इस्लाम प्रभावी होता है, प्रभावित नहीं होता।

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे बैहक़ी ने रिवायत किया है। - इसे दारक़ुतनी ने रिवायत किया है ।

ह़सन

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: इस्लाम प्रभावी होता है, प्रभावित नहीं होता।

عن عائذ بن عمرو المزني رضي الله عنه عن النبي صلى الله عليه وسلم قال: «الإسلام يَعْلُو ولا يُعْلَى».

हदीस की व्याख्या: इस्लाम प्रभावी होता है, प्रभावित नहीं होता।

यह हदीस इस्लाम का एक बहुत बड़ा सिद्धांत प्रस्तुत करती है। सिद्धांत यह है कि अल्लाह ने इस्लाम के लिए प्रतिष्ठा एवं उत्कर्ष लिख दिया है। अतः मुसलमान जब तक इस्लाम को थामे रहेंगे, प्रतिष्ठित एवं अच्छी अवस्था में रहेंगे। इस्लाम को थामे रहना प्रतिष्ठा प्राप्त करने की शर्त है। ज्ञात हो कि इस हदीस में जो सूचना दी गई है, वह एक तरह का आदेश है। जैसा कि अल्लाह ने कहा है : {ولا تهنوا ولا تحزنوا وأنتم الأعلون إن كنتم مؤمنين} (तुम निर्बल तथा उदासीन न बनो और तुम ही सर्वोच्च रहोगे, यदि तुम ईमान वाले हो।) इस हदीस के अंदर सभी परिस्थितियाँ आ जाती हैं। उलेमा ने इसे प्रमाण बनाकर बहुत-से धार्मिक आदेश प्राप्त किए हैं। इसके दायरे में जिज़्या का अध्याय भी आता है। क्योंकि ज़िम्मी लोग जब जिज़्या देने के बाद हमारे बीच रहेंगे, तो उन्हें खुल्लम-खुल्ला नाक़ूस बजाने तथा सलीब स्थापित करने की अनुमति नहीं होगी और न उनके भवन मुसलमानों के भवनों से ऊँचे होंगे। इसी तरह यदि माता-पिता में से कोई मुसलमान हो जाए, तो बच्चा दोनों में से उत्तम धर्म को मानने वाले यानी मुसलमान के मातहत होगा। इसी तरह, मुस्लिम स्त्री का विवाह काफ़िर पुरुष से नहीं हो सकता। कुल मिलाकर यह कि हर वह बात, जिससे इस्लाम की प्रतिष्ठा झलकती हो, उसे प्राथमिकता दी जाएगी।

श्रेणियाँ : इबादतों पर आधारित फ़िक़्ह · जिहाद · फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह · जिम्मियों के अहकाम

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اللهم صل على محمد ऐ अल्लाह, मुहम्मद पर दरूद भेज

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद