इस्लाम > Hi > हदीस > फकह तथ उसल ए फकह > सूरज और चाँद अल्लाह की निशानियों में से दो निशानियाँ हैं। उन्हें ग्रहण किसी व्यक्ति की मौत…
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27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
📖 3 मिनट पढ़ने का समयعن عائشة رضي الله عنها قالت: « خَسَفَتِ الشمس على عهد رسول الله صلى الله عليه وسلم فصَلَّى رسول الله صلى الله عليه وسلم بالناس. فأطال القيام، ثم ركع، فأطال الركوع، ثم قام، فأطال القيام -وهو دون القيام الأول- ثم ركع، فأطال الركوع -وهو دون الركوع الأول- ثم رفع فأطال القيام -وهو دون القيام الأول- ثم سجد، فأطال السجود، ثم فعل في الركعة الأخرى مثل ما فَعَل في الرَّكعة الأولى، ثم انصرف، وقد تَجَلَّتْ الشمس، فخَطَب الناس، فحَمِد الله وأَثْنَى عليه، ثُمَّ قال: إِنَّ الشَّمس والقمَر آيَتَان مِن آيات الله، لا ينْخَسِفَانِ لموت أحد ولا لِحَيَاته، فَإِذا رَأَيتُم ذلك فَادْعُوا اللَّه وكَبِّرُوا ، وصَلُّوا وتَصَدَّقُوا.
ثم قال: يا أُمَّة مُحمَّد، واللهِ ما من أحد أغْيَرُ من الله أن يَزْنِيَ عبده أو تَزْنِيَ أَمَتُهُ. يا أُمَّةَ محمد، والله لو تعلمون ما أعلم لَضَحِكْتُمْ قليلا ولَبَكَيْتم كثيرا». وفي لفظ: «فاسْتَكَمَل أَرْبَع رَكَعَاتٍ وَأَرْبَع سَجَدَاتٍ».
अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के ज़माने में सूरज ग्रहण हुआ। चूँकि यह एक असमान्य घटना थी, इसलिए अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने एक ऐसी नमाज़ पढ़ाई जो अपने आकार एवं मात्रा में अनोखी थी। आप खड़े हुए और लोगों को इस तरह नमाज़ पढ़ाई कि तकबीर-ए-तहरीमा के पश्चात बड़ा लंबा क़याम किया, फिर रुकू किया और लंबा रुकू किया, फिर खड़े हुए और लंबी क़िरात की, जो पहली क़िरात की तुलना में कुछ संक्षिप्त थी, फिर रुकू किया और लंबा रुकू किया, परन्तु वह पहले रुकू की तुलना में हल्का था, फिर रुकू से सर उठाया और "समिअल्लाहु लिमन हमिदह" दुआ पढ़ी और क़िरात नहीं की, फिर सजदा कियl और लंबा सजदा किया। फिर दूसरी रकात में वही कुछ किया जो पहली रकात में किया था, लेकिन यह रकात पहली रकात के मुक़ाबले में ज़रा हल्की थी और उसका हर रुक्न अपने से पहले रुक्न से ज़रा हल्का था। इस तरह दो रकात में कुल चार रुकू और चार सजदे किए। फिर आपने नमाज़ से सलाम फेरा, तो सूरज साफ़ होकर निकल चुका था। फिर ख़ुतबा दिया, जैसा कि विभिन्न अवसरों पर ख़ुतबा दिया करते थे। उसमें अल्लाह की प्रशंसा तथा स्तुति की और लोगों को नसीहत की। इत्तेफ़ाक़ से जिस दिन सूरज ग्रहण हुआ था, उसी दिन आपके बेटे इब्राहीम -अल्लाह उनसे प्रसन्न हो- की मृत्यु भी हुई थी। इसलिए जाहिलियत काल की इस धारणा के अनुसार कि सूरज ग्रहण किसी बड़े आदमी की मौत अथवा किसी बड़े आदमी की पैदाइश के कारण होता है, कुछ लोग कहने लगे कि आज की यह घटना इब्राहीम की मृत्यु के कारण घटित हुई है। ऐसे में, नबी -सल्लल्लाहु अलैहे व सल्लम- ने उचित जाना कि लोगों को समझाया जाए, अपना विशुद्ध संदेश पहुँचा दिया जाए और लोगों के ज़ेह्न में बैठे हुए इस मिथक को हटाने के साथ-साथ, जिसका न क़ुरआन व हदीस से कोई सबूत है और न स्वच्छ विवेक ही उसे सही मानता है, सूरज तथा चाँद ग्रहण की असल हिकमत बयान कर दी जाए। चुनांचे आपने ख़ुतबे में फ़रमाया : वास्तव में सूर्य एवं चाँद अल्लाह की निशानियों में से दो निशानियाँ हैं। उनमें किसी व्यक्ति के जीवन और मौत से ग्रहण नहीं लगता। दअसल इस तरह की घटनाएँ अल्लाह अपनी शक्ति से घटित करता है, ताकि उनसे अपने बंदों को भयभीत करे तथा उन्हें अपनी नेमतों की याद दिलाए।
इसलिए जब तुम ऐसा कुछ देखो, तो अल्लाह की ओर तौबा करते और रुजू करते हुए भागो, दुआ करो, तकबीर कहो, नमाज़ पढ़ो और सदक़ा करो, इसलिए कि उससे संभावित आपदा एवं आने वाली यातना दूर हो सकती है।
फिर आप -सल्लल्लाहु अलैहे व सल्लम- उनके सामने कुछ बड़े गुनाहों को विस्तृत रूप से बयान करने लगे। जैसे कि व्यभिचार, जो समाज एवं मानव व्यवहार को बिगाड़ने का काम करता है और अल्लाह के क्रोध तथा दंड को अनिवार्य कर देता है। इस ख़ुतबे में आपने, जो सच्चे भी हैं और जिनको सच्चा माना भी गया है, यह कहते हुए क़सम खाई कि ऐ मुहम्मद की उम्मत, अल्लाह की सौगंध, अल्लाह से अधिक इस बात से किसी को ग़ैरत नहीं आती कि उसका दास अथवा उसकी दासी व्यभिचार में लिप्त हो। फिर बताया कि लोगों को अल्लाह की सज़ा के संबंध में बहुत थोड़ी जानकारी है। यदि वे वो बातें जान लेते जो आप -सल्लल्लाहु अलैहे व सल्लम- जानते हैं, तो भयाक्रांत हो जाते और हँसते बहुत कम एवं रोते तथा दुखी अधिक रहते। परन्तु अल्लाह ने अपनी हिकमत से इस उनसे छुपा रखा है।
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