अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) खड़े होकर दो ख़ुतबे देते थे और दोनों के बीच में …

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे बैहक़ी ने रिवायत किया है। - इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।

दोनों रिवायतों को मिलाकर सह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) खड़े होकर दो…

عن عبد الله بن عُمر بن الخطاب رضي الله عنهما قال: «كان النبي صلى الله عليه وسلم يخطب خطبتين يقعد بينهما» وفي رواية لجابر - رضي الله عنه-: «كان رسول الله صلى الله عليه وسلم يَخْطُبُ خُطْبَتَيْنِ وهو قائم، يفصل بينهما بجلوس».

हदीस की व्याख्या: अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) खड़े होकर दो…

जुमे के दिन एक बड़ा मजमा होता है, जिसमें पूरे शहर के लोग शामिल होते हैं। यही वजह है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम-, जिनका हर काम हिकमत से भरा होता था, उस दिन लोगों के समाने दो संबोधन रखते और उन्हें भलाई का रास्ता बताने तथा बुराई से रोकने का काम करते थे। दोनों ख़ुतबे आप मिंबर पर खड़े होकर दिया करते थे, ताकि लोगों को समझाने और सिखाने का कार्य अधिक अच्छे ढंग से हो सके। साथ ही खड़े होकर ख़ुतबा देने से इस्लाम की शान व शौकत और शक्ति भी झलकती है।

जब पहला ख़ुतबा संपन्न हो जाता, तो क्षणिक देर आराम के लिए बैठ जाते और पहले खु़तबे को दूसरे से अलग कर देते। उसके बाद फिर खड़े होते और दूसरा खुतबा देते, ताकि न ख़ुतबा देने वाले को थकान महसूस हो और न सुनने वाले उकताएँ।

श्रेणियाँ : इबादतों पर आधारित फ़िक़्ह · नमाज़ · फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह · जुमे की नमाज़

بسم الله الرحمن الرحيم मंगल 15 जुमादा अल-अव्वल
الثلاثاء 15 جمادى الأولى
بدر पूर्णिमा दिन 16.5 / 29.5
रोशनी 97%
13 दिनों में अमावस्या
الحمد لله अल्लाह की सारी प्रशंसा है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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