ये चौपाए भी जंगली जानवरों की तरह भाग खड़े होते हैं। इनमें से जिनपर तुम्हारा बस न चले उनके …

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है

स़ह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: ये चौपाए भी जंगली जानवरों की तरह भाग खड़े होते हैं। इनम…

हदीस की व्याख्या: ये चौपाए भी जंगली जानवरों की तरह भाग खड़े होते हैं। इनम…

राफ़े बिन ख़दीज रज़ियल्लाहु अनहु बयान कर रहे हैं कि सहाबा अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के साथ ज़ुल-हुलैफ़ा में रुके। लोगों को भूख़ लगी हुई थी और मुश्रिकों से माल-ए-ग़नीमत के तौर पर ऊँट एवं बकरियाँ प्राप्त हुई थीं। अतः उन्होंने माल-ए-ग़नीमत के वितरण की प्रतीक्षा किए बिना ही कुछ जानवर ज़बह कर दिए और हाँडियाँ चढ़ा दीं। अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से अनुमति भी नहीं ली गई। आपकी आदत यह थी कि सेना के पिछले भाग में चला करते थे। आपको पता चला तो हाँडियों को पक रहे गोश्त समेत उलट देने का आदेश दिया। फिर माल-ए-ग़नीमत का वितरण किया। वितरण के समय दस बकरियों को एक ऊँट के बराबर रखा। इसी बीच हुआ यह कि एक ऊँट भाग निकला और सहाबा उसे पकड़ नहीं सके। घोड़ों की कमी थी। अतः एक व्यक्ति ने तीर चलाया और अल्लाह ने उसे रोक दिया। इसपर अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : इन पालतू जानवरों के अंदर भी जंगली जानवरों जैसा स्वभाव पाया जाता है। इसलिए जो जानवर तुम्हारे वश से बाहर हो जाए और पकड़ में न आए, उसके साथ यही किया करो। इसके बाद राफ़े ने कहा : ऐसा लगता है कि कल दुश्मन से हमारा मुक़ाबला होने वाला है, और इस बात का डर है कि हम जिन हथियारों से जानवर ज़बह करते हैं, उनकी धार क्षतिग्रस्त हो जाए। जबकि हमें जानवर ज़बह तो करना ही होगा और हमारे पास चाक़ू भी नहीं है। ऐसे में क्या बाँस से ज़बह कर सकते हैं? आपने उत्तर दिया : जो चीज़ बड़ी मात्रा में रक्त बहा दे और उससे ज़बह करते समय अल्लाह का नाम ले लिया जाए, तो तुम ज़बह किए हुए जानवर का मांस खा सकते हो। बस दाँत और नाख़ून से ज़बह किया हुआ नहीं। मैं तुम्हें इसका कारण भी बता देता हूँ। जहाँ तक दाँत की बात है, तो वह हड्डी है और जहाँ तक नाख़ून की बात है, तो हब्शा के रहने वाले अविश्वासी उसका प्रयोग करते हैं।

सीख: ये चौपाए भी जंगली जानवरों की तरह भाग खड़े होते हैं। इनम…

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سبحان الله وبحمده अल्लाह की महिमा और स्तुति है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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