फ़ज्र प्रकट होने के बाद दो हल्की रकातें पढ़ा करते थे। स़ह़ीह़ अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ज़ुहर से पहले की चार रकातें और फ़ज्र से पहले की दो रकातें नहीं छोड़ते थे। स़ह़ीह़ जिसने ज़ुहर से पहले और ज़ुहर के बाद चार-चार रकातें पाबंदी से पढ़ीं, अल्लाह उसपर जहन्नम की आग हराम कर देगा। ह़सन अल्लाह उस आदमी पर रहम करे, जिसने अस्र से पहले चार रकात पढ़ी। सह़ीह़ मग़रिब से पहले दो रकात पढ़ो। सह़ीह़ जब मुअज़्ज़िन फ़ज्र की नमाज़ की अज़ान देकर ख़ामोश हो जाता, तो अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- खड़े होते और फ़ज्र की नमाज़ से पहले हल्की-हल्क सह़ीह़ जब तुम में से कोई सुबह (फ़ज्र) से पहले दो रकातें पढ़े, तो दाईं करवट पर लेट जाए। स़ह़ीह़ एक व्यक्ति ने नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से, जब आप मिंबर पर थे, पूछा : रात की नमाज़ के बारे में आप क्या कहते हैं? आपने फरमाया : "दो-दो रकात पढ़ा करो सह़ीह़ रात और दिन की नमाज़ दो-दो रकात है। सह़ीह़ रमज़ान के बाद सबसे श्रेष्ठ रोज़े अल्लाह के महीने मुहर्रम के रोज़े हैं तथा फ़र्ज़ नमाज़ों के बाद सबसे उत्तम नमाज़ रात की नमाज़ है। सह़ीह़ वित्र हक़ है।अब, जो चाहे सात रकात के साथ वित्र बनाये, जो चाहे पाँच रकात रकात के साथ वित्र बनाये, जो चाहे तीन रकात के साथ वित्र बनाये और जो चाहे एक रका सह़ीह़ वित्र फ़र्ज़ नमाज़ों की तरह अनिवार्य नहीं है। लेकिन, यह सुन्नत है। इसे अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने सुन्नत क़रार दिया है। ह़सन अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने हमें रमज़ान में आठ रकात तथा वित्र पढ़ाई। फिर अगली रात हम मस्जिद में जमा हुए और उम्मीद की कि आप हमारी ओर न सह़ीह़ सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह ने तुम्हें एक अतिरिक्त नमाज़ प्रदान की है। उसे तुम इशा नमाज़ और फ़ज्र की नमाज़ के बीच में पढ़ो। वह नमाज़ वित्र है। वह नमा सह़ीह़ ऐ आइशा ! मेरी आंखें तो सो जाती हैं मगर मेरा दिल नहीं सोता। सह़ीह़ नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम रात को तेरह रकअत नमाज़ पढ़ते थे, उन्हीं में वित्र और फज्र की दो रकअतें (सुन्नत) भी शामिल होती थीं। सह़ीह़ ऐ अब्दुल्लाह ! फलाँ आदमी की तरह न हो जाना कि वह रात को उठा करता था, फिर उसने रात में क़याम करना छोड़ दिया । सह़ीह़ ऐ क़ुरआन वालो ! वित्र पढ़ा करो, निश्चित ही अल्लाह वित्र (विषम) है तथा वित्र को पसंद करता है। सह़ीह़ एक रात में दो वित्र नहीं हैं। सह़ीह़ सुबह होने से पहले वित्र की नमाज़ पढ़ लो। सह़ीह़ जिसने सुबह होने से पहले वित्र नहीं पढ़ी तथा सुबह हो गई, तो उसके लिए वित्र नहीं। सह़ीह़ जो सोया रह जाए और वित्र न पढ़ सके, अथवा भूल जाए, तो उसे चाहिए कि जब याद आए तब पढ़ ले। सह़ीह़ जिसको यह डर हो कि वह रात के अंतिम भाग में नहीं उठ पाएगा तो उसे चाहिए कि प्रथम भाग में ही वित्र पढ़ ले, और जिसे गुमान हो कि वह अंतिम भाग में उठ जाएगा उ सह़ीह़ अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- चाश्त की नमाज़ चार रकअत पढ़ा करते थे, और जितना अल्लाह चाहता उतना उसमें ज्यादा करते। सह़ीह़ क्या नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- चाश्त की नमाज़ पढ़ा करते थे? उन्होंने कहा : नहीं, सिवाय तब जब आप किसी यात्रा से लौट कर आते। सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को कोई अमल पसंद होता, इसके बावजूद उसे इस डर से छोड़ देते कि कहीं लोग उसपर अमल करने लगें और उनपर फ़र्ज़ कर दि सह़ीह़ अव्वाबीन (नेक लोगों) की नमाज़ उस समय होती है जब ऊँट के बच्चों के पाँव जलने लगें। सह़ीह़ ऐ लोगो ! अपने घरों में नमाज़ पढ़ा करो, क्योंकि मनुष्य की सर्श्रेष्ठ नमाज़ उस के घर में होती है, सिवाय फर्ज़ नमाज़ों के। सह़ीह़ "ऐ अल्लाह! मेरे दिल में नूर रख दे, मेरी आँख में नूर रख दे, मेरे कान में नूर रख दे, मेरे दाएँ नूर रख दे, मेरे बाएँ नूर रख दे, मेरे ऊपर नूर रख दे, मेरे सह़ीह़ मैंने देखा कि आप क़िबले के अतिरिक्त किसी और दिशा की ओर मुँह करके नमाज़ पढ़ रहे हैं? तो उन्होंने जवाब दियाः यदि मैंने रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) क स़ह़ीह़ मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से दस रकात सीखी हैं सह़ीह़ अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- अपनी सवारी की पीठ पर नफ़ल नमाज़ पढ़ लिया करते थे, चाहे आपका मुँह जिधर भी होता। आप अपने सिर से इशारा करते थे। स़ह़ीह़ अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- हमें सभी कामों के लिए उसी प्रकार इस्तिख़ारा सिखाते थे, जिस प्रकार हमें क़ुरआन की सूरा सिखाते थे। सह़ीह़ नबी (सल्लाल्लाहु अलैहि वसल्लम) किसी नफ़ल नमाज़ की उतनी पाबंदी नहीं करते थे, जितनी फ़ज्र की दो रकातों की करते थे। सह़ीह़ मैंने अपनी खाला मैमूना के पास रात बिताई। अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) रात की नमाज़ के लिए खड़े हुए तो मैं आपकी बाएँ ओर खड़ा हो गया। ऐसे में सह़ीह़ ऐ आइशा! उठो और वित्र पढ़ो। सह़ीह़ सुबह से पहले वित्र पढ़ने में जल्दी करो सह़ीह़ जब तुममें से कोई रात को नमाज़ पढ़ने के लिए उठे और उसकी ज़बान पर क़ुरआन ठीक से न आ रहा हो और उसे पता न चल रहा हो कि क्या कुछ पढ़ रहा है, तो सो जाए सह़ीह़ हम अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के लिए मिसवाक और वुज़ू का पानी तैयार रखते थे। फिर अल्लाह जितनी रात को चाहता आपको जगाता। तो आप उठते, वज़ू स़ह़ीह़ जो ईमान के साथ और नेकी की आशा मन में लिए हुए, लैलतुल क़द्र (सम्मानित रात्रि) में कयाम करता है, उसके पिछले सारे गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं। सह़ीह़ अब्दुल्लाह अच्छा आदमी है अगर वह रात को नमाज़ पढ़ता। सह़ीह़ अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) रात के प्रथम भाग में सोते और अंतिम भाग में उठकर नमाज़ पढ़ते थे। सह़ीह़ जब किसी बीमारी आदि के कारण, अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की रात की नमाज़ छूट जाती तो दिन में बारह रकअत पढ़ लेते थे। सह़ीह़ अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) रात में इतनी देर तक नमाज़ में खड़े रहते कि आपके दोनों पाँव सूज जाते थे। सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) रात के हर भाग में वित्र पढ़ते थे। शुरू में भी, बीच में भी और अंत में भी। आपके वित्र पढ़ने अंतिम समय सहर तक ह सह़ीह़ नबी (सल्लल्लाहु अलैहे व सल्लम), अबू बक्र एवं उमर (रज़ियल्लाहु अंहुमा) दोनों की ईद की नमाज़ें ख़तबे से पहले पढ़ते थे। सह़ीह़ जो व्यक्ति अपनी रात की पूरी नमाज़ या उसका कुछ भाग पढ़े बिना सो जाए, फिर प्रातः उठकर फज्र तथा ज़ुहर के बीच पढ़ ले, उसे ऐसा लिखा जाएगा, जैसे उसने उसे रा स़ह़ीह़ हे लोगों, सलाम फैलाओ (प्रचारित करो), लोगों को खाना खिलाओ, रिश्तेदारियों को जोड़ो, रात्रि में जब लोग सो रहे होते हैं, तो उठ कर नमाज़ पढ़ो, (ऐसा करने पर सह़ीह़ जब तुममें से किसी को नमाज़ पढ़ने की दशा में नींद आए, तो सो जाए, यहाँ तक नींद खत्म हो जाए। सह़ीह़ जब तक चुस्ती बाक़ी रहे, नमाज़ पढ़ो और चुस्ती खत्म हो जाए, तो सो जाओ। सह़ीह़ ठहरो! तुम उतना ही अमल करो, जितने की क्षमता रखते हो। अल्लाह की सौगंध, अल्लाह नहीं उकताएगा, यहाँ तक कि तुम ही उकता जाओगे। तथा आपकी नज़र में वही अमल सबसे सह़ीह़ जब हम किसी मंज़िल पर उतरते तो पालान उतारने से पहले नफ़्ल नमाज़ नही पढ़ते थे। स़ह़ीह़ जब तुममें से कोई मस्जिद के अंदर प्रवेश करे, तो बैठने से पहले दो रकातें पढ़ ले। स़ह़ीह़ हर दो अज़ानों के बीच में नमाज़ है। हर दो अज़ानों के बीच में नमाज़ है।" फिर तीसरी बार फ़रमाया : "उसके लिए, जो पढ़ना चाहे। स़ह़ीह़ ऐ बिलाल, मुझे बताओ कि तुमने इस्लाम में सबसे आशा दिलाने वाला कौन-सा अमल किया है सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने हमें आदेश दिया कि हम दोनों ईदों में कुँवारी तथा परदानशीं स्त्रियों को ले जाएँ। तथा मासिक धर्म वाली स्त्रि सह़ीह़ ऐ अल्लाह! मैंने अपने आपको तेरे हवाले कर दिया, तुझपर ईमान लाया, तुझपर भरोसा किया, तेरी मदद से अपने शत्रुओं से झगड़ा किया और निर्णय को तेरे हवाले कर दिय सह़ीह़ अनस (रज़ियल्लाहु अनहु) का वर्णन है, वह कहते हैं कि जब हम किसी जगह पर उतरते तो पालान उतारने से पहले नफ़्ल नमाज़ नहीं पढ़ते थे
بسم الله الرحمن الرحيم बुध 16 जुमादा अल-अव्वल
الأربعاء 16 جمادى الأولى
أحدب متناقص घटता हुआ कूबड़ दिन 16.6 / 29.5
रोशनी 96%
13 दिनों में अमावस्या
الحمد لله अल्लाह की सारी प्रशंसा है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद