इस्लाम > Hi > हदीस > फकह तथ उसल ए फकह > नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने विशेष रूप से तैयार किए गए घोड़ों के बीच (जिन्हें खूब खिल…
सह़ीह़27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
📖 1 मिनट पढ़ने का समयعن عبد الله بن عمر رضي الله عنهما قال: «أَجْرَى النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ما ضُمِّرَ مِن الْخَيْل: مِنْ الْحَفْيَاءِ إلَى ثَنِيَّةِ الوَداع، وَأَجْرَى ما لَمْ يُضَمَّرْ: مِنْ الثَّنِيَّةِ إلَى مسجد بني زُرَيْقٍ. قَال ابن عمر: وَكنْتُ فِيمَن أَجْرى. قَالَ سفيان: مِن الْحَفْيَاء إلى ثَنِيَّة الوداع: خمسة أمْيال، أو سِتَّة، ومن ثَنِيَّة الوداع إلى مسجد بني زُرَيْقٍ: مِيلٌ».
नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- जिहाद के लिए तैयार रहते, उसके माध्यमों तथा असबाब को तैयार रखते थे, अल्लाह के इस क़ौल पर अमल करते हुए किः (जितना हो सके, उनके मुकाबले के लिए भर पूर ताक़त और घोड़े तैयार करो, जिस से तुम अल्लाह के शत्रुओं और तुम्हारे शत्रुओं के दिलों में भय पैदा कर दो) इसी कारण आप घोड़ों को खिला पिला कर शक्तिशाली बनाते तथा सहाबा को घोड़ सवारी की शिक्षा के लिए, उस पर मुक़ाबला कराते थे, तथा तैय्यार शुदा घोड़ों की अलग सीमाऐं और दुसरे घोड़ों की अलग सीमाऐं होती थीं, ताकि घोड़े शिक्षित हों और सहाबा जिहाद की स्थिति में रहें। इसी कारण तैयार किए गए घोड़ों के बीच छे मील तथा साधारण घोड़ों के बीच एक मील तक घोड़ दौड़ की परतियोगिता करवाई। अब्दुल्लाह बिन उमर इस में शामिल होने वाले नौजवान सहाबा में थे।
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