अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जब 'سمع الله لمن حمده' (समिअल्लाहु लिमन ह़मिदहु) क…
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हदीस वर्णनकर्ता: इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
स़ह़ीह़
27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
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हदीस का पाठ: अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जब 'سمع الله لم…
हदीस की व्याख्या: अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जब 'سمع الله لم…
बरा बिन आज़िब रज़ियल्लाहु अन्हु, जो कि सच्चे हैं, बताते हैं कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जब रुकू से अपना सर उठाते और 'سمع الله لمن حمده' (समिअल्लाहु लिमन ह़मिदहु) कहते, तो आपके पीछे खड़े लोग खड़े ही रहते थे और कोई भी सजदे के लिए अपनी पीठ उस वक़्त तक नहीं झुकाता था, जब तक कि आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अपनी पेशानी ज़मीन पर न रख देते। आपके ज़मीन पर पेशानी रखने के बाद ही लोग सजदे में जाते थे।
सीख: अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जब 'سمع الله لم…
- सहाबा नमाज़ में रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का अनुसरण इस प्रकार करते थे कि वे क़ियाम से सजदे में तब तक नहीं जाते थे, जब तक कि आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम सजदा न कर लेते।
- अल्लामा इब्न -ए- दक़ीक़ अल-ईद कहते हैं : इसमें अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के भरपूर इत्मीनान का प्रमाण है।
- अनुसरण के लिहाज़ से इमाम के साथ मुक़तदी की चार हालतें हैं : 1- आगे बढ़ जाना : यानी किसी काम को अपने इमाम से पहले शुरू कर देना, इस तौर पर कि मुक़्तदी इमाम के किसी रुक्न तक पहुँचने से पहले ही वहाँ पहुँच जाए। जैसे : इमाम के रुकू करने से पहले रुकू कर लेना, या इमाम के सजदा करने से पहले सजदा कर लेना। यह हराम है, और यदि मनाही का ज्ञान होने के बावजूद जान-बूझकर आगे बढ़ता है, तो नमाज़ बातिल हो जाएगी, चाहे एक रुक्न में इमाम से आगे बढ़ जाए या किसी रुक्न तक पहुँचने में उससे पहले पहुँच जाए। और यदि यह तकबीर-ए-इह़राम में हो, तो उसकी नमाज़ शुरू ही नहीं होगी और उसपर नए सिरे से नमाज़ पढ़ना वाजिब होगा। 2- साथ-साथ चलना : यानी इमाम के साथ-साथ रहना, उसके रुकू के साथ रुकू करना, उसके सजदे के साथ सजदा करना और उसके उठने के साथ उठना। इसकी न्यूनतम स्थिति मकरूह होने की है, और प्रमाणों से स्पष्ट है कि यह भी हराम है। यदि तकबीर-ए-इह़राम में इमाम के साथ-साथ तकबीर कहता है, तो नमाज़ शुरू ही नहीं होगी और उसे दोबारा पढ़ना होगा। 3- अनुसरण करना : यानी नमाज़ के कार्यों को अपने इमाम के बाद बिना किसी देरी के करना। यही धर्म-सम्मत और सुन्नत के अनुसार है। 4- पीछे रह जाना : यानी अपने इमाम से इतना पीछे रह जाना कि अनुसरण की सीमा से बाहर हो जाए। जैसे इमाम रुकू कर ले और मुक़्तदी तब तक खड़ा रहे जब तक कि इमाम रुकू से उठने के करीब न हो जाए। यह धर्म-सम्मत कार्य के विरुद्ध और हराम है, सिवाय इसके कि कोई उचित कारण हो, जैसे बीमारी या बुढ़ापा आदि।
श्रेणियाँ :
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· नमाज़
· फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह
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मंगल 15 जुमादा अल-अव्वल
الثلاثاء 15 جمادى الأولى
لا حول ولا قوة إلا بالله
अल्लाह के बिना कोई शक्ति और सामर्थ्य नहीं