जमात के साथ पढ़ी गई नमाज़ अकेले पढ़ी गई नमाज़ के मुक़ाबले में सत्ताईस दरजा श्रेष्ठ है।

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।

सह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: जमात के साथ पढ़ी गई नमाज़ अकेले पढ़ी गई नमाज़ के मुक़ाब…

عن عبد الله بن عمر رضي الله عنهما أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ: «صلاةُ الجَمَاعَة أَفضَلُ من صَلاَة الفَذِّ بِسَبعٍ وعِشرِين دَرَجَة».

हदीस की व्याख्या: जमात के साथ पढ़ी गई नमाज़ अकेले पढ़ी गई नमाज़ के मुक़ाब…

यह हदीस़ जमाअत के साथ पढ़ी गई नमाज़ के अकेले पढ़ी गई नमाज़ से उत्तम होने का उल्लेख करते हुए कहती है कि जमाअत वाली नमाज़ (अन्य महत्वपूर्ण फ़ायदों और लाभों के अतिरिक्त) अकेले की नमाज़ से सत्ताईस गुना अधिक सवाब रखती है। क्योंकि दोनों नमाज़ों के बीच उद्देश्य की पूर्ति के मामले में ज़मीन आसमान का अंतर है तथा इस बात में किसी संदेह की गुंजाइश नहीं है कि जिसने इस बड़े लाभ को नष्ट कर दिया, वही वास्तव में वंचित व्यक्ति है।

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بسم الله الرحمن الرحيم मंगल 15 जुमादा अल-अव्वल
الثلاثاء 15 جمادى الأولى
بدر पूर्णिमा दिन 16.5 / 29.5
रोशनी 97%
13 दिनों में अमावस्या
لا حول ولا قوة إلا بالله अल्लाह के बिना कोई शक्ति और सामर्थ्य नहीं

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद