जो किसी ऐसे रोगी का हाल जानने के लिए जाता है, जिसकी मौत का अभी समय नहीं आया है और उसके पास…
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हदीस वर्णनकर्ता: इस ह़दीस़ को अबू दावूद, तिर्मिज़ी और अह़मद ने रिवायत किया है
स़ह़ीह़
27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
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हदीस का पाठ: जो किसी ऐसे रोगी का हाल जानने के लिए जाता है, जिसकी मौत…
हदीस की व्याख्या: जो किसी ऐसे रोगी का हाल जानने के लिए जाता है, जिसकी मौत…
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया है कि जब कोई मुसलमान किसी मुसलमान का हाल जानने ऐसी बीमारी के समय जाता है, जिसमें उसकी मृत्यु न लिखी हो, फिर उसके लिए यह दुआ पढ़ता है : "أسأل الله العظيم" अर्थात्, मैं अल्लाह से, जो अपनी ज़ात, गुणों एवं कार्यों में महान है, "رب العرش العظيم أن يشفيك" तथा महान अर्श (सिंहासन) का मालिक है, दुआ करता हूँ कि तुम्हें रोगमुक्त कर दे, साथ ही इस दुआ को सात बार दोहरता है, तो अल्लाह उसे उस बीमारी से स्वस्थ कर देता है।
सीख: जो किसी ऐसे रोगी का हाल जानने के लिए जाता है, जिसकी मौत…
- रोगी के लिए यह दुआ करना और इसे सात बार दोहराना मुसतहब है।
- जिसके लिए यह दुआ की जाए, उसे अल्लाह की अनुमति से स्वस्थ लाभ होगा, बशर्तेकि दुआ सच्ची नीयत और निष्ठा के साथ की जाए।
- यह दुआ धीमे और ज़ोर से दोनों तरह से करना जायज़ है। लेकिन रोगी को सुनाकर करना उत्तम और वांछित है, क्योंकि, इससे उसे ख़ुशी मिलेगी।
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