अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम नमाज़ तकबीर से और क़ुरआन पाठ "अल-ह़म्दु लिल्लाहि रब…

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है

स़ह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम नमाज़ तकबीर से औ…

हदीस की व्याख्या: अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम नमाज़ तकबीर से औ…

उम्मुल मोमिनीन आइशा रज़ियल्लाहु अन्हा ने नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की नमाज़ के बारे में बताया कि आप अपनी नमाज़ का आरंभ तकबीर-ए-एहराम से करते और कहते : "अल्लाहु अकबर" और क़िरात का आरंभ सूरा फ़ातिहा से करते और कहते : "अल-हम्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन" (सारी प्रशंसा अल्लाह ही के लिए है, जो सारे संसारों का पालनहार है...।) और जब क़ियाम के बाद रुकू करते, तो रुकू के दौरान अपना सर न ऊँचा रखते और न बहुत ज़्यादा झुका देते, बल्कि बिल्कुल सीधा और बराबर रखते थे। और जब रुकू से अपना सर उठाते, तो सजदा करने से पहले सीधे खड़े हो जाते, और जब पहले सजदे से सर उठाते, तो तब तक दूसरा सजदा नहीं करते जब तक कि स्थिर होकर बैठ न जाते। हर दो रकात के बाद तशह्हुद के लिए बैठते और पढ़ते : «अत्तहिय्यातु लिल्लाहि वस्सलवातु वत्तय्यिबात...», तथा जब दोनों सजदों के दरमियान या तशह्हुद के लिए बैठते, तो अपने बाएँ पैर को बिछाकर उसपर बैठते और दाएँ पैर को खड़ा रखते। आप नमाज़ी को अपनी नमाज़ में शैतान की तरह बैठने से मना करते थे। शैतान की तरह बैठना इस प्रकार है कि आदमी अपने दोनों पैरों को ज़मीन पर बिछा दे और अपनी एड़ियों पर बैठे, या अपने नितंबों को ज़मीन से चिपका ले और अपनी पिंडलियों को खड़ा रखे तथा अपने हाथों को ज़मीन पर रखे जैसे कुत्ता बैठता है, या यह कि नमाज़ी सजदे में अपनी भुजाओं को दरिंदों की तरह ज़मीन पर बिछा दे। आप एक बार दायीं ओर और दूसरी बार बायीं ओर «السلام عليكم ورحمة الله» कहकर अपनी नमाज़ का समापन करते थे।

सीख: अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम नमाज़ तकबीर से औ…

श्रेणियाँ : इबादतों पर आधारित फ़िक़्ह · नमाज़ · फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह · नमाज़ का तरीक़ा · नमाज़ियों से होने वाली गलतियाँ

بسم الله الرحمن الرحيم मंगल 15 जुमादा अल-अव्वल
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بدر पूर्णिमा दिन 16.5 / 29.5
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13 दिनों में अमावस्या
أستغفر الله मैं अल्लाह से माफी माँगता हूँ

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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