अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) किसी महीने में शाबान से अधिक रोज़ा (उपवास) नहीं र…

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।

सह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) किसी महीने में…

عن عائشة رضي الله عنها قالت: لم يكن النبي صلى الله عليه وسلم يصوم مِنْ شهر أكثر من شعبان، فإنّه كان يصوم شعبان كله.
وفي رواية: كان يصوم شعبان إلا قليلا.

हदीस की व्याख्या: अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) किसी महीने में…

आइशा -रज़ियल्लाहु अनहा- से वर्णित है, वह कहती हैं : अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- किसी महीने में शाबान से अधिक रोज़ा नहीं रखते थे। आप शाबान का पूरा महीना रोज़ा रखते थे। एक रिवायत में है : थोड़ा बहुत छोड़ दें, तो आप शाबान का पूरा महीना रोज़ा रखते थे। ज्ञान हो कि यहाँ दूसरी रिवायत पहली रिवायत की व्याख्या प्रस्तुत करती है और यह बताती है कि पूरे महीने से मुराद उसका अधिकतर भाग है। जबकि कुछ लोगों ने कहा है कि आप किसी साल पूरा महीना रोज़ा रखते थे और किसी साल उसका कुछ भाग। जबकि कुछ लोगों का कहना है कि आप कभी इस महीने के प्रथम भाग में रोज़ा रखते, कभी अंतिम भाग में रोज़ा रखते और कभी दरमियानी भाग में रखते थे और इसका कोई भी भाग बिना रोज़े के नहीं छोड़ते थे। लेकिन कभी-कभी सालों में ऐसा करते थे। अतः इन्सान को चाहिए कि शाबान महीने में अन्य महीनों की तुलना में अधिक रोज़ा रखे, क्योंकि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ऐसा ही किया करते थे। इसकी हिकमत यह है कि रमज़ान से पहले इस महीने का रोज़ा फ़र्ज़ नमाज़ों से पहले की सुन्नत नमाज़ों की तरह है। जबकि कुछ लोगों का कहना है कि विशेष रूप से शाबान में अधिक रोज़े इसलिए रखा करते थे कि इस महीने में बंदों के कर्म ऊपर ले जाए जाते हैं, जैसा कि सुन्नत से साबित है।

श्रेणियाँ : इबादतों पर आधारित फ़िक़्ह · रोज़े · फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह · नफ़ल रोज़े

بسم الله الرحمن الرحيم मंगल 15 जुमादा अल-अव्वल
الثلاثاء 15 جمادى الأولى
بدر पूर्णिमा दिन 16.5 / 29.5
रोशनी 97%
13 दिनों में अमावस्या
الله أكبر अल्लाह सबसे महान है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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