अल्लाह ने मेरी उम्मत की वह बातें माफ़ कर रखी हैं, जो उसके दिलों में आएँ, जब तक अमल न करे अ…
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हदीस वर्णनकर्ता: इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
स़ह़ीह़
27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
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हदीस का पाठ: अल्लाह ने मेरी उम्मत की वह बातें माफ़ कर रखी हैं, जो उस…
हदीस की व्याख्या: अल्लाह ने मेरी उम्मत की वह बातें माफ़ कर रखी हैं, जो उस…
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि एक मुसलमान के दिल में आने वाले बुरे ख़्यालों की बिना पर उस समय तक उसकी पकड़ नहीं होगी, जब तक उनपर अमल न किया जाए या उनको ज़बान पर न लाया जाए। क्योंकि इस प्रकार के ख़्यालात माफ़ हैं। यह अल्लाह का अनुग्रह है कि मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के उम्मती के ज़ेहन में तैरने वाले और उसके दिल में पैदा होने वाले ख़्यालों को उस समय तक पकड़ के लायक़ क़रार नहीं दिया है, जब तक दिल के अंदर बैठ न जाएँ और दिल उनसे संतुष्ट न हो जाए। अगर अहंकार, घमंड और निफ़ाक़ आदि बुरे ख़्यालात दिल में बैठ जाएँ, और इन्सान अपने शरीर के अंगों द्वारा उनपर अमल कर ले या ज़बान से उनका इज़हार कर दे, तो पकड़ के योग्य होंगे।
सीख: अल्लाह ने मेरी उम्मत की वह बातें माफ़ कर रखी हैं, जो उस…
- अल्लाह ने उन ख़्यालों को माफ़ कर दिया है, जो दिल में पैदा होते हैं। यानी जिनके बारे में इन्सान दिल में सोचता है और जो इन्सान के दिल में गुज़रते हैं।
- अगर इन्सान के ज़ेहन में तलाक़ का ख़्याल आए, लेकिन वह ज़बान से न बोले और क़लम से न लिखे, तो उसका अपने दिल में तलाक़ के बारे में सोचना तलाक़ शुमार नहीं होगा।
- दिल में आने वाले ख़्यालात चाहे जितने बड़े हों, उनपर उस समय तक पकड़ नहीं होगी, जब तक दिल के अंदर बैठ न जाएँ और उनपर इन्सान अमल न करे या ज़बान पर न लाए।
- मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की उम्मत की एक बहुत बड़ी विशेषता यह है कि दिल में आने वाले ख़्यालों के कारण उसकी पकड़ नहीं होगी, जबकि पहले की तमाम उम्मतों के साथ ऐसा होता था।
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بسم الله الرحمن الرحيم
बुध 16 जुमादा अल-अव्वल
الأربعاء 16 جمادى الأولى
سبحان الله وبحمده
अल्लाह की महिमा और स्तुति है